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अध्याय 1 (A): साइलेंट हत्यारे: 11 जनवरी, 1966: “दो पड़ोसियों की सच्चाई”

अध्याय 1

दो पड़ोसियों की सच्चाई

 

(१)

 

" अधिकांत समय, आप क्या पढ़ते हैं महत्त्वपूर्ण नहीं है, आप क्या नहीं पढ़े यह महत्वपूर्ण है"

प्रथम रहश्योधघाटन

आपने अभीतक भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को ताशकंद में जहर दिए जाने के संदेह में के जी बी द्वारा क्रेमलिन चीफ रसोइये (कूक) अहमेत सत्तारोव की  गिरफ़्तारी के बारे में सुना है. सच्चाई यह है कि उस समय रशियन कूक रसोइयेअहमेत सत्तारोव के साथ उसकी टीम के अन्य चार साथी रसोइये एवं एक भारतीय रसोइये की भी गिरफ़्तारी हुई थी. इस प्रकार कुल पांच रसोइयों की गिरफ़्तारी हुई थी. यह प्रथम रहश्योधघाटन इस पुस्तक में किया गया है जो अभी तक कुलदीप नर्या, सी पी श्रीवास्तव या अन्य किसी ने अभीतक किया है.

 

द्वितीय रहश्योधघाटन

अहमेत सत्तारोव एवं उसकी टीम के अन्य चार साथी रसोइयों ने गिरफ्तार भारतीय रसोइये की ओर अंगुली दिखाकर इशारा करते हुए संदेह व्यक्त किया था कि उन्हें १००% विश्वाश है कि इसी गिरफ्तार भारतीय रसोइये ने लाल बहादुर शास्त्री को जहर दिया होगा. वह भारतीय रसोइया कौन था? अभी तक रशिया, भारतीय शाशन या कुलदीप नायर, सी पी श्रीवास्तव या अन्य किसी ने जानकारी दी है. यह इस पुस्तक का द्वितीय  रहश्योधघाटन है.

 

त्रितीय महत्वपूर्ण रहश्योधघाटन

अहमत सत्तारोव जिसने उपरोक्त जानकारी पब्लिक डोमेन में दी है, अभी भी जीवित. उसकी सम्पूर्ण जीवन की झलकियाँ जानकारी इस पुस्तक में उसकी अनगिनित फोटो सहित विश्त्रित रूप से दी गई है. यह इस पुस्तक का त्रितीय महत्वपूर्ण रहश्योधघाटन है. अभीतक भारतीय मीडिया या शास्त्री पर लिखी गई किसी भी पुस्तक में ऐसा क्यों नहीं हो सका?

 

क्या आप अहमेत सत्तारोव की तस्वीरें देखने के लिए लालायित हैं? शायद आप नहीं जानते कि वह अभी भी जीवित है या नहीं? वह कहाँ रहता था, कहाँ वह रह रहा है? क्रेमलिन में चीफ रसोइये के रूप में अहमेत सत्तारोव ने क्या किया? शायद आप गिरफ्तार हुए अहमेत सत्तारोव और उसके साथियों के बारे में अधिकाधिक् जानने के लिए उत्सुक हैं. यहाँ इस पुस्तक "साइलेंट हत्यारे: 11 जनवरी, १९६६" में पढ़िए सम्पूर्ण जानकारी जो आप नहीं प्राप्त कर सके विश्व विख्यात निम्न उल्लेखित पुस्तकों में:

१. "इन्डिया आफ्टर गाँधी": इतिहासकार रामचंद्र गुहा

२. कठेरिने फ्रैंक द्वारा लिखित  "बोइग्राफ़ॆ ऑफ़ इंदिरा गाँधी":

३. कुलदीप नायर द्वारा लिखित: "सूप!इनसाइड स्टोरीज फ्रॉम थे पार्टीशन तो थे प्रेजेंट' एवं  ‘बियॉन्ड  दी  लाइन्स' 

४. सी पी शीवास्तव द्वारा लिखित:  लाल बहादुर  शास्त्री . लाइफ  ऑफ़

ट्रुथ 

या अन्य किसी पुस्तक या इंडियन मीडिया के किसी लेख में प्राप्त नहीं कर सके वह पढ़ सकते हैं: "साइलेंट हत्यारे: 11 जनवरी, १९६६' पुस्तक में.

 

चतुर्थ रहश्योधघाटन:

"साइलेंट हत्यारे: 11 जनवरी, १९६६' पुस्तक में उस भारतीय रसोइये की जानकारी दी गई है जो अहमेत सत्तारोव एवं उसके अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार हुआ था और जिस पर उन्हें १००% विश्वास था कि उसी ने लाल बहादुर शास्त्री को जहर भोजन में दिया था. वह भारतीय रसोइया जहर देने के तुरंत बाद में संभवतया के जी बी या किसी की सहायता से पाकिस्तान प्रवर्जन कर चुका था. क्या यही कारण रहा होगा कुलदीप नायर या सी पी श्रीवास्तव द्वारा अपनी पुस्तकों में उल्लेख ना किया जाना?

Continued………….

 

लेखक: प्रेमेन्द्र अग्रवाल 

प्रकाशक: अग्रवाल ओवरसीज, रामसागरपारा, स्टेशनरी हॉउस, रायपुर, छत्तीसगढ़, ४९२००१

Available in English at: http://www.amazon.com/exec/obidos/ASIN/9350878453

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प्रस्तावना: साइलेंट हत्यारे: 11 जनवरी, 1966

मेरी इस "प्रस्तावना: साइलेंट हत्यारे: 11 जनवरी, १९६६"  पुस्तक में उद्घाटित तथ्य शास्त्री जी की रहष्यमय मृत्यु का पर्दाफास करने का निरंतर प्रयास करते रहेंगे. पुस्तक में उद्घाटित नए तथ्यों, सबूतों और अभिलेखों से पता चलता है कि लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु ताशकंद में जहर दिए जाने से हुयी थी.  

 

मेरे आई आई टीयन पुत्र ने मुझसे आग्रह किया  कि मुझे न्यूज आर्टिकल के अलावा पुस्तक भी लिखना चाहिए. उसके अनुसार अमेरिका और यूरोपीय देशों में किताबें पढ़ने की आदत है. उसका यह सुझाव ही इस पुस्तक को लिखने का केंद्रीय बिंदु है.

 

सौभाग्य से आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक आदरणीय सुदर्शन जी का प्रवास रायपुर में २०१२ के अगस्त के अंतिम सप्ताह में हुआ. इस पुस्तक के प्रारंभिक तीन चैप्टर मेरे द्वारा सुदर्शन जी को भेंट किये गए. उन्हें पढ़कर वे .बहुत ही आनंदित हुए. इस पुस्तक को शीघ्र ही प्रकाशित करने के प्रेरणा मुझे आदरणीय सुदर्शन जी से ही प्राप्त हुई.

 

अब हमारे पास आदरणीय सुदर्शन जी की स्मृति मात्र शेष है. उनका स्वर्गवास १५ सितम्बर, २०१२ को रायपुर में हो चूका है.

 

हमें पता होना चाहिए: कैसे JF कैनेडी की हत्या ने लाल बहादुर शास्त्री की हत्या के लिए रास्ता साफ किया. राजनितिक हत्याएं न हो इसके लिए आवश्यक है कि विभिन्न देशों के शासक सी.आई. ए, अफ.अस, बी (के.जी. बी), आई अस आई एवं अन्य एजेंसियों के माध्यम से राजनितिक हत्याएंकिये जाने का अनुबंध करती हैं. अगर हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रहस्यमय मौत की साजिश पता लगा लिए होते तो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बचा लिए होते. यदि हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय मृत्यु की साजिश का पता लगा लिए होते तो लाल बहादुर का जीवन बचा सकते थे. इसलिए मुझे पूर्ण विश्वाश है क़ि इस पुस्तक का पढना न सिर्फ पाठक बल्कि  देश हित में भी है.

 

शास्त्री की रहस्यमय मौत न केवल भारत के लिए बल्कि सोवियत संघ, पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन खासकर जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ताशकंद शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे उन  सबके लिए राजकीय अपराध है. वे मूक हत्यारे हैं.

 

ताशकंद शिखर सम्मेलन एक अंतरराष्ट्रीय घटना थी. ताशकंद में रशिया के अतिथि भारत के  द्वितीय प्रधानमंत्री शास्त्री की रहस्यमय मौत ने जिस दुनिया में हम रहते हैं उसके सामने अनगिनित सवाल छोड़ दिये हैं.

 

कैसे महान नेताओं के जीवन बचाया जा सकता है? इन्टरनेट,  किताबें और लेख पढ़ने के आधार पर, मैं निरंतर लाल बहादुर शास्त्री की हत्या 'के बारे में अपनी वेबसाईट http://www.newsanalysisindia.com/ तथा अन्य वेबसाइट्स में 2005 के बाद से लिखते रहा हूँ. अब मैंने अपनी  इस पुस्तक में उन सभी तथ्यों व निष्कर्षों को विस्तृत कर अंतिम रूप दिया है.

 

11 जनवरी 1966 के बाद से अबतक भारत के लोग रशिया और भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत भ्रमित जानकारी प्राप्त करते रहे हैं.  कुलदीप नायर और सी.पी. श्रीवास्तव जो ताशकंद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे आर्टिकल्स और पुस्तक भी लोगों को भ्रमित करने के लिए ही संभवतया लिखी गयी हैं. लेकिन मेरे द्वारा मेरी इस पुस्तक में उद्घाटित तथ्य व् निष्कर्षों ने एक व्यापक आधार सोचने समझने के लिए पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है क़ि  शास्त्री जी की मौत उन्हें जहर दिए जाने के बाद हृदयाघात से हुई थी. 

 

पुस्तकों, लेख और वेबसाइटों के ठोस सटीक स्रोत स्मरण न होने पर उनका उपयोग कुछ स्थानों पर इस पुस्तक में किया गया हो तो उसके लिए मैं ईमानदारी से माफी माँगता हूँ. 

मैं अपने वरिष्ठ पत्रकार मित्र श्री रमेश नैयर जो हिंदी व अंग्रजी के विभिन्न समाचार पत्रों के संपादक और वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन क़ि पुस्तक अकादमी के  निदेशक हैं, उन्हें धन्यवाद देना कैसे भूल सकता हूँ जिन्हों ने समय समय पर निरंतर मुझे पुस्तक प्रकाशित करने का स्मरण दिलाते रहे जिसका ८०% मटीरियल मैं तीन वर्ष पूर्व ही लिख चुका था.

 

मुझे माफ़ करना, मुझे बस एक मिनट सुनिये , अगर हम सड़क में पड़े नीले मृत  शरीर को देखते हैं जहाँ मृतक की पत्नी मृत शव की परीक्षा आटोप्सी और जांच के लिए आग्रह कर रही हो तो हम क्या करेंगे? हम जाँच किये जाने के लिए आन्दोलन करेंगे. हमने अपने सर्वाधिक प्रिय प्रधानमंत्री के नील मृत शारीर को देखकर क्या किया? ललिता शास्त्री द्वारा जहर दिए जाने का संदेह व्यक्त करने पर कुलदीप नायर, तत्कालीन शासक व नेता गुलजारीलाल नंदा, इंदिरा गाँधी तथा करोड़ों भारतियों ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की? ललित जी को शांत्वाक्ना देना अफ आई आर दिल्ली पोलिस स्टेशन में दर्ज करना तो  दूर किसी ने ललिता जी को शांत्वाक्ना तक नहीं दी. सभी प्रधानमंत्री चुननें या बननें में रात्रि ३ बजे से व्यस्त थे. जहर दिए जाने के संदेह में ४ रशियन रसोइये और एक भारतीय रसोइया के जी बी द्वारा गिरफ्तार किये गए थे, उनके बारे में न तो कुलदीप नायर, सी पी श्रीवास्तव तथा अन्य विख्यात कुख्यात सदाशय जो शास्त्री जी के साथ जंगी हवाई जहाज में आरूढ़ होकर गए थे मिलकर जानकारी प्राप्त की और ना ही मध्यान्ह २ बजे शास्त्री जी का नीला मृत शरीर दिल्ली के पालम हवाई अड्डे से उतरने के उपरांत किसी ने कुछ सोचा या किया.

 

विश्वास कीजिये इस पुस्तक को लिखते समय, मेरी आँखों में स्वमेव ललिता जी के अश्रु आकर टपकने लगे. आप इस पुस्तक में उन अश्रुओं क़ि बूंदों को स्पर्श कर सकते हैं, देख सकते हैं, अनुभव कर सकते हैं, पढ़ सकते हैं.

 

क्षमा करें, माफ करें यदि मैंने इस पुस्तक को लिखकर कोई गलती या पाप किया हो.

 

मैं जानता हूँ, जब मैं इस पुस्तक का कुछ खाका सांसदों व अन्य नेताओं को वर्णन करूँगा तो वे मौनी बाबा  बने रहेंगे, क्योंकि यह पुस्तक उन्हें वोट दिलाने में सहायक नहीं है. फिर भी हम यदि मौन धरे रहे तो इस पुस्तक के हर शब्द चाबुक बन कर प्रहार करते रहेंगे.


लेखक: प्रेमेन्द्र अग्रवाल 

प्रकाशक: अग्रवाल ओवरसीज, रामसागरपारा, स्टेशनरी हॉउस, रायपुर, छत्तीसगढ़, ४९२००१

Available in English at: http://www.amazon.com/exec/obidos/ASIN/9350878453

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News Analysis India | Salwa Judum Founder Congress Leader is killed with others by Naxalites

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Salwa Judum Founder Congress Leader is killed with others by Naxalites

RAIPUR: Senior Congress leader Mahendra Karma and Ex-MLA of Rajnandgaon Mudaliyar have been killed when a group of Naxalites ambushed a convoy of senior Congress leaders at Darbha Ghat section on Jagdalpur-Sukma highway in tribal Bastar district of Chhattisgarh. 

Security personnel killed go unnoticed. Condolences to their families. Hope all injured speedy recovery.

Why did Ajit Jogi former chief minister of Chhattisgarh come back to leave the parivartan rally and his companion leaders alone there before two hours?

ADG (intelligence) Mukesh Gupta has confirmed the Maoist attack.  "The attack took place near Darbha when the convoy was returning from Sukma", he said. 

 

The attack took place around 5.15 pm when the leaders were returning to Jagdalpur from Sukma district.

The attack came days after the Maoists' threat to target Congress and BJP leaders in the state before assembly elections due later in this year. (Details awaited) At least 17 people, including a local leader of India's governing Congress party and security personal, have been killed. 

 


Unconfirmed reports said that a former Congress legislator Uday Mudaliyar was also killed in the ambush while senior Congress leader and former union minister 
VC Shukla, Sukma's Congress legislator Kawasai Lakma were among the critically injured. There is no confirmation about reports that Chhattisgarh state Congress president Nanndkumar Patel and his close family members were missing and were probably abducted by the rebels. 

"Karmaji is no more. We don't have any more details", Karma's close family members told TOI over telephone. However, police and civil officials neither confirmed nor denied reports about heavy causalities in the Maoist ambush. 

Senior Congress leaders were on their way to Keshloor from Sukma after attending a 
parivartan yatra meeting at Sukma when a group of about 150 armed Maoists resorted indiscriminate firing and triggered a powerful blast targeting their convoy. Preliminary reports said a local Congress leader Gopi Madwani was killed. 

"We are waiting for confirmation about these reports. I don't have any details", state Congress media cell in charge Shailesh Nitin Trivedi said. 

An official spokesman said chief minister 
Raman Singh has cancelled his Vikas Yatra and is returning to the state capital where he is expected to hold a high level meeting to take stock of the situation. 

Unconfirmed reports said Karma, who was prominently known as Bastar tiger, was initially kidnapped for identification and then they pumped 20 bullets after beating him on his head with the gun's butt. There was a cross firing between Karma's guards and Naxalites but when the guards ran out of bullets, Karma surrendered along with few other Congress leaders. 

Former MLA Konta, Kawasi Lakhma is said to be safe and admitted to the hospital. He got injured during the firing when the glass of his vehicle's windowpane broke down. 

Karma, who had spearheaded the controversial anti-Naxalite movement Salwa Judum which began in June 2005, was already on the Maoist hit- list and he had survived several attempts on his life. It is said that more than 150 Naxalites were there firing indiscriminately.

 

Mahendra Karma, a former Home Minister of the state was a guiding force behind "Salwa Judum" (anti-Naxal operation by vigilante groups),Mahendra Karma was killed when a large number of Maoists opened fire on the rally. The burst of gunfire was preceded by a blast.

 

Mahendra Karma was a politician from Chhattisgarh, India. He was the leader of the opposition in the Chhattisgarh Vidhan Sabha from 2003 to 2008 and belongs to the Congress party. In 2005, he organised the Salwa Judum movement against Naxalites (Maoists) in Chhattisgarh. The initiative was praised by the Chief Minister Raman Singh, but has been criticized as a "Vigilante militia" by pro-Naxalite groups. He was a Minister of Industry and Commerce in the Ajit Jogi cabinet since 2000 to 2004. He was killed by naxalites on 25th May 2013. He was leading a Parivartan Rally in Sukma when he was attacked.

 

 

Karma, an ethnic adivasi, formed the Salwa Judum, a supposedly anti-Naxalite movement led by local elites. Despite being an opposition party member, Karma aggressively lobbied in order to get bipartisan support for the Salwa Judum, and largely succeeded in 2005, when Salwa Judum was adopted by the state government and recruited as a corp of "Special Police Officers". They were given broad latitude in their actions. After the Supreme Court expressed disapproval of the Salwa Judum movement in 2008 and asked the state of Chhattisgarh to implement remedial measures mentioned in the National Human Rights Commission report which had detailed widespread human rights abuses committed by the Salwa Judum, the movement slowly started to disappear from the Chhattisgarh state.

On 8 November 2012, Karma survived an assassination attempt by Naxalite insurgents, when the landmine blast targeting his motorcade as it passed through a forest in Dantewada district failed to kill him. Karma escaped unscathed, while his driver and two security guards were injured.

On 25th May 2013, Mahendra Karma was assassinated in a Maoist attack in Jagdalpur district of Chhattisgarh.

 

Hear Union Minister Jairma Ramesh

Union rural development ministerJairam Ramesh said on May 17, 2013  that naxalism is strong wherever Congress party has become weak. Ramesh said naxalism is strong in those stated where Congress is not in power like Jharkhand have not seen Congress rule for the past 13 years, Chhatisgarh for 10 years and Orissa for 12 years.

 

UPA govt. encourages naxal movements to say 'Salva judum' originated by Congress leader Mahendra Karma, is not helpful to the tribal. 36 figured between Jogi and Karma.Jogi is freely enterable in 10 janpath

 

As reported on Feb 3, 2005, Sonia Gandhi forced cops to let Naxalleaders free to murder democracy! Congress could win in Andhra because of the help of armed naxalites! Today May 25, 2013 at late night Sonia said:  It’s an attack on democratic values.

 

 

Naxal- ISI Nexus

Central government is for whole India but UPA Govt says that every state is free to take decision separately for naxalites problem. 

 

Govt. is finghting friendly. This is not electon to fight friendly. Congress fought its allies friendly in Bihar, WB and Keral. This formula can't be adopted every where. Naxalites talks Andhra Govt. then they attacked Chhattisgarh. Ater attacking they run Andhra to hide. This is followed in Orissa, jharkhand, Bihar and other places.

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 We should condemn this cruel killing:

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