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Vadra ke hath laga 10 Janpathi Alluddini Chirag


वाड्रा के हाथों में १० जनपथी अल्लौद्दीनी चिराग
रॉबर्ट वाड्रा के 'पीतल से हीरे' की कहानी सार्वजनिक डोमेन में है! 
क्या उसे अपने पिता की दुकान से अलादीन का चिराग मिला है? Kleptocracy: अमेरिका हिल्टन होटल समूह डीएलएफ-वाड्रा अलादीन के चिराग व् जादुई हीरे का प्रकाश "डी एल ऍफ़ -वाड्रा भ्रस्ट तंत्र" पुस्तक में देखा जा सकता है? 

उनके पिता स्वर्गीय राजिंदर वाड्रा मुरादाबाद में एक पीतल के बर्तनों के निर्यात का कारोबार करते थे। इस कारन रोबर्ट वाड्रा ने हस्तशिल्प और फैशन सहायक उपकरण का कारोबार शुरू कर घर घर इससे से सम्बंधित सीएन देते रहे।   

डीएलएफ के चेयरमैन केपी सिंह ३० वर्षों में राजीव गांधी की कृपा से अरब पति बने। टाटा को १०० वर्ष और अम्बानी को ५० वर्ष लगे पूरी ताकत झोंकने के उपरांत अरबपति बनाने में! परन्तु अपने रोबर्ट वाड्रा सर्वाधिक गति से १० वर्षों से भी काम समय में अरबपति बन गए। भविष्य में इस उपलब्धि के लिए उनका नाम ग्रीनिश बुक में दर्ज हो सकता है। 

रोबर्ट वाड्रा का जादुई चमत्कार हमें हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली में विशेषकर देखने को मिला है।  रोबर्ट जी का कहना है कि बिना उनके इन -लावों और कांग्रेस शाषित केन्द्र और राज्य सरकारों के संभव हुआ है ! क्या इसका मतलब यह समझा जाए की उन्हें मुरादाबाद की स्वयं की हेंडीक्राफ्ट की दुकान के किसी कोने में छिपा अलादीन का चिराग मिला  है? 
अरबपति बन कर बना इन -लावों का प्यारा 
सास इटली के तो मेरे दुबई के बंगले  में
मुस्कराता हूँ परियों की रानी के बगल में   
मैं फोर्ब्स पत्रिका के कवर का बनूँगा प्यारा

सोनिया गांधी व् उनकी कांग्रेस पार्टी की सरकार की छड़ी से वाड्रा द्वारा जो जादुई अलाउद्दिनी चमत्कार कॉर्पोरेट जगत में डी एल ऍफ़ के साथ मिलकर किया और तीव्र गति से अरबपति बन गए इसी का अधिकाधिक उल्लेख " डी एल ऍफ़ - वाड्रा: भ्रम जाल " मेरी  पुस्तक  में करने का प्रयास हुआ है। इस पुस्तक के सहारे आप वाड्रा की ससुराल की कड़ी कांग्रेस से होती हुई अमेरिका के हिल्टन होटल समूह से कैसे जुडी यह जान सकते हैं।
Email: premendraagrawal@gmail.com

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Rajasthan ki banjar bhumi aur iraq ke tankaron ne sona kiske liye ugala?

राजस्थान की बंजर भूमि और इराक के टैंकरों ने सोना किसके लिए उगला?

बीकानेर में वर्ष में औसत 354 दिनों सूरज की किरणों से रोशन रहता है परन्तु फिर भी वहां के किसानों हमेशा अँधेरे में डूबी रहती है। ठीक इसके विपरीत स्कॉटिश माँ के पुत्र और इटली ओरिजिन सोनिया गांधी के दामाद रोबर्ट वाड्रा राजस्थान में कदम रखते ही राजस्थान की कांग्रेस की गहलोत सरकार और केंद्र में उस समय स्थापित सोनिया जी की उँगलियों पर नाचने वाली मनमोहिनी सरकार की मदद से अपनी किस्मत कैसे चमका सका किसानों को भूमिह��न करके इस रहष्य को इस अध्याय में उजागर किया गया है। रोबर्ट वाड्रा ने राजस्थान की बंजर भूमि से अपने स्वयं के लिए सोना गोल्ड उगलवाने की जादुई कला अपनी सास सोनिया गांधी से सीखी है। क्या  सोनिया गांधी के लिए सद्दाम हुसैन के समय इराकी पेट्रोल के टैंकों ने सोना नहीं  उगला था? क्या यह सबकुछ उस समय यू एन में कार्यरत शशि थरूर, भारत के उस समय के विदेश मंत्री नटवर सिंह, ओत्तावियो क्वात्रोच्चि आदि की मदद से संभव नहीं हुआ था ? इसका उत्तर इसी अध्याय के अंत में दिया जाने का प्रयास हुआ है। 

हम चर्चा करेंगे सद्दाम हुसैन के समय इराकी पेट्रोल के टैंकों ने सोना कैसे उगला था। क्या यह सबकुछ उस समय यू एन में कार्यरत शशि थरूर, भारत के उस समय के विदेश मंत्री नटवर सिंह, ओत्तावियो क्वात्रोच्चि आदि की मदद से संभव नहीं हुआ था ?

 

वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली एन डी ए सरकार के उपरांत कांग्रेस के नेतृत्व वाली यू पी ए सरकार का आगमन सोनिया के नाम के अनुरूप गांधी वाड्रा परिवार के लिए सोना उगलवाने के लिए िशेषकर हुआ था। आयल फॉर फ़ूड कांड की जाँच कर रहे वोल्कर ने इस कांड में AWB लिमिटेड और भारत की कांग्रेस पार्टी का नाम क्यों लिया था? यह कंपनी इराक को मानवीय गुड्स की सबसे बड़ी निर्यातक थी। इसी के माध्यम से यू पी ए सरकार ने भी इराक सरकार से संपर्क साधा।

इस AWB लिमिटेड कंपनी को दिल्ली में भी एक कार्यालय है। वोल्कर खाद्य घोटाले के लिए तेल में इस कंपनी का नाम था। क्रेग रोली की जनुअरी २४, २००६ की रिपोर्ट के अनुसार चार्ल्स स्टोट उस समय एकाधिकार प्राप्त गेहूं निर्यातक ऑस्ट्रेलियाई वीट बोर्ड के इंटरनेशनल सेल्स एंड मार्केटिंग के लिए हेड था। यही चार्ल्स स्टोट (Charles Stott) वह व्यक्ति है जो ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा भविष्य में गेहूं निर्यात किये जाने की एवज में पेमेंट सद्दाम हुसैन के स्वामित्व वाले $२०० के गोल्ड द्वारा कराने के लिए माध्यम बना।

यह हॉलीवुड की एक फिल्म की पटकथा जैसा है परन्तु एक वास्तविकता यानि हकीकत है। The Bulletin के मार्च 2003 के संस्करण में ‘Dealing with the Devilटाइटल से प्रकाशित एक लेख में इसका रहष्योद्घाटन किया गया है। उस स्वर्ण बुलियन (Gold bullion) की यात्रा के वास्तविक पात्र करोड़ों डॉलर से भरे सूटकेसों के साथ मध्य पूर्व में व्यापार करने के लिए आदी अंतरराष्ट्रीय बैंकरों, नेताओं और अमेरिका ऑस्ट्रेलिया के चंद  व्यक्तियों की एक टीम थी जिसने अंतरराष्ट्रीय साज़िश, छल और सरकार पाखंड के जरिये सद्दाम हुसैन के साथ $ 110 मीट्रिक टन गेहूं का सौदा किया जिसका भुगतान सद्दाम हुसैन ने गोल्ड में किया था।

अंततः, Gold बुलियन के दस मीट्रिक टन दो सौ लकड़ी के बक्से (का मतलब है, चार 12.5Kg सोने की सलाखों Bars वाले प्रत्येक बक्से) को मर्सिडीज गेहूं ट्रक पर लादा गया। सिर्फ एक ड्राइवर द्वारा ड्राइव की गई यह गोल्ड के छड़ों से भरी ट्रक बगदाद से अम्मान और जॉर्डन के लिए  लंदन और होन्ग कोंग के हवाई अड्डों को स्पर्श करती हुई स्टार्ट हुई। सिर्फ एक ड्राइवर द्वारा ड्राइव की गई यह गोल्ड के छड़ों से भरी ट्रक बगदाद से अम्मान औ��� जॉर्डन के लिए  लंदन और होन्ग कोंग के हवाई अड्डों को स्पर्श करती हुई स्टार्ट हुई। गोल्ड की इन छड़ों का पर्थ मिन्ट में छोटे छोटे टुकड़ों या सिक्कों में परिवर्तित करके भारत में भी उनका विक्रय किया जाना उद्देश्य था। भारत में इस  गोल्ड - विक्रय से प्राप्त रकम भारत की उस समय की मनमोहन सिंह से भी बड़ी किस हस्ती मैडम से था क्या इसे भी बताने की जरुरत है ?

Money कई रूपों में, दुनिया भर में हर संगठित समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सद्दाम हुसैन ने सत्ता में अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए मनी money का कई रूपों में उपयोग किया।सद्दाम हुसैन ने सत्ता में अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए मनी का कई रूपों में उपयोग किया। इनमें से एक था इराक में आयात किये जाने वाले गेंहू का पेमेंट गोल्ड की छड़ों के जरिये किया जाना। 

अमेरिका के सैन्य अधिकारीयों ने पाया कि इराक में पेट्रोल भरने के उपयोग में लाये जाने वाले टैंकर में गोल्ड की छड़ें लादी जा रही थी।

ट्रक में पेट्रोल या गैसोलीन नहीं बल्कि गोल्ड की छड़ें पाई गई।




"डी एल ऍफ़ -वाड्रा भ्रस्ट तंत्र " हिंदी में लिखी मेरी आगामी पुस्���क  में डी एल ऍफ़ के चेयरमैन के पी सिंह  और राजीव गांधी की मित्रता से लेकर डी एल ऍफ़ -वाड्रा घोटाले तक के विाराणत्मक तथ्य हैं। भ्रस्ट लेन देन को बही खातों में विधि सम्मत पारदर्शी बनाने की कला की चर्चा है। के पी सिंह और रोबर्ट वाड्रा राजनीतिक सरन्छन् में लखपति से अरबपति कैसे बने यही इस पुस्तक की विषय वस्तु है।  Email: premendraagrawal@gmail.com

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