News Analysis India

Share your experiences

टॉल्स्टॉय ने वाड्रा से पूछा -आदमी को कितनी जमीन चाहिए?

टॉल्स्टॉय की एक कहानी है-'आदमी को कितनी जमीन चाहिए.?'

मुख्य चरित्र पोहोम (Pahóm) नाम का एक आदमी है। कहानी की शुरुआत में, वह एक किसान है  और  एक सभ्य जीवन जी रहा  है. वह कहता है,  "यदि मैं अपार भूमि का मालिक होता, तो मुझे  मैं खुद शैतान से भी नहीं डरता!" वह समझ नहीं सक रहा है की शैतान तो उसकी बगल में बैठा है और सब सुन रहा है।

शैतान कहते हैं: "ठीक है! हम उस बारे में देखेंगे, मैं आपको पर्याप्त जमीन दे दूँगा; और उस भूमि के माध्यम से मैं तुम्हें गृप लेकर अपनी शक्ति बताऊंगा "

शीघ्र ही, पोहोम अपने गांव में एक महिला से कुछ जमीन खरीदने के लिए सफल हुआ है। वह कठिन परिश्रम करता है एक लाभ इतना प्राप्त करता  है जिससे और अधिक आरामदायक जीवन जी सकता है और अपना कर्ज चुकाने में सक्षम है; लेकिन उसकी लालसा और बढ़ती है. परन्तु एक किसान ने उसे बताया की वह और अधिक जमीन का मालिक बन सकता है। अधिक भूमि के मालिक को अवसर के बारे में उसे बताया था के बाद, वह. पोहोम अधिक फसलों वाले भूमि क्षेत्र में और भूमि खरीद लेता है. फिर भी वह संतुष्ट नहीं है।  वह एक अन्य बड़े प्रदेश में भाग्य अजमाने जाता है। उसे और भूमि का मालिक बनने का अवसर मिलता है। 

वहां उसे लुभावना ऑफर मिलता है वह उन सभी के लिए है जो उनसे भूमि खरीदने का इच्छुक है।

उक्त ऑफर के अनुसार एक हजार रूबल (उन दिनों में एक बड़ी राशि) देने पर  पोहोम उतनी भूमि का मालिक बन सकता है, जितना वह एक दिन में चारों ओर चल सकता है. उसे भोर में शुरू और रास्ते में मुख्य बिंदुओं पर एक फावड़ा के साथ अपने मार्ग चिह्नित करते जाना है और सूर्यास्त के पहले उसे स्टार्टिंग पॉइंट पर लौटना है। यदि ऐसा करने में Pahóm विफल हो जाता है तो उसके एक हजार रूबल जब्त हो सकते हैं।

पोहोम इस ऑफर को सुन कर रोमांचित हो जाता है और कहने लगता है की वह आसानी से एक लम्बी दुरी कवर कर स्टार्टिंग पॉइंट पर निश्चित समय पर लौट सकता है और इस प्रकार अपार भूमि का मालिक बन सकता है। वह हंसाने लग जाता है।  उस रात्रि में वह सपना देखता है जिसमें पोहोम स्वयं को शैतान के चरणों में मृत पाता है। यह पूर्वाभास सपना है।

अगले दिन, शुरुआती बिंदु को बाश्किरस को दिखा कर छितिज के सूरज की तरफ निहारता है और दौड़ना प्रारम्भ कर देता है। उसे वापस स्टार्टिंग पॉइंट पर सूर्यास्त से पहले लौटना है, लालच में इस आस्तिकता को भूल कर वह लगातार सिर्फ थोड़ा और अधिक भूमि को जोड़ने के विचार से आगे दौड़ता ही जाता है। वह भी लालची हो गया है और बहुत अधिक भूमि ले लिया है, एहसास है कि वह Bashkirs इंतजार कर रहा हैं. तेजी से वह वापस चलता है। सूरज के डूबने से पहले ही वह प्रारंभिक बिंदु पर लौट आता है जहाँ पर Bashkirs इंतजार कर रहा हैं. Bashkirs उसके अच्छे भाग्य का जयकार करता है परन्तु थकावट से पहोम मृत हो कर भूमि पर गिर पड़ता है।

महान लेखक टालस्टाय ने निष्कर्ष निकाला है: "Bashkirs अपनी जीभ क्लिक किया दया के रूप मेंउनका नौकर कुदाल उठाया और उतनी कब्र खोदा और उसमें पहोम को दफन कर दिया। पहोम लको उसके सर से लेकर उसके जूते. के टेल तक फ़ीट भूमि की ही जरुरत है।

टॉल्स्टॉय रूस के एक बहुत बड़े लेखक हुए हैं। इन्हीं टॉल्स्टॉय की एक कहानी है-'आदमी को कितनी जमीन चाहिए.?' इस कहानी में उन्होंने यह नहीं बताया कि हर आदमी को अपनी गुज़र-बसर कें लिए किनती ज़मीन की जरूरत है। उन्होनें तो दूसरी ही बात कहीं है। वह कहते हैं कि आदमी ज्यादा-से-ज्यादा जमीन पाने के लिए कोशिश करता है, उसके लिए हैरान होता है, भाग-दौड़ करता है, पर आखिर में कितनी जमीन उसके काम आती है? कुल :फुट, जिसमें वह हमेशा के लिए सो जाता है। यों कहने को यह कहानी है, पर इसमें दो बातें बड़े पते की कही गयी है। पहली यह कि आदमी की इच्छाऍं, कभी पूरी नही होतीं। जैसे-जैसे आदमी उनका गुलाम बनता जाता है, वे और बढ़ती जाती हैं। दूसरे, आदमी आपाधापी करता है, भटकता है, पर अन्त में उसके साथ कुछ भी नहीं जाता।

विकी सोर्स के अनुसार यह कहानी महात्मा गांधीजी को इतनी पसन्द आयी थी कि उन्होनें इसका गुजराती में अनुवाद किया। अधिक से अधिक भूमि हथियाने के लालच में भागते-भागते जब आदमी मृत्यु को प्राप्त होता है तो कहानी पढ़ने वालों की आँखों से अश्रु की धरा बहने लगती है। उनका दिल कह उठता है-'ऐसा धन किस काम का!' परन्तु गांधी परिवार और वाड्रा परिवार के बचे खुचे सदश्यों की सोच अलग ही है. वे क्रिस्चियन हैं. उनकी सोच कुछ लोगों के अनुसार यह हो सकती है की उन्हें पोप ने विशेष रूप से उनके द्वारा भोले भले आदिवासी हिन्दू समाज को क्रिस्चियन जबरन बनाने के पुरष्कार स्वरुप अनुमति दी है किस दोनों परिवार के ये सदस्य हिंदुस्तान में  बोफोर्स से लेकर डी एल ऍफ़ तक के सैकड़ों घोटाले कर के जो अपार धन राशि बटोरी गई है उसे  इटली में ला सकते हैं।  इटली की नागरिकता और उनके बंगले भी आख़िरकार इटली में त��� है ही। लुनमें से अधिकतर का जैम भी तो इटली या स्कॉटिश में हुआ है.aur वे सभी तो क्रिस्चियन ही हैं. हिन्दू देश हिंदुस्तान में उनका अंतिम समय में क्या काम है?

अपनी इस काहानी में टॉल्सटॉय ने जो बात कही है, ठीक वहीं बात हमारे साधु-सन्त, और त्यागी-महात्मा सदा से कहते आये है। उन्होने कहा है कि यह दुनिया एक माया-जाल है। जो इसमें फँसा कि फिर निकल नहीं पाता। लक्ष्मी यानी धन-दौलत को उन्होंने चंचला माना है। वे कहते हैं, "पैसा किसी के पास नहीं टिकता। जो आज राजा है, वही कल को भिखारी बन जाता है।"......................contd

"डी एल ऍफ़ -वाड्रा भ्रस्ट तंत्र " हिंदी में लिखी मेरी आगामी पुस्तक  में डी एल ऍफ़ के चेयरमैन के पी सिंह  और राजीव गांधी की मित्रता से लेकर डी एल ऍफ़ -वाड्रा घोटाले तक के विाराणत्मक तथ्य हैं। भ्रस्ट लेन देन को बही खातों में विधि सम्मत पारदर्शी बनाने की कला की चर्चा है। के पी सिंह और रोबर्ट वाड्रा राजनीतिक सरन्छन् में लखपति से अरबपति कैसे बने यही इस पुस्तक की विषय वस्तु है।  Email: premendraagrawal@gmail.com

You may visit us at:

Email: premendraagrawal@gmail.com

https://www.facebook.com/newsanalysisindia

https://www.facebook.comac/premendra.agrawal

https://twitter.com/newsanalysisind

https://t witter.com/thechanshattisgarh

 

Recent most viewedul:

Read Book by clicking here: Silent Assassins of Lal Bahadur Shastri, Jan 11-1966

AAP’s Yogendra Yadav Political Guru of Rahul Gandhi: Maoists invade Congress

Ford Foundation of o a Italian village: Donation to Kejriwal who never utter against Sonia?

SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

पढ़िएवाजपेयीजीकी२७कवितायेँ : Read 27 Poems of Atal Bihari Vajpayee:Ji

www.shoppingkendra.com/



दैत्य राजा बलि रूपी गांधी परिवार का घमंड चूर: वाड्रा का भूमि हड़प अभियान बंद

दैत्य राजा बलि रूपी गांधी परिवार का घमंड चूर:

राजा बलि रूपी गांधी परिवार का घमंड चूर करने हेतु भा ज पा (भारतीय जनता पार्टी) ने मई  २०१६ में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वामन रूपी अवतार लिया और सोनिया गांधी का घमंड चूर चूर कर दिया। अब  उनके दामाद श्री रोबर्ट वाड्रा हरियाणा, राजस्थान के किसानों को भूमि हीन करने का दुःसाहस नहीं कर सकेंगे।

अब राजस्थान जैसे ही हरियाणा और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस का सफाया होने वाला है।  जैसे अशोक गहलोत को कहीं मुंह छिपाने की जगह नहीं मिल रही है वाही हाल हुड्डा का होने वाला है।

बलि का अहंकार चूर करने को लिया वामन अवतार

वामन अवतार भगवान विष्णु का पाचवा अवतार है । भगवान की लीला अनंत है और उसी में से एक वामन अवतार है । इसके विषय में श्रीमद्भगवदपुराण में एक कथा है । वामन अवतार कथानुसार देव और दैत्योंके युद्ध में दैत्य पराजित होने लगते हैं । पराजित दैत्य मृत एवं आहतों को लेकर अस्ताचल चले जाते हैं और दूसरी ओर दैत्यराज बलि इंद्र के वज्र से मृत हो जाते हैं तब दैत्यगुरु शुक्राचार्य अपनी मृत संजीवनी विद्या से बलि और दूसरे दैत्य को भी जीवित एवं स्वस्थ कर देते हैं । राजा बलि के लिए शुक्राचार्यजी एक यज्ञ का आयोजन करते हैं तथ अग्नि से दिव्य रथ, बाण, अभेद्य कवच पाते हैं इससे असुरों की शक्ति में वृद्धि हो जाती है और असुर सेना अमरावती पर आक्रमण करने लगती है ।               

इंद्र को राजा बलि की इच्छा का ज्ञान होता है कि राजा बलि इस सौ यज्ञ पूरे करने के बाद स्वर्ग को प्राप्त करने में सक्षम हो जाएंगे, तब इंद्र भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं । भगवान विष्णु उनकी सहायता करने का आश्वासन देते हैं और भगवान विष्णु वामन रुप में माता अदिति के गर्भ से उत्पन्न होने का वचन देते हैं । दैत्यराज बलि द्वारा देवों के पराभव के बाद कश्यपजी के कहने से माता अदिति पयोव्रत का अनुष्ठान करती हैं जो पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है । तब भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन माता अदिति के गर्भ से प्रकट हो अवतार लेते हैं तथा ब्रह्मचारी ब्राह्मण का रूप धारण करते हैं ।              

महर्षि कश्यप ऋषियों के साथ उनका उपनयन संस्कार करते हैं वामन बटुक को महर्षि पुलह ने यज्ञोपवीत, अगस्त्य ने मृगचर्म, मरीचि ने पलाश दण्ड, आंगिरस ने वस्त्र, सूर्य ने छत्र, भृगु ने खड़ाऊं, गुरु देव जनेऊ तथा कमण्डलु, अदिति ने कोपीन, सरस्वती ने रुद्राक्ष माला तथा कुबेर ने भिक्षा पात्र प्रदान किए । तत्पश्चात भगवान वामन पिता से आज्ञा लेकर बलि के पास जाते हैं । उस समय राजा बलि नर्मदा के उत्तर-तट पर अंतिम यज्ञ कर रहे होते हैं ।        

वामन अवतारी श्रीहरि, राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंच जाते हैं । ब्राह्मण बने श्रीविष्णु भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं । राजा बलि दैत्यगुरु शुक्राचार्य के मना करने पर भी अपने वचन पर अडिग रहते हुए, श्रीविष्णु को तीन पग भूमि दान में देने का वचन कर देते हैं । वामन रुप में भगवान एक पग में स्वर्गादि उर्ध्व लोकों को ओर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेते हैं । अब तीसरा पीजी रखने को कोई स्थान नहीं रह जाता है । बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया । ऎसे मे राजा बलि यदि अपना वचन नहीं निभाए तो अधर्म होगा । इसिलिए बलि अपना सिर भगवान के आगे कर देता है और कहता है तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए । वामन भगवान ने ठीक वैसा ही करते हैं और बलि को पटल लोक में रहने का आदेश करते हैं । बलि सहर्ष भवदाज्ञा को शिरोधार्य करता है ।        

बलि के द्वारा वचनपालन करने पर, भगवान श्रीविष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं और दैत्यराज बलि को वर् मांगने को कहते हैं । इसके बदले में बलि रात-दिन भगवान को अपने सामने रहने का वचन मांग लेता है, श्रीविष्णु को अपना वचन का पालन करते हुए, पातललोक में राजा बलि का द्वारपाल बनना स्वीकार करते हैं ।.............contd

"डी एल ऍफ़ -वाड्रा भ्रस्ट तंत्र " हिंदी में लिखी मेरी आगामी पुस्तक  में डी एल ऍफ़ के चेयरमैन के पी सिंह  और राजीव गांधी की मित्रता से लेकर डी एल ऍफ़ -वाड्रा घोटाले तक के विाराणत्मक तथ्य हैं। भ्रस्ट लेन देन को बही खातों में विधि सम्मत पारदर्शी बनाने की कला की चर्चा है। के पी सिंह और रोबर्ट वाड्रा राजनीतिक सरन्छन् में लखपति से अरबपति कैसे बने यही इस पुस्तक की विषय वस्तु है।  Email: premendraagrawal@gmail.com

You may visit us at:

Email: premendraagrawal@gmail.com

https://www.facebook.com/newsanalysisindia

https://www.facebook.comac/premendra.agrawal

https://twitter.com/newsanalysisind

https://t witter.com/thechanshattisgarh

 

Recent most viewedul:

Read Book by clicking here: Silent Assassins of Lal Bahadur Shastri, Jan 11-1966

AAP’s Yogendra Yadav Political Guru of Rahul Gandhi: Maoists invade Congress

Ford Foundation of o a Italian village: Donation to Kejriwal who never utter against Sonia?

SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

पढ़िएवाजपेयीजीकी२७कवितायेँ : Read 27 Poems of Atal Bihari Vajpayee:Ji

www.shoppingkendra.com/