Assembly Elections and Union Budget on Feb 1, 2017: Nervous Opposition: No legal barrier as per Bureaucrats and former EC officials

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असेंबली इलेक्शन्स एवं यूनियन बजट १ फरवरी २०१७ :घबराया विपक्ष: कानूनी तौर पर कोई बाधा नहीं ब्यूरेक्रेट्स और चुनाव आयोग के पूर्व पदाधिकारियों के अनुसार

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पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा होते ही केंद्र सरकार का 1 फरवरी को पेश होने वाला आम बजट विपक्षी दलों के निशाने पर आ गया है। कांग्रेस, तृणमूल जैसे विपक्षी दलों के साथ केंद्र सरकार में एनडीए के सहयोगी शिवसेना ने भी एक फरवरी को आम बजट पेश करने पर आपत्ति जताई है।
आलम ये है कि तमाम विपक्षी दल सरकार के खिलाफ इस मुद्दे पर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने पहुंच गए हैं। आयोग ने भी इस मामले पर सुनवाई करने का मन बना लिया है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर पहले ही आयोग से समय से पूर्व बजट पेश करने की सहमति हासिल कर ली थी लेकिन विपक्षी दल इस मुद्दे पर किसी तरह झुकने को तैयार ही नहीं हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल है कि एक फरवरी को आम बजट पेश करने को लेकर विपक्षी दलों में इतनी बेचैनी क्यों हैं?

इस मुद्दे पर पूर्व गृह सचिव न्यायमूर्ति  माधव गोडबोले ने Firstpost से बात करते हुए कहा , “सबसे पहले यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि जो भी कानून संगत कार्य जो  भारत सरकार के दायरे में आता है किया जा रहा है  तो यह विचार किये बिना कि वहाँ एक या अधिक राज्य या किसी अन्य रूप में चुनाव हैं कि की परवाह किए बगैर सरकार को कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए। चुनाव देश के एक या अधिक राज्यों में वर्ष प्रतिवर्ष होते रहते हैं इसलिए ऐसी स्थिति में विधायिकी कार्यों का तालमेल बैठाना संभव नहीं है। अतएव यह नहीं कहा जा सकता कि केंद्र सरकार के कार्यों गतिविधियों मुख्यतः महत्वपूर्ण इवेंट जैसे केंद्रीय बजट पेश का निर्धारण राजों के होनेवाले चुनावों का dhyan  रखते हुए होना चाहिए।  “
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“जहां तक आदर्श आचार संहिता का संबंध है, यह विधायिका या न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करता। पिछले संसदीय चुनाव, जब राज्य के बजट और चुनाव की तारीखों कुछ राज्यों में टकरा रहे थे के समय, चुनाव आयोग को सलाह दी गयी थी एडवाइजरी नोट भेज गया था कि उक्त दोनों कार्यों का सम्बन्ध एक दूसरे से नहीं हैं अर्थात दोनों कार्य अलग हैं अतएव राज्य   को वोट न अकाउंट बजट प्रस्तुत किया जाना चाहिए। ” पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त वी एस संपत
एक अन्य पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी का भी कहना है कि केंद्रीय बजट को किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं किया जा सकता।
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विपक्षी दल राष्‍ट्रपति और भारतीय चुनाव आयोग के पास पहुंच गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से पेश किया जाने वाला बजट केंद्र सरकार की मदद करेगा। इस बावत कांग्रेस समेत छह विपक्षी दलों ने राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी और भारतीय चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। पत्र में लिखा गया है कि अग्रिम बजट पेश करने से केंद्र सरकार को आने वाले पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनावों में मदद मिल सकती है।केंद्र सरकार को अग्रिम बजट पेश करने से रोका जाना चाहिए। विपक्षी दलों ने वर्ष 2012 का उदाहरण देते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने उस साल 16 मार्च को बजट पेश किया था क्‍योंकि उस साल भी पांच राज्‍यों में चुनाव होने थे। विपक्षी दलों के नेताओं में राज्‍यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद, सीपीआई एम से राज्‍यसभा सांसद सीताराम येचुरी, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव और जनता दल यूनाइटेड के सांसद शरद यादव ने हस्‍ताक्षर किए हैं।
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View image on TwitterView image on Twitterविधानसभा चुनाव के ठीक पहले नही हो पेश बजट, विपक्ष ने की चुनाव आयोग से शिकायत

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “बजट सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है. इसका किसी राज्य से कोई संबंध नहीं है. बजट (1 फरवरी को) पेश किए जाने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि इस बारे में पहले ही फैसला किया जा चुका है और सभी संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी समय रहते दी गई.” वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि बजट का विरोध कांग्रेस और सपा की हताशा को दिखाता है.

उन्होंने कहा, “उत्तराखंड में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में सपा सरकार में है. उन्होंने पिछले पांच साल के अपने कार्यकाल में कोई काम नहीं किया है और इसलिए वे बजट (1 फरवरी को पेश किए जाने) को लेकर डरे हुए हैं.” उन्होंने कहा, “बजट एक संवैधानिक अनिवार्यता है और इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है. देश में लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव होते रहे हैं. इनकी वजह से कभी बजट को स्थगित नहीं किया जाता.”

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इस मामले पर जेटली ने कहा है, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अंतरिम बजट पेश किया जाता है. किसी ने उसे नहीं रोका. यहां तक कि 2014 में बजट आम चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले पेश किया गया. यह संवैधानिक आवश्यकता है. पिछले दिनों केंद्रीय संसदीय कमेटी ने बैठक में आम बजट एक फरवरी को पेश करने का प्रस्‍ताव दिया था. हालांकि इस पर अभी अंतिम मौहर नहीं लगी है, लेकिन चार फरवरी से यूपी समेत पांच राज्‍यों होने वाले चुनावों को देखते हुए विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया है.

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