#Jayalalithaa ki sandehaspad sthiti mein hui mritu: #Jayalalithaa was on proper diet: Media raised many doubts: Truth should be revealed: Jt Vaidyalingam Mad HC

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अन्‍नाद्रमुक नेता जयललिता की मौत पर मद्रास हाई कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी मौत से संबंधित सच सामने आना चाहिए. Investigation must be on Jaya’s death

1-mad-high-court

न्यायमूर्ति Vaidyalingam पूर्व तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की जांच की मांग की एक याचिका कर  पर सुनवाई कर रहे हैं मद्रास उच्च न्यायालय…
जब जयललिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब वह उचित डाइट करी हुई थी। अब उसकी मृत्यु के रह्श्य पर से पर्दा उठ जाना चाहिए।:

हाई कोर्ट के जज वैद्यालिंगम ने इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान गंभीर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि जयललिता की मौत पर मीडिया के साथ हमें भी संदेह है. हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के लिए शव को बाहर निकालने में क्‍या दिक्‍कत है  :  :Vaidyalingam, Madras HC

गौरतलब है कि अन्‍नाद्रमुक के एक कार्यकर्ता पीए जोसेफ ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. उसमें कहा गया था कि जयललिता की बीमारी के दौरान कभी किसी को उनके पास जाने का मौका नहीं मिला. उनकी मृत्‍यु की वजहों की भी जानकारी नहीं दी गई. केवल चुनिंदा लोग ही उनके करीब थे. मृत्‍यु के बाद भी उनकी बीमारी और मौत की वजहों की जानकारी बाहर नहीं निकल पाई. ऐसे में अब जयललिता से संबंधित सारी बातें सार्वजनिक की जानी चाहिए

हाई कोर्ट ने कहा, “हमने भी अखबारों में पढ़ा था कि सीएम ठीक हो रही हैं, वह खाना खा रही हैं, कागजों पर साइन भी कर रही हैं, यहां तक कि मीटिंग भी अटेंड कर रही हैं। फिर अचानक मौत कैसे हो गई?”
– कोर्ट की बेंच ने कहा, “किसी भी रेवेन्यू डिविजन अफसर (RDO) ने बॉडी नहीं देखी, न ही कोई मेडिकल रिकॉर्ड है। मौत के बाद कम से कम कुछ सबूत तो दिए ही जाने चाहिए थे।”
– हाईकोर्ट ने एमजीआर (जयललिता के राजनितिक गुरु ) की मौत याद दिलाते हुए कहा, “1980 के आखिर में एमजीआर की मौत के बाद भी ऐसे ही हालात बने थे। उनका इलाज चेन्नई और अमेरिका, दो जगह हुआ था। सरकार ने एमजीआर के इलाज का वीडियो जारी किया था।”
– यहाँ यह स्मरण दिलाना उचित होगा किजयललिता 22 सितंबर से अपोलो हॉस्पिटल में एडमिट थीं। उन्हें लंग इन्फेक्शन था। उनकी मौत से पूर्व AIADMK ने एलान किया था कि जयललिता पूरी तरह ठीक हो चुकी हैं, लेकिन फिर बताया गया कि कार्डिएक अरेस्ट हुआ है और इलाज चल रहा है। फिर मृत्यु हो गई समझ कर AIADMK पार्टी का झंडा आधा झुका दिया गया। फिर गलती मालूम होने पर झंडा पूरा फहरा दिया गया। बाद में बताया गया उनकी मौत हार्ट अटैक से हो गई।
– AIADMK की तरफ से जया की मौत का एलान 5 दिसंबर की रात 11:30 बजे किया गया था।

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शशिकला नत्रजन के पोस्टर्स चेन्नई की सड़कों से सटी दीवालों खम्भों में लटके हुए हैं अनगिनित

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Sandesh : Govind Sarang, Swamy Yoganand Saraswati BJP Sansad, Sujan Singh Patel MP Govt

Guruji , Vivekanand, Govind Sarang, Yoganand Saraswati, Rastriya Ekta Book, Hindi Book

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Anukram : Contents

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हमारी षिक्षा प्रसार और उन्नति की गवोक्तियां व्यर्थ है,यदि हमारे समाज के अनक अंग अज्ञान और उपेक्षा के अंधकार में पड़े रहते हैं।

– प.पू. गुरूजी

जब तक देष में एक कुत्ता भी भूखा है तुम सुख की नहीं कैसे सो सकते हो।

– विवेकानन्द

इस सुविस्तृत धरती की छाती पर अगर कोई ऐसा देष है, जहां आदमी अपने अर्मूत स्वप्न चिरकाल से मूर्त करते आया है तो मैं कहूंगा वह देष भारत ही है।

– रोम्या रोला (फ्रांसीसी विचारक)

अलगाववाद और उग्रवाद का जाल आज देष के विभिन्न भागों में फैला हुआ है। विदेष षक्तियों की षह में देष को खएिडत करने का देषद्रोही कुप्रयास हो रहा है। हमारी सरकार द्वारा इन षक्तियों के खात्मा के लिए जितना प्रयास होना चाहिए उतना उसके द्वारा नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में देषभक्ति, एकता की भावना एवं देष के लिए सर्वस्य अर्पित करने को हम सब उद्यम रहें। ‘‘राश्ट्रीय एकता‘‘ पुस्तक प्रकाषित कर आप इस दिषा में जो प्रयास कर रहे हैं उसमें सफल हों यही कामना करता हूं। दिनांक-28.02.1992- गोविन्द सारंग

भा.ज.पा.संगठन मंत्री,रायपुर संभाग

एक ही षिव एक ही विश्णु भारत की चारों दिषाओं के चौरासी क्षेत्रों में विराज रहे हैं। उन्हें ह खण्डित कैसे करें। एक ही रामायण, महाभारत, भागवत का विभिन्न प्रदेषों में पाठ होता है। श्रीराम और श्री कृश्ण समस्त भारत में सर्वत्र पूजे जाते हैं। -आचार्य क्षितिमोहन सेन

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स्वामी योगानन्द सरस्वती,भाजपा संसद, दिनांक-28.02.1992

‘‘योगाश्रम‘‘ बाराकला (भिण्ड)

उग्रवाद को एकता यात्रा बढ़ावा मिला है, कहने वाले नितान्त भ्रम में है। राश्ट्रीय ध्वज श्रीनगर के लाल चौंक में नहीं प्रत्युत उग्रवादियों की छाती पर फहराया गया है। धन्य है जोषी जी और उनके साथी। उनके अडिग साहस, असीम निर्भयता की जितनी प्रंषसा की जाए कम ही है। साक्षात यमराज (मृत्यु)के सम्मुख देहाध्यास से विमुक्त हुए बढ़ते ही गए और लक्ष्य प्राप्त किया। कांग्रेस के षासनकाल में आज डेढ़ लाख वर्ग कि.मी. भूमि पाकिस्तान और चीन के पैरों तले रौंदी जा रही है। अब भारत माता का मस्तक काष्मीर भी सिसकता जा रहा है। एकता यात्रा से काष्मीर समस्या को सुलझाने की प्रारम्भिक भूमिका तैयार हुई है।                                                                -0-

जिस तरह अलगाववाद, उग्रवाद देष की षांति व्यवस्था के लिये प्रष्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं निष्चित की चिन्ता जनक है। मेरे मत से आज देष को राश्ट्रवाद एवं मानवाद के रास्ते पर आना चाहिए। राजनैतिक स्वार्थो

से हटकर विचार करें, मुझे पूर्ण विष्वास है भारतीय जनता पार्टी की एकता यात्रा मार्गदर्षक होगी।                     स्थानीय षासन एवं नगरीय कल्याण राज्य मंत्री

म.प्र. षासन भोपाल

-सुजान सिंह पटेल

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Book Goole link: Silent Assassins (of L B Shastri) : Jan 11,1966: Chapt-1 Highlighsts: Preface

Book Goole link, Silent Assassins, Jan 11,1966, Chapt-1,  Highlighsts, Preface, L B Shastri

Rashtriya Ekta : Cover Pages

Anukram : Contents

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सम्पादक

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Mark Tsybulsky (USA) has taken an interview of Ahmet Sattarov about Vladimir Vysotsky and the same is published in June 14, 2011. It means perhaps Sattarov is still alive and active in his profession……

Page-3: «Poisoners Prime Minister of India» According to Ahmet Sattarov despite the fact that they were very fast, as they said, was justified, the foreign press dubbed them «Poisoners Prime Minister of India». But in USSR newspapers including TASS, the incident nothing caused a noise. When they were driven out Bulmenya wishing to get their photos literally hung on lampposts, all the roads were filled with media representatives from around the world,”……..

Page-4: Indian cook poison Shastri: Ahmet:  After some time in the basement caused the cook Indian, who prepared the dish of Indian cuisine for banquets. Ahmet Sattarov and his team believed that the poisoning Shastri – the work of that man, because in each other were confident, as they said, all one hundred percent-

Above mentioned version of Ahmet Sattarov indicates:

[1 ] Ahmet Sattarov did not deny the poisoning to Shastriji.

[2] Ahmet and his team suspected Indian cook who was the personal cook of then Indian ambassador in Moscow. Ahmet and other arrested members of his team raised finger on the arrested Indian cook for poisoning Shastri. …Who was that arrested Indian cook? Where he is since Jan 11, 1966?………..

Page-5: Shastri’s death finding committee was formed by then USSR government and that committee was sent from Moscow to Tashkent for investigation as Ahmetr Sattarov with other chefs of his team was sent for cooking……Arrested cooks were released before forming that committee and before finding its report. Why?…Even though arrested all cooks were released by the KGB, suspense is still…..Arrested cooks would have no personal enmity with Shastriji. Ahmet Sattarov had also no criminal record…. Whoever might be culprit-Russian or Indian cook that was hired by contract killers? Even that nobody wanted and now wants to take even one step towards finding the forces behind the killing. Hanging one culprit is not important. Important is to make nude the mighty monster behind the killer.

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That may be CBI, ISI, KGB, or political giant of India or foreign country. It was and still is the matter of investigation. It is not the matter of hiding the facts.

Page-6 :  In January 1966 in Tashkent held a meeting between the heads of governments of India and Pakistan….. It should be noted that the European protocol was very different from the Muslim and Buddhist. Most expensive dishes were prepared, among which were found in the reserve of the Ministry of Trade of Uzbekistan dinner sets the emir of Bukhara

Page-7: After the meeting at which the armistice was signed, a banquet was held “a-buffet”. Upon completion of the entire staff, valivshiysya down from fatigue, assembled to congratulate on the successful conclusion of the meeting and hand over government certificates. Ahmet and some other waiter in Moscow pledged to submit to government awards. Happy, they all went to the hotel…..In the morning Ahmet was awakened by an officer of the KGB and reported on the death of the Prime Minister of India Lal Bahadur Shastri. KGB officer said: “there is suspicion that the Indian prime minister had been poisoned,”

At first Ahmet Sattarov thought this joke, but when he heard the noise throughout the hotel, he realized how things seriously.

After questioning, Ahmet Sattarov said “Me and three other headwaiters Kremlin, among whom I was a senior, put in “Seagull” and immediately handcuffed. All this was accompanied by flashes of cameras of the international press. We have served the four most senior officials attending the meeting, so immediately came under suspicion. “

According to him they were brought to the village Bulmenya – it is about thirty kilometers from the city, put in the basement three-storey mansion, forbidden to talk to each other, placed security.

After some time in the basement led an Indian cook who prepared Indian cuisine for the banquet. They all believed that the poisoning Shastri – the handiwork of the man, because in each other were confident as they say, one hundred percent.

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The strain was so great that one of his colleagues whiskey before their eyes were covered with gray hair, but Ahmet still occasionally stutter. For six hours they spent in the basement. Then finally opened the door and entered a delegation led by Kosygin. Apologized to them, he said that they were free. ………

Page-8: Despite the fact that they were very fast, as they said, was justified, the foreign press dubbed them “poisoners Prime Minister of India”. And only USSR newspapers to show restraint, the incident nevertheless caused a lot of noise….When they were driven out Bulmenya wishing to get their photos literally hung on lampposts, all the roads were filled with media representatives from around the world…. What Indian journalists, members of Indian delegation in Tashkent were doing and why did they hide their faces and camras at that time?……………….Please remember Ahmet Sattarov did not say any word about the presence of Two Russian Lady for tasting the food. Only Indian journalist member of the delegation ‘Khas aadmi’ of Shastri is said the presence of those ladies…..Ahmet Sattarov stayed on as chief maitre d’hotel of the Kremlin 12 years – from 1959 to 1972, and for this prestigious service nearly lost his head…..Following points are here noteable: (1) Ahmet Sattarov thought that incident of poisoning might not occur at the reception banquet. (he is not denying of poisoning at the dacha of Shastri)

(2) Hardly. All products that fall on the table and a refrigerator were subjected to careful laboratory analysis, full service personnel under the supervision of the KGB sharp-sighted (this is not said about dacha of Shastri)

(3) Ahamet Sattarov said, “We gave a formal sign non-disclosure of 25 years. But the Kremlin is not nuclear, but a political object, so I know I have often seen on television, when I served banquets. And of course, knew about my family service.”

(4) Ahmet Sattarov’s duty was to supervise the waiters at the time of service. Simply put, he stood and commanded: submit then submit it. Sometimes, however, he was connected to the work. It means there might be possibility of mixing poison in the food by his assistant chef? Further possibility of poisoning was at the dacha of Shastri.120

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Preface – Silent Assassins: Jan 11, 1966

Contents of this book do not stop to hunt the silence!  New facts, evidences and records showed that poisoning to lal Bahadur Shastri was happened in Tashkent. My IITian son suggested me that besides news articles I should write the books. According to him especially in America and other European countries, there is a habit of reading the books. This is the central point for writing this book.

Fortunately Adarniya Sudarshan Jee, former Sarsanghchalak of RSS visited Raipur in the last week of August of 2012. I personally presented three starting chapters of the book to Sudarshan Jee. After one week I came to know that he appreciated the same. This encouraged me for going to fast in completing the book. Now we have only remembarance of Sudarshan Jee. He died here in Raipur on September 15, 2012.

We should know: How J F Kennedy’s assassination cleared the way for the death of Shastri. For avoiding political assassinations, it is necessary to know how the head of the countries assign the assessins through their intelligence agencies such as CIA, FSB (KGB), ISI and others. If we could know the conspirators of mysterious death of Netaji Subhash chandra Bose then Dr. Shyama Prasad Mukherji would have been saved. If we could know the conspirators of Dr. Shyama Prasad Mukherjee then life of Lal Bahadur would have been saved. So I think that reading this book would be beneficial for readers and the country as well.

Mysterious death of Shastri was a state crime not only for India but also for USSR, Pakistan, US, UK and China especially who were directly or indirectly involved in Tashkent Summit. They are silent assassins.

Tashkent Summit was an international event. Mysterious death of the guest country’s Prime Minister there left so many questions before the world in which we are living. How the life could be saved of the great leaders?

On the basis of continuous net surfing, reading the books and articles, I am writing since 2005 about ‘the murder of Lal Bahadur Shastri’ in various websites including my own site: http://www.newsanalysisindia.com/

Now I have given the final shape to my all findings in this book. From the beginning since Jan 11, 1966 peoples in India relied heavily on the information

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given by the Soviet authority and the government of India. Writings of Kuldip Nayar and C P Srivastav who were the part of Indian delegation at Tashkent are also not different. But my findings provided a far broader scope of the events around the death of Shastri due to heart attack by poison.

I have attempted to be diligent in giving proper credit to the authors for their material. Because I was attempting to paint an accurate picture of the landscape of the era, I would, on occasion, include facts taken from books, articles, and websites without remembering their exact source. If I have inadvertently failed to properly acknowledge words taken from other authors, I sincerely apologize.

How may I forget to give thanks to my senior friend learned journalist former editor of various Hindi and English dailies, Director of Granth Akadami of C.G. Government Shree Ramesh Naiyar who reminded me again and again for publishing the book 80% contents of which I had already written before three years. I have no hesitation to write that some time I felt who am I, if the government and the leaders of my country never tried sincerely to find out the truth.

Excuse me, listen me just a minute, if we see bluish death body in the road where wiping wife of the dead asking for autopsy and an enquiry, what will we do? There will be probe and agitation. What had we done to see the bluish body of our beloved Prime Minister lal Bahadur Shastri and how we reacted on doubt shown by Lalita Shastri? There was no probe, no FIR, no postmortem

Believe me at the time of writing this book, tears of lalita Shastri automatically came into my eyes. You may touch, you may see, you may feel, you may read these drops of tears in my book. Sorry, sorry if I have done any fault to write this book! I know when I send few outlines of this book to parliamentarians and other leaders they may keep silence, because this book don’t help them in getting votes. Still if we keep silence then also the contents of the book does not stop to hunt the silence!

—- Premendra Agrawal

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CONTENTS       

                         Part – I

Chapters

  1. Truth of Two Neighbors 1-34
  2. Kennedy’s assassination cleared the    35-52

way for Shastri’s death

  1. Chakravyuh In Tashkent 53-73

4,             Death Night                                                  74-97

  1. Tashkent Summit to Deceive India 98-124
  2. Poisoning Shastri by Russian Ladies ? 125-154
  3. Poison factory and death knell 155-182
  4. Shastri’s life and Astrology 183-216
  5. Heart Attack by Poisoning 217-240
  6. Harold Wilson                          241-256
  7. Timing discrepancies hint assassination? 257-276

Part – II

  1. Shastri’s Death fact finding committee 278-308
  2. Leonid Shebarshin and Polyakov 309-325
  3. Dr. R N Chugh                       326-336
  4. RTI means Right to Forgotten 337-351
  5. Successor Race 352-366
  6. PM Post to Indira 367-385
  7. Left leaning                                386-404
  8. CIA _ ISI 405-425
  9. Memory Hole 426-438

Source:                                                                              440

Book (Silent Assassins: Jan 11, 1966) available:

Old price: Rs. 500.00

Price: INR 250.0000

Including Courier Charges

 

Commercial Services

Behind Sindhi School,Ramsagarpara,

Raipur,CG.-492001,India.

Mo.No. – 09425207574

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Book: Accused & Jihadi Neighbour: Synopsis and Preface

Book, Accursed & Jihadi Neighbour, Synopsis, Preface

Anukram : Contents

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Synopsis: Sunanda Tharoor is accursed, she is accused to ruin her life and she is victim due to all of us.

Sunanda Pushkar just few hours before her death tweets and sends sms to the senior journalists and wants to meet them to disclose conspiracy of ISI, IPL and Dubai MafiasNalini Singh as first witness speaks out. Sunanda’s death flames touch Leela Palace to hotel Aman.

Shashi Tharoor when in UN doesn’t sit on the gold bar loaded truck running from Iraq but saves the Congress and Sonia Gandhi from the Oil for Food scam and in reward gets the ministerial berth.

Mehr Tarar tweets for her country’s ISI as well as for her latest lover Shashi Tharoor.  What type of this love Jihad is? Her spying eye moves toward Omar also. Dr Gupta of AIIMS raises finger on Ghulam Nabi Azad beside Mr. Tharoor. Mehr follows the path of Arrosa Alam who has affair with Capt Amrinder Singh.

Why is Dubai focal point? Sunny Varkey nearer to Tharoor and Bill Clinton presents Sunanda Pushkar to Shashi Tharoor in Dubai. Sex is a game for high society celebrities and politicians.

Minister of State in the PMO, Jitendra Singh opens the debate on the Article 370. Iraq Afghan terror looms on Kashmir. PM Modi says a good neighbour is important for a country’s happiness.

Sheikh abdullah’s and Nehru’s present heirs remind us: “Nehru’s romance with Edwina gave birth to Art 370 and PoK: Let the priests go to Mecca, we will go to UK?

“We’re a tiny 3% in the valley; even then we remain refugees in our own nation because we are not vote bank. Is it not bloody paw on the back of secular structure of our India? Kashmir a paradise lost can be found again to abrogate Article 370″ —Pain of Kashmiri Pundits

When read conflicting tweets between Shashi, Sunanda and Mehr it seems and reach the final page: Shashi Tharoor’s sexual frustration leads him into an affair with the Mehr Tarar to leave ill Sunanda.

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                                          Preface

This book reflects to a sad end to a sad life of a daughter of Kashmir who voiced for the removal of Article 370. This Article has becomes the source for separatists and jihadi neighbour to spread bloodbath and communalism in Kashmir. Due to this Kashmiri Pandits become refugees. What former Union Minister’s better half had said about his controversial link with Pakistani woman journalist; what she wanted to disclose few hours before his death? Mr. Tharoor is praising Prime Minister, though he called him Hitler’s Goebbels before the mysterious death of his wife. What is the reason behind this change? Lesson to women is–“stay away from philanderers and Casanovas”. Womanizers may become threat to the security of the nation.  Why is Gandhi-Nehru surname dust more harmful than the dust….?

Target audience for this book is all nationalists who think ‘India is first’. Without independence what type of India was? Congress leader Mr. Tharoor in the video quotes “…..after all it was Mahatma Gandhi who declared before independence that sanitation was more important than independence.”

How many books are on Article 370 and rehabilitation of Kashmiri Pandits? There is a need for debate on Article 370 and successfully rehabilitation of Kashmiri Pandits. Iraq Afghan terror looms on Kashmir in the name of Islamic Jihad.

Accursed Sunanda was a common woman with controversial character. In this book Shashi Tharoor and late Sunanda Pushkar are medium not destination. These are the container in the battery of this book. Which are the cells? The answer is the opening batsman in this book.

Main source of this book is not only Accursed Sunanda Case but also the Gandhi-Nehru and Sheikh Abdullah dynasty. Mahatma Gandhi gifted Nehru and Nehru gifted Sheikh Abdullah. Due to both dynasties Jihadi neighbour Pakistan executing bloody dance in the name of Kashmir after kidnapping 1/3rd of Kashmir (PoK).  Mr. Modi’s speeches related to Kashmir in the Lok Sabha Election inspired the author to write this book.

www.http://newsanalysisindia.com/ and other websites, newspaper and news channels are the resources which are used to write this book. Dr. Subramanian Swamy’s statements are also much helpful for this. We are thankful to all of these. The author is neither the wing of Government nor keeping a

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letterhead of any party or NGO. So this author is writing his ‘dil ki baat’ in this book to share his opinion with other known and unknown co-travellers to serve the nation.

Writing this book took hardly three months. The author is satisfied to write this book. Earning the good wishes of the viewers instead of monetary earning is our motto. Our intention is to share the book-contents with the Kashmiris also.

As a human being we share here few instances which help us for the matter of his book: (1) Accursed Sunandas’s tweets against the Article 370, corrupt politicians involvement in IPL, ISI’s net to catch the sexy politicians via woman journalists (2) Seeing the panic condition of Kashmiri Pandits in the streets of Delhi where our great leaders reside

Advice: First of all please read one page synopsis and two pages preface of this book. Then go to chapter 1, 2 , 5 and the last 14 respectively.  This way inspires the readers to read the remaining chapters, and recommend others for the book.

Three New Facts beside others disclosed in the book:

  1. Art 370 and PoK are the result of Lord Mountbatten’s hided enmity with

Nehru due to his romance with Edwina

  1. Why is Ram Lala still under Tent in Ayodhya?
  2. How the truck loaded gold bars related to Oil for Food kickback toured

from Iraq to Jordan? Few % of these gold bars sold in India besides other

places!

  1. Russian poison used by the ISI man to kill Sunanda as this poison was

used in the food prepared for Lal Bahadur Shastri in his residence.

*Theme: Accursed* is full of conscientious people who can’t seem to find

their own consciences. It’s the sort of inextricable presence of evil in

good Kashmiri Muslims especially which they don’t acknowledge and which

they try to hide. Kashmiri Pundits have become refugees in their own

country due to ISI spying, infiltrations of terrorists and the presence of

Article 370.

Denial of removing Article 370 encourages separatism. Still presence of

this Article becomes hurdles for the progress of the people of Jammu and

Kashmir results in what we may call “incursions from the unconscious, or

incursions from, let’s say, the other side. That which is denied is

emerging. So we thought of this in terms of terrorists’ jihad, and these

forces from the unconscious, so to speak, erupting in this placid

community.

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Printer & Publisher

Commercial Services

Behind Sindhi School,Ramsagarpara,

RAIPUR,  C.G.-  492001, India.

Mo.No. – 09425207574

First Edition:

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Accursed & Jihadi Neighbur

Language: English

Size: 9”x5.5”

Pages 202

Hard bound cover

Price: Rs.250/- + Courier Charges Rs. 50/-

Offer Price: Rs.150/- + Courier Charges Rs. 50/-

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                  ISBN:  978-81-930512-0-7 2014

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                             Part – I

  Chapters                                                                             Page

 

  1. The Accursed Daughter of Kashmir             01-15
  2. Death flames touched 5 Star Leela to

Hotel Aman & Oil for Food                                             16-30

  1. Art 370 Sunanda to Supreme Court ? 31-45
  2. Iraq Afghanistan Terror looms on Kashmir             46-59
  3. Let the priests go to Mecca, we will go to UK 60-75
  4. Hindu Muslims restore 400-year-old temple in Valley,

Why not Ram Janmbhumi Temple?                                               76-88

  1. Kashmir a paradise lost can be found again to

abrogate Art 370                                                               89-103

                            Part – II

  1. Mysterious Death of Sunanda           104-117
  2. AIIMS vs AIIMS           118-136
  3. ISI Spying and Exporting Terrorism 137-152
  4. Sexism vs Sexism in IPL Controversy 153-165
  5. Mehr Tarar 166-175
  6. Sunanda & Marilyn Manore 176-189
  7. Tharoor follows UK’s War Minister Profumo 190-202

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Previous book of author:  Silent Assassins: Jan 11, 1966 (Assassination of Lal Bahadur Shastri): Freely readable at:

http://books.google.co.in/books/about/Silent_Assassins_Jan11_1966.html?id=fQoVBQAAQBAJ&redir_esc=y

This book brings new facts, evidences and records which show that poisoning to second prime minister of India, Lal Bahadur Shastri was happened in Tashkent. Mysterious death of Shastri was a state crime not only for India but also for USSR, Pakistan, US, UK and China especially who were directly or indirectly involved in Tashkent Summit. They are silent assassins. We should know: How J F Kennedy’s assassination cleared the way for the death of Shastri. Everybody has read arrest of only one Kremlin chief Cook Ahmet Sattarov. This is half truth. There was the arrest of Ahmet and other members of his team who raised finger on the arrested Indian cook for poisoning. Who was that Indian cook?  Was he an employee of Indian Embassy in Mascow ?  Where he went to hide himself? More questions and answeres are in this book.

NOTE: Toxic politics: The seceret history of Russian poison supply by ISI to contract killers ( Supari Killers) Russian & Indian cook for poising Lal Bahadur Shastri in food at Taskent and now the same happened to Sunanda Puskar as mentioned in the book: “Accursed & Jihadi Neighbour”

Chapt- 1:  Page- 1:  Books written on Shastri by Kuldip Nayar, C P Srivasta and Ram Chandra Guha have not a single word or photo of Russian cook Ahmet Sattarov who was arrested by KGB on the charges of giving poison to Shastriji. ..You have read arrest of only one Kremlin chief Cook Ahmet Sattarov; truth is there was the arrest of more (Four Russian+One Indian cook)…

Page-2 : In 1990, working in the archives of the Tashkent UKGB over the article on the emergence of the Soviet drug, Sergei Turchenko accidentally stumbled upon the thin red folder viewing still secret at the ­time of documents, entitled: “On the assassination of the Prime Minister of India Lal Bahadur Shastri

January 11, 1966″: There was in the front page: “the chief conspirator” – senior captain Kremlin Akhmeta Sattarovicha SATTAROVA….

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Hindi book: D L F Vadra: Bhrattrantra: Bhumika

D L F,  Vadra, DLF Vadra, Bhrattrantra, Hindi Book

Rashtriya Ekta : Cover Pages

Anukram : Contents

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                              अनुक्रम

सम्पादक

1   ज्ञान प्राप्तिः गुड़गांव का कीकर बनाम बोध वृक्ष

2 वाड्रा के हाथों में अलाउद्दीन     चिराग

3  अरबपति गरीब किसान

4  बंजर भूमि और इराक के टैंकरो ने सोना किसके लिए उगला?

5   वाड्रा से प्रष्नः आदमी को कितनी जमीन चाहिए?

6   डी.एल.एफ.-वाड्रा के बहीखाते कानून की आंखों में झोंकने के लिए

7   राहुल प्रियंका के समर्थकों के बीच पोस्टर युद्ध

8  फाइव स्टार होटल में सात फेरे

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Printer & Publisher
Commercial Services
Behind Sindhi School,Ramsagarpara,
RAIPUR, C.G.- 492001, India.
Mo.No. – 09425207574
First Edition: 2014

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DLF-Vadra: Bhrasht Tantra
Language: Hindi,
Size: 9”x5.5”
Pages 100
Hard bound cover
Price: Rs.175/- + Courier Charges Rs. 50/-
Offer Price: Rs.100/- + Courier Charges Rs. 50/-

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ISBN:  978-81-930512-1-4

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109

 

                                           ।। भूमिका ।।

 

श्री प्रेमेंद्र अग्रवाल अर्धषती से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। युवावस्था में अपने हिन्दी साप्ताहिक का दिल्ली से प्रकाषन कर विद्यार्थी जगत व राजनीतिक गलियारों में इन्होंने खासी हलचल मचा दी थी। उनकी गिनती राश्ट्रीय स्तर के युवा पत्रकारों में होती थी। परंतु मध्यवित्त परिवार के दायित्व और छत्तीसगढ़ का मोह प्रेमेंद्र जी को फिर छत्तीसगढ़ खींच लाया। 1950 के दषक में भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेताओं से उनका व्यक्तिगत परिचय था। प्रान्त के वरिश्ठ जनसंघ के नेताओं से उनके आत्मीय संबंध रहे। सन् 1977 में जनसंघ के जनता पार्टी में विलय और भारतीय जनता पार्टी के नाम से उसके पुनर्नामकरण के समय तक ये संबंध बने रहे। परंतु भाजपा के सत्ता में आने के बाद उसके नये नेताओं की आसक्तियां और सरोकार बदलते चले गये। अन्य अनेक राश्ट्रवादी राजनीतिक-सांस्कष्तिक कार्यकर्ताओं और लेखकों, पत्रकारों की भांति प्रेमेंद्र जी भी दरकिनार होते गये। नये सत्ताभोगियों को ऐसे असंख्य तपस्वियों के अवदान के प्रति सम्मान की भावना नहीं रह गई तो इनके जैसे राश्ट्र-समाज के सचेतकों को भी सत्ता के उन सूरजमुखियों की परवाह नहीं रह गई। परंतु जो विचार और संस्कार उस पीढ़ी के साधकों में गहराई तक घर कर गये थे वे उन्हें उन मूल्यों के लिए जूझते रहने की जिजीविशा देते रहे, जो डॉ. ष्यामा प्रसाद मुखर्जी, प्रोफेसर बलराज मधोक, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, जगन्नाथ राव जोषी प्रभष्त भविश्यदष्श्टा राजनायकों ने गढ़े थे। राश्ट्रवादी साधकों के साथ भारतीय समाजवादी चिंतनधारा के उन्नायक जयप्रकाष नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया के साथ हुए संपर्क, संवाद और संयुक्त संघर्श की रणनीति से भारतीय राजनीति में गैर-कांग्रेसी दलों का एकीकरण हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 1960 के दषक के मध्य में अनेक राज्यों में गैर’कांग्रेसी संयुक्त सरकारों की गठन हुआ। दुर्भाग्य से पं. दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. राममनोहर लोहिया का जीवन छोटा रह गया। दीनदयाल जी की तो मुगलसराय के समीप ट्रेन मंे हत्या ही कर दी गई।

आज उन सब का स्मरण इसलिए भी आवष्यक हो गया है कि केंद्र सहित अनेक राज्यों में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में पहुंच गई है। श्री नरेंद्र मोदी के नेतष्त्व में केंद्र सरकार ने उन समस्त घोटालों और राजनीतिक प्रभाव से किये गये अनाचारों की जांच षुरू कर दी है।

उनमें एक चर्चित प्रकरण है यू.पी.ए. प्रमुख और कांग्रेस की सूत्रधार श्रीमती सोनिया गांधी के दामाद श्री राबर्ट वाड्रा द्वारा राजनीतिक प्रभाव से संचित किये गये धन की। वह सब काले धन के महासागर में तैरते हिमखंड के मात्र एक छोटे से कंगूरे की भांति दिख रहा है। वह है श्री राबर्ट वाड्रा का देष की राजधानी से सटे गुड़गांव का डी.एल.एफ भूमि प्रकरण। इस प्रकरण के आर-पार अनेक चौंकाने वाले कारनामों की श्रृंखला है।

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110

वरिश्ठ राश्ट्रवादी पत्रकार और मेरे पुराने आत्मीय मित्र प्रेमेंद्र अग्रवाल ने इन तमाम प्रकरणों का परस्पर गुंथा हुआ विवरण अपनी इस पुस्तक में दिया है। प्रेमेंद्र जी जानते हैं कि फिलहाल सत्ता से बाहर होने के बावजूद लगभग छः दषकों तक स्वतंत्र भारत के भाग्य-विधाता रहे नेहरू-गांधी परिवार के हाथों में आज भी कितनी असीम षक्तियां हैं। कितने प्रचुर संसाधन हैं। कितने षातिर दिमाग हैं। उनसे संभावित खतरों से भी प्रेमेंद्र अनजान नहीं हैं। फिर भी उन्होंने यह विस्फोटक पुस्तक लिखने का जोखिम उठाया है। श्री प्रेमेंद्र मानते हैं कि कुछ लोग अपने भाग्य मंे सुख, सुविधा और सत्ता का पट्टा लिखवाकर आते हैं, जबकि राश्ट्र और समाज के हित को अपना अभीश्ट मानने वाले कुछ मसिजीवी निरंतर संघर्श तथा जोखिमों की रक्ताभ तूलिका से लिखा गया मुकद्दर संजो कर चलते हैं। जिन्हें भारत राश्ट्र राज्य से थोड़ा भी अनुराग है वे इस पुस्तक को अवष्य पढ़ने का प्रयास करें। उन्हें कुछ प्रेरणा ही मिलेगीं दृश्टि का विस्तार भी होगा। भाई प्रेमेंद्र को बधाई के साथ ही उनके राश्ट्रप्रेम का अभिवादन।

– रमेष नैयर

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1  पंजाब,दिल्ली और छत्तीसगढ़ में हिन्दी व अंग्रेजी के अनेक                                                    प्रतिश्ठित अखबारों के संपादक व छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी                                                        अकादमी के संचालक रहे श्री रमेष नैयर  स्तम्भ लेखक और                                                             वरिश्ठ पत्रकार हैं। युगधर्म से लेकर ट्रिब्यून, हितवाद, क्रानिकल,                                                           दैनिक भास्कर, नवभारत, नई दुनिया, संड़े आब्जर्वर आदि प्रतिश्ठित                                                                अखबारों के पाठक उनसे भलीभांति परिचित हैं। राजनीतिक जगत                                                          भी उनसे अपरिचित नहीं है।

आप कई विष्वविद्यालय की कार्यपरिशद और भारतीय फिल्म एवं टेलिविजन संस्थान पुणें की गवर्निंग कौंसिल के सदस्य रहे। पत्रकारिता के प्रतिश्ठित गणेष षंकर विद्यार्थी सम्मान से अलंकृत!

– प्रकाषक

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Mein Hindu Aur Muslim Donon Huun: Salman khan

Hindu Muslim, Salman khan, Rastriya Ekta Book, Hindi Book

Rashtriya Ekta : Cover Pages

Anukram : Contents

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106

मैं हिन्दू और मुस्लिम दोनों हूँ: सलमान खान

सम्पादक

1

जोधपुर। सलमान जब कोर्ट पहंुचे तो वहां किसी अन्य मामले की सुनवाई चल रही थी। इंतजार में सलमान कोर्ट के एक कोने में खड़े हो गए। थोड़ी देर बाद उनके मामले की सुनवाई षुरू हुई तो वह जज अनुपमा बिजलानी के सामने आए और सिर झुकाकर अभिवादन किया।

जज अनुपमा बिजलानी ने सलमान खान से पूछा – आपकी जाति क्या है? उन्होंने अदालत, अपने वकील
,और अंगरक्षकों को हैरानी भरी निगाहों से देखा और कुछ सेकेंड बाद अदालत में किसी ने उन्हें सुझााया कि वह मुस्लिम बताएं। लेकिन सलमान ने जवाब दिया – मैं हिन्दू और मुस्लिम दोनों हूँ: मैं भारतीय हूँ , फिर कोर्ट ने पूछा कि भारतीय तो सभी हैं, तो सलमान ने जवाब दिया कि, मेरी मां हिंदू है, पिता मुस्लिम हैं, इसलिए मैं इंडियन हूं,

मजिस्ट्रेट              – क्या नाम है?

सलमान                – सलमान सलीम खान

मजिस्ट्रेट              – पिता का नाम?

सलमान                – सलीम

मजिस्ट्रेट              – आपकी उम्र?

सलमान                – 49 साल

मजिस्ट्रेट              – पता?

सलमान                – मुंबई में रहता हंू।

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107

मजिस्ट्रेट              – पूरा पता बताओ?

सलमान                – गैलेक्सी अपार्टमेंट, (धीरे से रोड का नाम लिया और फिर बोले) मुंबई-5

मजिस्ट्रेट              – क्या काम करते हो?

सलमान                – एक्टर हंू।

मजिस्ट्रेट              – आपकी कास्ट?

सलमान                – (इधर-उधर देखते रहे। चेहरे के भाव भी ऐसे थे जैसे कुछ नहीं समझे। इस बीच उनके वकील श्रीकांत षिवदे ने कहा योर कॉस्ट। पीछे से कोई बोला मुस्लिम, लेकिन सलमान चुपचाप खड़े रहे। इस पर ष्विदे ने एक बार फिर कहा अपनी जाति बताओ) इसके बाद सलमान ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम बोथ (दोनों) हैं। पिता मुस्लिम और मां हिंदू।

बता दें कि सलमान के पिता और स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान ने साल 1964 में सुषीला चरक से षादी की थी। सुषीला का जन्म मराठी हिंदू परिवार में हुआ था। सलीम खान से षादी के लिए उन्होंने इस्लाम कुबूल करते हुए अपना नाम सलमा रख लिया था। हालांकि, सलीम खान की दूसरी पत्नी हेलन धर्म से क्रिष्चियन हैं।

घर को मिनी इंडिया कहते हैं सलमान खान

सलमान खान के बारे में कहा जाता है कि वे अपने घर को मिनी इंडिया कहतक हैं। दरअसल, वे ऐसा इसलिए कहते हैं, क्योंकि उनके परिवार में हिंदू, मुस्लिम और क्रिष्चियन सभी धर्मो के लोग हैं और सभी एक ही छत के नीचे रहते हैं।

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Rajpath se “Run for Unity” : Pradhanmantri ka bhashan

Rajpath,  for Unity, Pradhanmantri ka bhashan,  Rastriya Ekta Book, Hindi Book

Rashtriya Ekta : Cover Pages

Anukram : Contents

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102

राश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

सम्पादक

1

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

2मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गाराश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो3 धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गांधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में राश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गांधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में राश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गांधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में ंधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में

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103

4समर्पित हो गए, और हिंदुस्तान के किसानों को आजादी के आंदोलन में जोड़कर के उन्होंने अंग्रेज सल्तनत को हिला दिया था। अंग्रेज सल्तनत ने भांप लिया था अगर देष का गांव, देष का किसान आजादी के आंदोलन का हिस्सा बन गया तो अंग्रेज सल्तनत की कोई ताकत नहीं है कि वो आजादी के दीवानों के खिलाफ लड़ाई लड़ सके।

कभी-कभी जब हम रामकृश्ण परमहंस को देखते हैं तो लगता है कि स्वामी विवेकानंद के बिना रामकृश्ण परमहंस अधूरे लगते हैं। वैसे ही जब महात्मा गांधी को देखते हैं तो लगता है कि सरदार साहब के बिना गांधी भी अधूरे लगते थे। यह एक अटूट नाता था। यह अटूट जोड़ी थी जिस दांडी यात्रा ने हिंदुस्तान की आजादी को नया मोड़ दिया था।

पूरे विष्व को सबसे पहले ताकतवर मैसेज देने का अवसर दांडी यात्रा में से पैंदा हुआ था। उस दांडी यात्रा में5 एक सफल संगठक के रूप में, एक कार्यकर्ता के रूप में सरदार साहब की जो भूमिका थी, वो बेजोड़ थी। और महात्मा गांधी ने दांड़ी यात्रा की पूरी योजना सरदार साहब के हवाले की थी। हम कल्पना कर सकते थे कि देष की आजादी आंदोलन के अलग-अलग पढ़ाव में, महात्मा गांधी के साथ रहकर के सरदार साहब की कितनी अहम भूमिका रही थी और आजादी के बाद सरदार साहब का लाभ देष को बहुत कम मिला। बहुत कम समय तक हमारे बीच रहे। लेकिन इतने कम समय में सरदार साहब ने अंग्रेजों के सारे सपनों को धूल में मिला दिया था, चूर-चूर कर दिया था। अपनी दूर दृश्टि के 6द्वारा, अपने कूटनीति सामर्थ्य के द्वारा, अपनी राश्ट्र भक्ति के द्वारा। अंग्रेज चाहते थे कि देष आजाद होने के बाद सैकड़ों टूकड़ों में बिखर जाए। आपस में लड़ते रहे, मर मिटते रहे, यह अंग्रेजों का इरादा था, लेकिन सरदार साहब ने अपनी कूटनीति के द्वारा, अपनी दीर्घ दृश्टि के द्वारा, अपने लोखंडित मनोबल के द्वारा साढ़े पांच सौ से भी अधिक रियासतों को एक सूत्र

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104

7में बांध दिया। जिसे सम्मान देने की जरूरत थी, उसे सम्मान दिया जिसको पुचकारने की जरूरत थी, उसको पुचकारा और जिसको आंख दिखाने की जरूरत थी उसको आंख दिखाने में भी सरदार पटेल ने कभी हिचक नहीं की, संकोच नहीं किया। उस सामर्थ्य का परिचय दिया था। और उसी महापुरूश ने, एक प्रकार से आज जब हिंदुस्तान देख रहे हैं वो एक भारत का सफलदृश्टा उसके नियंता सरदार पटेल को देष कभी भूल नहीं सकता है।

षताब्दियों पहले इतिहास में चाणक्य का उल्लेख इस बात के लिए आता है कि उन्होंने अनेक राजे-8रजवाड़ों को एक करके, एक सपना लेकर के, राश्ट्र के पुनरूद्धार का सपना देकर के सफल प्रयास किया था। चाणक्य के बाद एस महान काम को करने वाले एक महापुरूश हैं, जिनका आज हम जन्म जयंती पर्व मना रहे हैं, वो सरदार वल्लभ भाई पटेल हैं। लेकिन यह कैसा दुर्भाग्य है, जिस व्यक्ति ने देष की एकता के लिए अपने आप को खपा दिया था, आलोचनाएं झेली थी, विरोध झेले थे। अपने राजनीतिक यात्रा में रूकावटें महसूस की थी। लेकिन उस लक्ष्य की पूर्ति के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए थे, और वो लक्ष्य था भारत की एकता। उसी देष में, उसी देष में, उसी महापुरूश की जयंती पर, 30 साल पहले भारत की एकता को गहरी चोट पहंुचाने वाली एक भयंकर घटना ने आकार लिया। हमारे ही अपने लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। और वो घटना किसी सम्प्रदाय के लोगों के सीने पर लगे घाव की नहीं थी, वो घटना भारत के हजारों साल के महान व्यवस्था के सीने पर लगा हुआ एक छूरा था, एक खंजर था, भयंकर आपत्तिजनक था। लेकिन दुर्भाग्य रहा इतिहास का कि उसे महापुरूश के जयंती के दिन यह हो गया। और तब जाकर के देष की एकता के लिए, हम लोगों ने अधिक जागरूकता के साथ, अधिक जिम्मेवारी के साथ। सरदार साहब ने हमें एक भारत दिया, श्रेश्ठ भारत बनाना हमारी जिम्मेवारी है। ‘एक भारत श्रेश्ठ भारत‘

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105

इस सपने को पूरा करने के लिए भारत की जो महान विरासत है वो विरासतें विविधता में एकता की है। उस विविधता में एकता की विरासत को लेकर के, जातिवाद से परे उठकर के, भाशावाद से परे उठकर के, सम्प्रदायवाद से परे उठकर के एक भारत समृद्ध भारत, ऊंच-नीच के भेदभाव से मुक्त भारत यह सपने को साकार करने के लिए आज से उत्तम पर्व नहीं

हो सकता, जो हमें आने वाले दिनों के लिए प्रेरणा देता रहे।

और युवा पीढ़ी आज इस राश्ट्रीय एकता दिवस पर पूरे हिंदुस्तान में त्नद वित न्दपजल के लिए दौड़ रही है। मैं समझता हंू यह हमारा प्रयास एकता के मंत्र को निरंतर जगाए रखना चाहिए। और हमारे षास्त्रों में कहा है राश्ट्रयाम जाग्रयम वयम..हर पल हमें जागते रहना चाहिए अपने सपनों को लेकर के, सोचते रहना चाहिए, उसके अनुरूप काम करते रहना चाहिए तभी संभव होता है। भारत विविधताओं से भरा हुआ देष है। अनेक

9विविधताओं से भरा हुआ देष है। विविधता में एकता यही हमारी विषेश्ता है। हम कभी एकरूपता के पक्षकार नहीं रहे। हम विविधताओं से भरे हुए रहते हैं। एक ही प्रकार के फूलों से बना गुलदस्ता और रंग-बिरंगे फूलों से बने गुलदस्ते में कितना फर्क होता है। भारत उन विषेशताओं से भरा हुआ देष है, उन विषेशताओं को बनाते हुए एकता के सूत्र को जीवंत रखना,

एकता के सूत्र को बलवंत बनाना यही हम लोगों का प्रयास है और यही एकता का संदेष है।

राज्य अनेक राश्ट्र एक,

पंथ अनेक लक्ष्य एक,

बोली अनेक स्वर एक,

भाशा अनेक भाव एक,

रंग अनेक तिरंगा एक,

समाज अनेक भारत एक,

रिवाज अनेक संस्कार एक,

कार्य अनेक संकल्प एक,

रहा अनेक मंजिल एक,

चेहरे अनेक मुस्कान एक,

इसी एकता के मंत्र को लेकर यह देष आगे बढ़े।

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Ghar Vapsi Samarthak Dr Aanmedkar: Aafrika Se GandhiJi Ka Bhart Lautna

Ghar Vapsi, Dr Aanmedkar, Afrika Se Gandhi, Gandhi Ka Bhart Lautna, Rastriya Ekta Book Hiindi Book

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Anukram : Contents

98

1घर वापसी समर्थक डॉ. आंबेडकर एवं आफ्रिका से गांधी का भारत लौटना

सम्पादक

घर वापसी समर्थ्ज्ञक संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकरः इस साल 14 अप्रैल को आंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर राश्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दोनों मुखपत्र ऑर्गनाइजर और पांचजन्य ने 200 पन्नों का स्पेषल अंक लाने का 2फैसला किया है, जिसमें उनके ‘षुद्धतावदी‘ होने के बारे में बताया जाएगा, जिन्होंने इस्लामिक ‘आक्रमण‘, इस्लाम में धर्मांतरण, साम्यवाद और संविधान के अनुच्छेद 370 आदि मसलों के खिलाफ आवाज बुलंद की।

एक आंबेडकरवादी और सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि इस के जरिये संघ का इरादा दलितों को राश्ट्र की एकता के लिए अपनी तरह आकर्शित करना है।

नागपुर में हुई बैठक में संघ ने ‘एक कुआं‘ एक मंदिर, एक ष्मषान‘ की नीति को दोकराते हुए आंबेडकर को लोगों को एकजुट करने वाले षख्स के तौर पर पेष करने का फैसला किया था। संघ की पत्रिकाओं में संघ से जुड़े दलित नेताओं और यहां तक कि संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृश्ण गोपाल के भी लेख हैं। इन लेखों में कहा गया है कि आंबेडकर राश्ट्रवादी थे और उन्होंने अपने समर्थ्ज्ञकों से कहा था कि वह देष को सबसे पहले ध्यान में रखें।

ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने कहा, ‘उनका मानना था कि इस्लाम में भाईचारे की बात सिर्फ मुसलमानों को एकजुट करने तक सीमित है। वह राजनीतिक इस्लाम के आक्रामणकारी रवैये के जबर्दस्त आलोचक थे। जब पाकिस्तान और हैदराबाद जैसे कुछ प्रांत पिछड़ी जाति के हिंदुओं का धर्मांतरण करवा रहे थे, तो आंबेडकर ने इसके खिलाफ चेतावनी थी और कहा कि अगर ये फिर से हिंदू बनते हैं, तो इनका स्वागत किया जाएगा। इस तरह से उन्होंने भी घर वापसी का समर्थन किया था।‘ इस अंक में लिखे गए लेखों में कहा गया है कि आंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने की मुख्य वजह विदेषी आक्रमणों के दौरान हिंदू समाज में सामाजिक सुधार में आया ठहराव था।

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99

   जातिवाद, छुआछूत राश्ट्रीय एकता में बाधक

राश्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने हिंदुओं को एक करने के जरिये राश्ट्रीय एकता के लिए नवीनतम योजना पर काम करने का फैसला किया है। संघ के लिए अगले तीन साल में ‘एक कुआं, एक मंदिर और एक ष्मषान भूमि‘ की रणनीति अहम होगी। इसके जरिये संगठन का इरादा जाति आधार पर भेदभव को खत्म कर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोगों को एकजूट करने का है। साथ ही, उन लोगों को भी फिर से हिंदू धर्म के दायरे में लाए जाने की योजना है, जिन्होंने कोई और धर्म स्वीकार कर लिया है। राश्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देष के उत्तर-पूर्व इलाके पर फोकस करेगा और उसकी दक्षिण भारत में भी विस्तार की योजना है। साथ ही, संगठन विदेषी भाशा के बजाय क्षेत्रीय भाशाओं को ज्यादा अहमियत देगा।

नागपुर में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मुख्य बातें उभर कर सामने आई हैं। और उन सभी बातों पर विस्तार से चर्चा भी हुई। इस बैठक में संघ के कुल 1,400 प्रतिनिधियों ने किस्सा लिया। तीन दिनों तक चली यह बैठक रविवार को खत्म हुई। इस दौरान संघ ने जाति से जुड़े उस सर्वे का जायजा लिया, जिसे संगठन ने हाल में एक दर्जन से भी ज्यादा राज्यों में करवाया था। कार्यकर्ताओं को जाति के आधार पर भेदभाव और इससे निपटने के तरीकों पर विचार कर उसी दिषा में अग्रसर होने को कहा गया। आरएसएस ने उत्तराखंड के प्रवासी जनजातीय समुदाय के लोगों को जोड़ने के लिए भी अभियान चलाया था, जो राजपूत राजा महाराणा प्रताप को आराध्य मानते हैं, लेकिन हाल के वर्शो में वे हिंदू परंपरा से हट गए हैं।

आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेष भैयाजी जोषी ने बताया, ‘हिंदू धर्म से जुड़े कार्यक्रमों में श्रोताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि इस समुदाय में एक होने की दिलचस्पी बढ़ रही है।‘

3इस बार प्रतिनिधि सभा में प्रतीक नगालैंड की रानी गेदिनलियू को बनाया गया, जिन्होंने ब्रिटिष हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जनजातीय समुदायों के लोगों के ईसाई धर्मांतरण का विरोध किया। जाहिर है कि संघ के लिए देष के उत्तर-पूर्व हिस्से प्राथमिकता सूची में अहम है।

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आफ्रिका से गांधी के भारत लौटने के सामान ही धर्मान्तरित हिन्दुओं की घर वापसी स्वागतेय

बीबीसी में प्रकाषित एक लेख है, जिसका षीर्शक हैः ‘घर वापसी‘ जिसने बदल दिया भारत का इतिहास

नौ जनवरी 1915 को जब अरबिया जहाज़ ने मंुबई के अपोलो बंदरगाह को हुआ, उस समय मोहनदास करमचंद गांधी की उम्र थी 45 साल.

12 साल से उन्होंने अपनी जन्म भूमि के दार्षन नहीं किए थे.

(इसी प्रकार हमारे अनेक न्दिू धर्मी लो धर्मान्तरित हो गए प्रलोभन या अन्य प्रकार डरने के कारण और वे गांधी के सामान ही अपने हिन्दू परिवारों से दुरी बनाये रखे)

जब गांधी जहाज से उतरे तो उन्होंने एक लंबा कुर्ता धोती और एक काठियावाड़ी पगड़ी पहनी हुई थी. उनसे मिलने आए लोगों ने या तो यूरोपियन सूट पहने हुए थे या फिर वो राजसी भारतीय पोषाक में थे.

(इसके विपरीत जब धर्मान्तरित हमारे लोग यूरोपियन सूट पहने हुए लोगों और विदेषी भाशा रहन सहन वालों के बीच चले गए थे.)

इसी समारोह में जब गांधी की तारीफों के पुल बांधे जा रहे थे तो उन्होंने बहुत विनम्रता से कहा था, ‘‘भारत के लोगों को षायद मेरी असफलताओं के बारे में पता नहीं है. आपको मेरी सफलताओं के ही समाचार मिले हैं. लेकिन अब मैं भारत में हूं तो लोगों को प्रत्यक्ष रूप से मेरे दोश भी देखने को मिलेंगें. मैं उम्मीद करता हंू कि आप मेरी गलतियों को नजरअंदाज करेंगे. अपनी तरफ से एक साधारण सेवक की तरह मैं मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित हंू.‘‘

(इसी प्रकार घर वापसी मुहीम द्वारा लौटे हमारे लोग महात्मा गांधी जैसे ही धुशि जाहिर करते हैं तो हिन्दू विरोधी समाचार जगत और नेताओं के पेट में दर्द खयों होने लगता है?)

महात्मा गांधी के पौत्र और उनकी जीवनी लिखने वाले राजमोहन गांधी कहते हैं, ‘‘गोखले के कहने पर गांधी बंबई के गवर्नर विलिंगटन से मिले थे औ

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उनके कहने पर उन्हें ये आष्वासन दिया था कि सरकार के खिलाफ कोई कदम उठाने से पहले वो गवर्नर को सूचित करेंगे. षायद सरकार भी गांधी को अपने खिलाफ नहीं करना चाहती थी, इसलिए उनके भारत आने के कुछ समय के भीतर ही उसने दक्षिण अफ्ऱीका में की गई उनकी सेवाओं के लिए कैसरे-हिंद के खिताब से नवाजा था.‘‘

(क्या इसका मतलब है की गांधी जी के भारत लौटने के पीछे सुभासचन्द्र बॉस तथा क्रांतिकारियों चन्द्रषेखर आजाद, भगत सिंह आदि से बैक फुट में आचुकी ब्रिटिष हुकूमत की कोई चाल बाजी थी? लार्ड मौन्टबेटन ने जानते हुए भी एडविना और नेहरू के रोमांटिक सम्बन्धों को कैसे सहन किया? क्या 370 धारा और कष्मीर में युद्ध विराम के पीछे माउंट बेटन का हाथ नहीं था? इस तथ्य का रहश्योद्घाटन मैंने अपनी ंदहतमरप में लिखी पुस्तक के अध्याय 5 में किया है। पुस्तक का नाम है‘‘ एक्कारसेड एंड जिहादी नेबर‘‘.

गमछा नुमा धोती ही सिर्फ पहनने वाले साधु जैसे महात्मा गांधी को पाष्चात्य सभ्यता वाले नेहरू ही कैसे पसंद आये? मौलाना आज्ज़द से लेकर सरदार पटेल तक की पीठ में छुरा नेहरू के लिए किस अहिंसावादी ने भोंका था? )

गाधी ने गोखले की सलाह का पालन करते हुए पहले भारत के लोगों को जानने कि कोषिष षुरू की, उन्होंने तय किया कि वो पूरे भारत का भ्रमण करेंगे और वो भी भीड़ से भरे तीसरे दर्जे के रेल के डिब्बे से.

(इसका मतलब यह हुआ कि वे भारत की आजादी के उद्देष्य से लौटे नहीं थे।)

गोखले के षोक समारोह में भाग ले कर वो वापस षांति निकेतन लौटे जहां टैगोर ने उन्हें पहली बार महात्मा षब्द से संबोधित किया. वहां पर उन्होंने काषी विष्वनाथ मंदिर में दक्षिणा देने से इंकार कर दिया.

एक पंडे ने उनसे कहा,‘‘भगवान का ये अपमान तुझे सीधे नर्क में ले जाएगा.‘‘ इसके बाद गांधी तीन बार बनारस गए लेकिन उन्होंने एक बार भी विष्वनाथ मंदिर के दर्षन नहीं किए.

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Swadeshi Abhiyan : By Roshnlal Agrawal, MLA, Raigarh

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                            स्वदेषी अभियान सम्पादक

स्वामी विवेकानन्द जी के जन्म दिवस 12 जनवरी से सम्पूर्ण भारत में ‘‘स्वदेषी जागरण मंच‘‘ के तत्वाधान में ‘‘स्वदेषी अभियान‘‘ प्रारंभ हुआ है। रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री बाला साहब देवरस ने सतर्क किया है कि ‘‘बहुराश्ट्रीय कंपनियां देष की अनमोल साधन संपत्ति का केवल दोहन ही नहीं षोशण भी कर रही है, साथ ही साथ सब प्रकार क खुफिया जानकारी भी प्राप्त करती है। ये बहुराश्ट्रीय कंपनियां तथा विष्व बैंक और अन्तर्राश्ट्रीय मुद्राकोश आदि विदेषी एजेन्सियां भारत की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाकर अपनी मुट्ठीमें रखने के लिए आगे बढ़ रही हैं। हें इसी प्रकार से कंवल व्यापार करने आई विदेषी ईस्ट इंडि़या कम्पनी ने ही गुलाम बनाया था।

बहुराश्ट्रीय कंपनियों द्वारा निर्मित कुछ वस्तुओं क सूचि निम्नलिखित हैं। हम सब भारतीयों का कर्त्तव्य है कि इन वस्तुओं का उपयोग बिल्कुल नहीं करें। इनके विकल्प में भारतीय स्वदेषी वस्तुएं हैं उन्हें अपनायें।

विदेषी कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुएं-

टूथपेस्ट-कॉलगेट,फॅरहेन्स,क्लोज अप,सिबाका,ग्लीन,एनोफार्म,

टूथ पाऊडार-कॉलगेट,फॅरहेन्स, सिबाका

ब्लेड-सेवन ओ क्लॉक,विल्मैन,विल्टेज,इरास्मिक,पाण्डस,मेन्थल।

षेविंग क्रीम-ओल्ड स्पाइस,लेदर, पामोलिव,निविया,इरास्मिक,मेन्थल।

नहाने का साबुन-लक्स,रेक्सोना,लिरिल,लाइफबॉय,ब्रीज,पीयस,पाण्ड्स,

कपड़े धोने का साबुन-सनलाइट,रिन,व्हील,सर्फ,चेक,वि,हारपिक।

पंखे-जी.ई.सी. एवं रैलीज कंपनी

टार्च एवं बैटरी-एवरेडी,जीवन साथी।

पंय-पेप्सी,कोका कोला, लहर

सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री- वेस्ले(हेयर टानिक),ब्रिलक्रीम, आदि हेयर क्रीम, पाण्ड्स,ओल्ड स्पाइस,हेलो,हिना,पामोलिव,क्लीनिक स्पेषल,क्लीनिक सनसिल्क,क्लियरसिल,मेडीकेयर,ग्लीम,पी.ओ.,ब्यूटी,आदि षैम्पू,तथा इस नाम की क्रीमें एवं फेयर एण्ड़ लवली, नीविया, मिन, डिटॉल,ए.एफ.डी.सी. सुप्रीम चार्मिस, आदि क्रीम: नायसिल, लिरिल, पाण्डस्,ओल्ड स्पाईस, जॉनसन ादि पाउडर।

रेडिमेड कपड़े- रैगलर,नाईक,डयूक,ऐडीडास,पावर व प्यूा,की टीषर्ट,जीन्स व षर्ट।

रसोईघर से संबंधित सामान-टिक्का,होमालइट,आदि दियासालाइ, मिल्कमेड, नेस्पे,फेरेक्स,गाल्टको,आदि दूध पाऊडर,सेरलेक,नेस्टम, एल.पी.एफ. आदि दूध पाऊडर,सेरेलक,नेस्टम,रेडलेबल,लिप्टन,टैस्टर चौइस,टाइगर,ग्रीनलेबल,टी टॉप,चीयर्स,डायमण्ड़,रंगोली,ूधुबन,सुपर कप, उत्सव,सिम्फनी,स्वानलेकर, जैड ग्लो, गोल्ड ब्लासम,डबल डायमण्ड़,ब्लू डायमण्ड़ आदि चाय।

जूते-पावर,एम्बेसेडर,क्वाडा,क्वनी,नार्थस्टार,टायर,हाईवाकर,प्यूमा,एंपायर,बाटा।

वाहनों के टायर-अपोलो,फायर स्टोन,सीएट,गुडईयर,डनलय,

अन्य- डालडा वनस्पति,साकया रिफाइंड,आयल,सनडाप,किस्टल,वनस्पति,।

तल-ब्रिटानिया,कैडब्री,ग्लूकोज,लिप्टसन ग्लूकोज आदि। बिस्कुट-5स्टार चॉकलजेट स्वाद एफलेयर,टाफियां,कोको चीप,कोकोआ,नेस्कैफे,नेस्ले आदि।

-रोषनलाल अग्रवाल,रायगढ़

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Lokmanya Tilak: By Suresh Kumar Agrawal

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लोकमान्य तिलक

-सुरेष कुमार अग्रवाल, रायपुर

उपाध्यक्ष- लायन्स क्लब फेन्डस,रायपुर

गांधी जी के षब्दों में -‘‘लोकमान्य तिलक अनमोल हैं‘‘ स्वदेषी भावना के साक्षात स्वरूप, और ‘‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है की सिंह गर्जना करने वाले तिलक ही थे।

उनके एक वकील मित्र ने पूछा था-गर्वनर की सभा में जाते समय आप अंगरखा और पगड़ी पहन कर जायेंगे या सूट पहन कर? लोकमान्य तिलक का उत्तर था- अंग्रेज हमारे देष में आये हैं यहां की जलवायु के अनुसार उन्हें अपने वेश में परिवर्तन करना चाहिए, ना कि मुझे। मैं पनी पोषाक क्यों बदलूं।

सादगी के पुजारी तिलक का संस्मरण उन्ही के षब्दों में- ‘‘जब केसरी के लिए प्रेस खरीदा गया तो उसके टाईप के केस स्वयं मुझे अपने कंधे पर ढ़ोने पड़े…..मैं जिस बिस्तर पर सोता था, उसी को लपेटकर सामने रख लेता और उसी पर रख कर लिखता। वही हमारी मेज थी।

स्वतंत्रता के बाद आज तक कांग्रेस तुश्टीकरण की नीति पर चल रही है उसी कांग्रेस के लिये स्वतंत्रता के 1पूर्व के कांग्रेस नेता तिलक के सम्बंध में स्व. बी.बी.खेर का लिखा एक संस्मरण है- 1893 में पूना बम्बई और दूसरे स्थानों पर भीशण हिन्दू मुस्लिम दंगे हुए। तिलक ने इस संबंध में सरकारी नीति का विरोध करने के लिए पूना में सभा ली। जस्टिस गोविन्द रानडे और उनके षिश्य गोपाल कृश्ण गोखले ने इसका विरोध किया, क्योंकि उन्हें भय था कि एैसा करने से मुसलमान और अंग्रेज सरकार दोनों चिढ़ जायेंगे, पर तिलक कहां मानने वाले थे। उन्होंने रानड़े और गोखले दोनों अपने पत्र ‘‘केसरी‘‘ में खूब खबर ली।‘‘

70-75 वर्श पूर्व महाराश्ट्र में गणेषोत्सव का पर्व तिलक ने ही आपस मे मेलजोल बढ़ाने के उद्देष्य से प्रारंभ किया था।

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स्टार टी.वी. और सी.एन.एन. के माध्यम अतंर्राश्ट्रीय टी.वी. का बढ़ता स्वरूप हमारी राश्ट्रीय एकता के लिए खतरा बन गया है। इसमें सर्वाधिक आपत्तिजनक कार्यक्रम पाकिस्तानी टी.वी. का होता है।                                                                                                                – एक समाचार

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