Full Hindi Poem of HariOm Pawar on “BLACK_MONEY”

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Silent Assassins of Lal Bahadur Shastri, Jan 11-1966

Accursed & Jihadi Neighbour

राष्ट्रीय एकता

डी एल एफ – वाड्रा : भ्रष्ट तंत्र 

SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Haidrabad mein congress ke Rajiv Gandhi, Aanad Sharma, and Kejriwal, Yechury, D Raja par desh droh ke mukadme darj

Deshdroh ke mukadame, Haidrabad ke thane mein, Rahul gandhi, Anand Sharma, Kejriwal, Yechury, D  Raja, Congress

Deshdroh ke liye prerit karne vale soachte rahe honge ki ve to internationally defamed leaders hain, hamare bloody hands ko koi sparsh tak nahin kar sakega?

हैदराबाद के ठाणे सरूरनगर कीबेराबाद तेलंगाना में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी , केजरीवाल , सीताराम येचुरी , आनंद शर्मा एवं डी राजा के विरुध राजद्रोह देह द्रोह के मुकदमे दर्ज

भारत में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध की हवा विरोधी नेताओं ने युवा भारत के भावी भाग्य विधाताओं को बरगलाकर बहाने का दुशाहस देशोहपूर्ण किया है. जैसे गौ माता को आगे कर पहले युद्ध एक दो इसलिए लड़े की जिससे वे आक्रमण से बच सकें. यही पाप विधयर्थियों के पीछे छिप कर विरोधी नेताओं ने किया है। सभी प्रधान मंत्री बनाने के लिए मोदी जी को खत्म करने के लिए जैसे उनके प्रधान मंत्री बने के पहल किया था वैसा ही अब हो रहा है। उन्होंने ने मोदी जी की हत्या के लिए पाकिस्तान से आत्मघाती शूटर्स बुलाये ? इशरत जहाँ गुजरात क्यों किसके साथ गई थी. पतन के गांधी मैदान में सीरियल बम ब्लास्ट क्यों किसका इजहारे पर हुए। हिन्दुओं को आतंकवादिय से जोड़ने की साजिश हाफिज सईद जैसे टेररिस्ट ट्रेनिंग सेंटर पी ओ के में चलाने वालों के इशारे पर हुआ. प्रज्ञा भर्ती आज तक जेल में बंद है बिना किसी चार्ज के। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती और उनके भ्राता को निर्दोष होते हुए भी ९ वर्ष तक जेल में बंद रकाः। अभी उमर खालिद के नाम से मुस्लिम कार्ड खेलने का प्रयाश हुआ। उसके पिता जिसके सिमी की एक्टिविटीज में भागीदारी रही उसके जािरये मीडिया को माध्यम बना कर मुस्लिम कार्ड खेलने के लिए नारा दिया : मैं उम्र खालिद हूँ टेररिस्ट नहीं ! ये नारे बॉलीवुड से चुराए हैं ?

देश द्रोह छम्य नहीं। चाहे नेता हो या विद्यार्थी। बुद्धा हो या युवा। महिला हो या पुरुष। आज़ादी कश्मीर की आज़ादी देश के दस टुकड़े भारत की बर्बादी तक जंग। ये नारे भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा को अच्छे लग सकते हैं क्यों की अमेरिका के लिए फ्रीडम ऑफ़ रिलिजन फ्रीडम ऑफ़ स्पीच वॉर ओन टेरर की परिभाषा अमेरिका के लिए अलग और भारत के लिए अलग है। हमारे लिए तो एक तरफ मानवता वादी हैं और दूसरी तरफ आतंकवादी। जियो और जीनो दो। वसुधैव कुटुंबकम हमारे ध्येय सिद्धांत हैं।
हैदराबाद के ठाणे सरूरनगर कीबेराबाद तेलंगाना में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी , केजरीवाल , सीताराम येचुरी , आनंद शर्मा एवं डी राजा के विरुध राजद्रोह देह द्रोह के मुकदमे दर्ज हुए हैं चारा १२४ अ के अंतर्गत।

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Accursed & Jihadi Neighbour

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

IB: Intl conspiracy financed & planned abroad as slogan raised in JNU,more would happen in 15 Edu-Institutes of 18 Ind Cities?

Balaji ke darshan kar lautate samay Hema Malini ka accident ? Kya darshan nahin karne se sur badi durghatna sambhavit thi ?

Tags: Hema Malini, Balaji darshan, Hema Malini ka accident, Jaipur Agra highway, Actress aur BJP MP,  FIR, Balaji temple

Balaji ke darshan kar lautate samay Hema Malini ka accident ? Kya darshan nahin karne se sur badi durghatna sambhavit thi ?

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बालाजी के दर्शन कर लौटते समय हेमा जी का एक्सीडेंट: क्या दर्शन नहीं करने से और बड़ी दुर्घटना संभावित थी ?

जयपुरआगरा हाईवे पर एक्ट्रेस और बीजेपी एमपी हेमा मालिनी की मर्सडीज और एक ऑल्टो कार में हुई टक्कर के मामले में शुक्रवार को पुलिस ने सांसद के ड्राइवर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस हादसे में ओवरस्पीडिंग का केस दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि ड्राइवर 150 किमी प्रति घंटा से भी ज्‍यादा की स्‍पीड से कार भगा रहा था। गुरुवार रात हुए इस हादसे में ऑल्‍टो में सवार डेढ़ साल की बच्ची की मौत हो गई थी। हेमा मालिनी, उनका ड्राइवर समेत पांच लोग घायल भी हुए थे। घायलों में बच्ची के माता-पिता और भाई शामिल हैं।

ड्राइवर महेश ठाकुर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज FIR किया गया है। इसके अलावा, लापरवाही और तेज स्पीड से गाड़ी चलाने की धाराएं भी लगाई गई हैं। हेमा मालिनी को जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में हेमा मालिनी के सिर, हाथ और कमर में चोट लगी है।

दौसा स्थित बॉलजी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अत्यंत आस्था है।  धर्म प्रिय हेमा मालिनी जी मंदिर में बालाजी के दर्शन कर लौट रही थी उसी समय यह दुखद हादसा हुआ।  बालाजी के दर्शन करने पर भी यह एक्ससीडेंट क्यों हुआ ? यह प्रश्न कुछ लोगों को विचलित कर सकता है ! इस सन्दर्भ मुझे बाल्यकाल में सुनी एक लघु कथा का उल्लेख यहाँ करना मैंने उचित समझा है :–

एक भक्त भगवन का दर्शन कर लौट रहा था।  उसी रस्ते से एक कुकर्मी भी लौट रहा था।  उन दोनों का एक ही रस्ते से लौटना आश्चर्य का कारण नहीं है।  आश्चर्य यह है की कुकर्मी को सोने का पात्र रस्ते में पड़ा मिलता है परन्तु ठीक इसके विपरीत भगवन के दर्शन कर लौट रहे भक्त के पैर में कांटा / खिला चुभ जाता हैi प्रश्न उठाना स्वाभाविक है की ऐसा क्यों हुआ ?

समीक्षा: ईश्वर का दर्शन कर लौट रहे महानुभाव की दुर्घटना में  मृत्यु तक संभावित थी पर वह हादसा कांटा चुभने से ही ताल गया. इसके विपरीत कुकर्मी को राजगद्दी मिलने वाली थी परन्तु उसके द्वारा किये गए कुकर्म के कारण उसे सिर्फ सोने का पत्र प्राप्त कर ही संतोष करना पड़ा।

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Ghar Vapsi samarthak Dr Ambedkar evam afrika se Gandhi ka bharat lautna

Tags: Ghar Vapsi, Dr Ambedkar,  Gandhi ka bharat lautna, Sanvidhan nirmata, Rastriya swayamsevak sangh, RSS,  Islam ein dharmantaran, Samyawad, rashtra ki ekta,  organiser ke sampadak, Prafull Ketkar, Jatiwad, gandhi africa se bharat mein

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“I appreciate your words replete with love and goodwill as your blessings for me…,” barrister Mohandas Karamchand Gandhi had said exactly one hundred years ago after his historic homecoming after spending 22 years in South Africa.
Mumbai Sarvodaya Mandal along with other Gandhian institutions in Mumai and University of Mumbai organised a special programme to commemorate the Centenary of Gandhi’s return to India on Friday, 9th January 2015.

Ghar Vapsi samarthak Dr Ambedkar evam afrika se Gandhi ka bharat lautna

घर वापसी समर्थक डॉ आंबेडकर एवं आफ्रिका से गांधी का भारत लौटना

 

घर वापसी समर्थक संविधान निर्माता डॉ आंबेडकर: इस साल 14 अप्रैल को आंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दोनों मुखपत्र ऑर्गनाइजर और पांचजन्य ने 200 पन्नों का स्पेशल अंक लाने का फैसला किया है , जिसमें उनके ‘शुद्धतावादी’ होने के बारे में बताया जाएगा, जिन्होंने इस्लामिक ‘आक्रमण’, इस्लाम में धर्मांतरण, साम्यवाद और संविधान के अनुच्छेद 370 आदि मसलों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की।

एक आंबेडकरवादी और सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि इस के जरिये संघ का इरादा दलितों को राष्ट्र की एकता के लिए अपनी तरह आकर्षित करना है।

नागपुर में हुई बैठक में संघ ने ‘एक कुआं, एक मंदिर, एक श्मशान’ की नीति को दोहराते हुए आंबेडकर को लोगों को एकजुट करने वाले शख्स के तौर पर पेश करने का फैसला किया था। संघ की पत्रिकाओं में संघ से जुड़े दलित नेताओं और यहां तक कि संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल के भी लेख हैं। इन लेखों में कहा गया है कि आंबेडकर राष्ट्रवादी थे और उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था कि वह देश को सबसे पहले ध्यान में रखें।

ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने कहा, ‘उनका मानना था कि इस्लाम में भाईचारे की बात सिर्फ मुसलमानों को एकजुट करने तक सीमित है। वह राजनीतिक इस्लाम के आक्रामणकारी रवैये के जबर्दस्त आलोचक थे। जब पाकिस्तान और हैदराबाद जैसे कुछ प्रांत पिछड़ी जाति के हिंदुओं का धर्मांतरण करवा रहे थे, तो आंबेडकर ने इसके खिलाफ चेतावनी थी और कहा कि अगर ये फिर से हिंदू बनते हैं, तो इनका स्वागत किया जाएगा। इस तरह से उन्होंने भी घर वापसी का समर्थन किया था।’ इस अंक में लिखे गए लेखों में कहा गया है कि आंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने की मुख्य वजह विदेशी आक्रमणों के दौरान हिंदू समाज में सामाजिक सुधार में आया ठहराव था।

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जातिवाद, छुआछूत राष्ट्रीय एकता में बाधक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने हिंदुओं को एक करने के जरिये राष्ट्रीय एकता के लिए नवीनतम योजना पर काम करने का फैसला लिया है। संघ के लिए अगले तीन साल में ‘एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान भूमि’ की रणनीति अहम होगी। इसके जरिये संगठन का इरादा जाति के आधार पर भेदभाव को खत्म कर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोगों को एकजुट करने का है। साथ ही, उन लोगों को भी फिर से हिंदू धर्म के दायरे में लाए जाने की योजना है, जिन्होंने कोई और धर्म स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश के उत्तर-पूर्व इलाके पर फोकस करेगा और उसकी दक्षिण भारत में भी विस्तार की योजना है। साथ ही, संगठन विदेशी भाषा के बजाय क्षेत्रीय भाषाओं को ज्यादा अहमियत देगा।

नागपुर में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मुख्य बातें उभकर सामने आई हैं। और उन सभी बातों पर विस्तार से चर्चा भी हुई। इस बैठक में संघ के कुल 1,400 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। तीन दिनों तक चली यह बैठक रविवार को खत्म हुई। इस दौरान संघ ने जाति से जुड़े उस सर्वे का जायजा लिया, जिसे संगठन ने हाल में एक दर्जन से भी ज्यादा राज्यों में करवाया था।

कार्यकर्ताओं को जाति के आधार पर भेदभाव और इससे निपटने के तरीकों पर विचार कर उसी दिशा में अग्रसर होने को कहा गया।

आरएसएस ने उत्तराखंड के प्रवासी जनजातीय समुदाय के लोगों को जोड़ने के लिए भी अभियान चलाया था, जो राजपूत राजा महाराणा प्रताप को आराध्य मानते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में वे हिंदू परंपरा से हट गए हैं।

आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने बताया, ‘हिंदू धर्म से जुड़े कार्यक्रमों में श्रोताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि इस समुदाय में एक होने की दिलचस्पी बढ़ रही है।

इस बार प्रतिनिधि सभा में प्रतीक नगालैंड की रानी गेदिनलियू को बनाया गया, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जनजातीय समुदायों के लोगों के ईसाई धर्मांतरण का विरोध किया। जाहिर है कि संघ के लिए देश के उत्तरपूर्व हिस्से प्राथमिकता सूची में अहम है।

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आफ्रिका से गांधी के भारत लौटने के सामान ही धर्मान्तरित हिन्दुओं की घर वलासी स्वागतेय

http://www.newsanalysisindia.com/post/as-we-welcomed-ghar-vapsi-of-mahatma-gandhi-from-abroad-we-should-also-welcome-ghar-vapsi-of-converted-hindus.aspx

बीबीसी में प्रकाशित एक लेख है , जिसका शीर्षक है :’घर वापसी जिसने बदल दिया भारत का इतिहास

http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2015/01/150117_mahatma_gandhi_return_vivechna_tk

नौ जनवरी 1915 को जब अरबिया जहाज़ ने मुंबई के अपोलो बंदरगाह को छुआ, उस समय मोहनदास करमचंद गाँधी की उम्र थी 45 साल.

12 साल से उन्होंने अपनी जन्म भूमि के दर्शन नहीं किए थे.

 (इसी प्रकार हमारे अनेक हिन्दू धर्मी लोग धर्मान्तरित हो गए प्रलोभन या अन्य प्रकार डरने के कारण और वे गांधी के सामान ही अपने हिन्दू परिवारों से दुरी बनाये रखे )

जब गाँधी जहाज़ से उतरे तो उन्होंने एक लंबा कुर्ता धोती और एक काठियावाड़ी पगड़ी पहनी हुई थी. उनसे मिलने आए लोगों ने या तो यूरोपियन सूट पहने हुए थे या फिर वो राजसी भारतीय पोशाक में थे.

 ( इसके विपरीत जब धर्मान्तरित हमारे लोग यूरोपियन सूट पहने हुए लोगों और विदेशी भाषा रहन सहन वालों के बीच चले गए थे )

एक स्वागत समारोह की अध्यक्षता फ़िरोज़ शाह मेहता ने की थी तो दूसरे समारोह में एक साल पहले जेल से छूट कर आए बाल गंगाधर तिलक मौजूद थे.

इसी समारोह में जब गांधी की तारीफ़ों के पुल बांधे जा रहे थे तो उन्होंने बहुत विनम्रता से कहा था, “भारत के लोगों को शायद मेरी असफलताओं के बारे में पता नहीं है. आपको मेरी सफलताओं के ही समाचार मिले हैं. लेकिन अब मैं भारत में हूं तो लोगों को प्रत्यक्ष रूप से मेरे दोष भी देखने को मिलेंगें. मैं उम्मीद करता हूं कि आप मेरी ग़लतियों को नज़रअंदाज़ करेंगे. अपनी तरफ़ से एक साधारण सेवक की तरह मैं मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित हूं.”

 ( इसी प्रकार घर वापसी मुहीम द्वारा लौटे हमारे लोग महात्मा गांधी जैसे ही धुषि जाहिर करते हैं तोा हिन्दू विरोधी समाचार जगत और नेताओं के पेट में दर्द खयों होने लगता है ?)

महात्मा गांधी के पौत्र और उनकी जीवनी लिखने वाले राजमोहन गांधी कहते हैं, “गोखले के कहने पर गांधी बंबई के गवर्नर विलिंगटन से मिले थे और उनके कहने पर उन्हें ये आश्वासन दिया था कि सरकार के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाने से पहले वो गवर्नर को सूचित करेंगे. शायद सरकार भी गाँधी को अपने ख़िलाफ़ नहीं करना चाहती थी, इसलिए उनके भारत आने के कुछ समय के भीतर ही उसने दक्षिण अफ़्रीका में की गई उनकी सेवाओं के लिए कैसरेहिंद के ख़िताब से नवाज़ा था.”

( क्या इसका मतलब है की गांधी जी के भारत लौटने के पीछे सुभास बॉस  तथा क्रांति कारियों चन्द्र शेखर आज़ाद , भगत सिंह आदि से बैक फुट में आचुकी  ब्रिटिश हुकूमत की कोई चाल  बाजी   थी ? लार्ड मौन्टबेटन ने जानते हुए भी एडविना और नेहरू के रोमांटिक सम्बन्धो को कैसे सहन किया ? क्या ३७० धारा और कश्मीर में युद्ध विराम के पीछे माउंट बेटन का हाथ नहीं था ? इस तथ्य का रहष्योद्घाटन मैंने अपनी angreji में लिखी ोुस्तक के अध्याय में किया है।  पुस्तक का नाम हैएक्कारसेड एंड जिहादी नेबर.

गमछा नुमा धोती ही सिर्फ पहनने वाले साधु जैसे महात्मा गांधी को पाश्चात्य सभ्यता वाले नेहरू ही कैसे पसंद आये ? मौलाना आज्ज़द से लेकर सरदार पटेल तक की पीठ में छुरा नेहरू के लिए किस अहिंसावादी ने भोंका था? )

गांधी ने गोखले की सलाह का पालन करते हुए पहले भारत के लोगों को जानने की कोशिश शुरू की. उन्होंने तय किया कि वो पूरे भारत का भ्रमण करेंगे और वो भी भीड़ से भरे तीसरे दर्जे के रेल के डिब्बे से.

 ( इसका मतलब यह हुआ कि वे भारत की आजादी के उद्देश्य से लौटे नहीं थे। )

गोखले के शोक समारोह में भाग ले कर वो वापस शांति निकेतन लौटे जहां टैगोर ने उन्हें पहली बार महात्मा शब्द से संबोधित किया. वहां से वो बनारस गए. वहां पर उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दक्षिणा देने से इंकार कर दिया.

एक पंडे ने उनसे कहा, “भगवान का ये अपमान तुझे सीधे नर्क में ले जाएगा.” इसके बाद गाँधी तीन बार बनारस गए लेकिन उन्होंने एक बार भी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन नहीं किए.

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Accursed & Jihadi Neighbur

Accursed (Sunanda) & Jihadi Neighb (Pakistan)

Language: English Size: 9”x5.5” Pages 202

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DLF-Vadra: Bhrasht Tantra: Book in Hindi

Language: Hindi,  Size: 9”x5.5”  Pages 100

Price: Rs 50 + Courier Charges Rs. 50/-

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Behind Sindhi School,Ramsagarpara,

RAIPUR, C.G.- 492001, India.

Mo.No. – 09425207574

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

 

Prithviraj Chauhan ki asthiyan: Bharat kaa vajra samman vapas layen

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Prithviraj Chauhan ki asthiyan: Bharat kaa vajra samman vapas layen

पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां: भारत का वज्र-सम्मान वापस लायें

मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की ओर से मोदी को भेजे गए खत में कहा गया है, ‘बाबर विदेशी और मंगोल आक्रमणकारी था। यह चंगेज खां और हलाकू जैसे मंगोलों का वंशज था जिन मंगोलो ने दुनिया के कई शहर उजाड़़ दिए, लाखों लोगों का कत्ल किया। बाबर के पूर्वज हलाकू ने बगदाद पर आक्रमण कर 40 हजार मुसलमानों के साथ साथ पैगम्बर द्वारा नियुक्त इस्लाम के सर्वोच्च धर्मगुरु खलीफा की भी हत्या कर दी थी। इसी हलाकू की वजह से आज दुनिया में इस्लाम का कोई खलीफा नहीं है।’

Ramlala ko tambu mein dekhkar kasha ki Muslim Mahilayein Ayodyavashiyon Se adhik dukhi hain
पत्रक में आगे लिखा है, ‘कोई भी मुसलमान मंगोलों को कभी माफ नहीं कर सकता। इन्हीं मंगोलों के वंशज बाबर ने 1528 में राम मंदिर तोड़कर हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत का बीज बोया। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की सदर ने कहा कि मुसलमानों की इज्जत तभी बढ़ेगी जब वे श्री राम के पक्ष में रहेंगे। जो लोग मंदिर निर्माण के विरोधी हैं वे मुसलमानों को हमेशा गरीब और पिछड़ा बनाए रखना चाहते हैं।’

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पारिवारिक इतिहास के अनुसार हलाकू खान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज खां का पोता और उसके चौथे पुत्र तोलुइ खान का पुत्र था। हलाकू की माता सोरगोगतानी बेकी (तोलुइ खान की पत्नी) ने उसे और उसके भाइयों को बहुत निपुणता से पाला और परवरिश की। उसने परिस्थितियों पर ऐसा नियंत्रण रखा कि हलाकू बचपन में ही एक बडा लड़ाकू और खतरनाक योद्धा बन गया। आगे चलकर वह अपने बलबूते पर मंगोलों का चीन और रूस सहित किर्गीस्तान, उजबेकिस्तान और ईरान अफगानिस्तान तक एक बड़ा साम्राज्य स्थापित कर लिया। हलाकू खां की पत्नी दोकुज खातून एक नेस्टोरियाई ईसाई थी और हलाकू के इलखानी साम्राज्य में बौद्ध और ईसाई धर्म को बढ़ावा दिया जाता था। दोकुज खातून ने बहुत कोशिश की कि हलाकू भी ईसाई बन जाए लेकिन वह मरते दम तक बौद्ध धर्म का अनुयायी ही रहा।

Hulagu was friendly to Christianity. Hulagu’s favorite wife, Doquz Khatun, was also a Christian, as was his closest friend and general, Kitbuqa. It is recorded however that he converted to Buddhist as he neared death, against the will of Dokuz Khatun.

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Hulagu and Queen Doquz Qatun depicted as the new “Constantine andHelen“, in a Syriac Bible.[12][13]

बगदाद का विनाश नवम्बर 1257 ईस्वी हुआ, जब ईराक में हलाकू की 10 लाख मंगोल फौज ने बगदाद की तरफ कूच किया, जहां से खलीफा अपना इस्लामी राज चलाते थे। वहां पहुंचकर उसने अपनी सेना को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा जो शहर से गुजरने वाली दजला नदी (टाइग्रिस नदी) के दोनों किनारों पर आक्रमण कर सकें। उसने खलीफाओं से आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन खलीफाओं ने मना कर दिया। खलीफाओं की सेना ने हलाकू के कुछ योद्धाओं को खदेड़ दिया, लेकिन अगली मुठभेड़ में खलीफा फौज हार गई। मंगोलों ने खलीफा की सेना के पीछे के नदी के बांध को तोड़ दिए जिससे से बहुत से खलीफाई सैनिक डूब गए और बाकियों को मंगोलों ने आसानी से मार डाला।

अरब के खलीफा पर क्या बीती, इस पर दो अलग-अलग वर्णन मिलते हैं। यूरोप से बाद में आने वाले यात्री मार्को पोलो के अनुसार उसे भूखा-प्यासा मारा गया। लेकिन उससे अधिक विश्वसनीय बात यह है कि मंगोल और मुस्लिम स्रोतों के अनुसार उसे एक कालीन में लपेट दिया गया और उसके ऊपर से तब तक घोड़े दौड़ाए गए जब तक उसने दम नहीं तोड़ दिया। अरब देशों पर कब्जा जमाने के बाद सन 1260 में उसने भारत पर आक्रमण की योजना बनाई, लेकिन भारी-भरकम फौज को लम्बे रास्ते तय करने की कठिनाई के कारण और उत्तर भारत के मौसम की मार के चलते वह रास्ते में ही बीमारी का शिकार हो गया और स्वास्थ्य लाभ के लिए वापस मंगोलिया लौट गया । लेकिप यहां पहुंचकर रहस्यमय ढंग से 1265 में उसकी मौत हो गई। अब उसके बाद उसके कबीले यूरोप के कई प्रान्तों में फैल गए लेकिन तिब्बत, कोरिया और चीन उनके पसंदीदा स्थल रहे।

क्या राजस्थान की आन, बान और शान के प्रतीक पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां भारत लौटेंगी?

अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहरी इलाके में आज भी पृथ्वीराज की समाधि मौजूद है। पृथ्वीराज की समाधि का अपमान कर रहे हैं अफगानी।
‘आर्म्स एंड आर्मर: ट्रेडिशनल वेपंस ऑफ इंडिया’ नाम की किताब लिखने वाले ई जयवंत पॉल के मुताबिक, अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहरी इलाके में मौजूद पृथ्वीराज की समाधि आज बहुत ही बुरी हालत में है। गोरी की मौत के 900 साल बाद भी अफगानिस्तानी और पाकिस्तानी उसे अपना ‘हीरो’ मानते हैं। ये लोग गोरी की मौत का बदला लेने के लिए अपना गुस्सा पृथ्वीराज की समाधि पर निकालते हैं। पॉल की किताब के मुताबिक पृथ्वीराज की मजार के ऊपर एक लंबी मोटी रस्सी लटकी हुई है। कंधे की ऊंचाई पर इस रस्सी में गांठ लगी हुई है। स्थानीय लोग रस्सी की गांठ को एक हाथ में पकड़कर मजार के बीचोबीच अपने पैर से ठोकर मारते हैं।

भारत का वज्र-सम्मान वापस लाओ?

पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों की समाधी के बाजू में बाबर की कब्र है। राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और मनमोहन सिंह, नटवर सिंह और राहुल गांधी ने 2006 में अफगानिस्तान की यात्रा की थी।

तीनों नेताओं ने सेक्युलर ब्लैंकेट ओढ़ कर बाबर की कब्र को सलाम कर सम्मान दिया परन्तु बगल में पृथ्वीराज चौहान की छतिग्रस्त समाधी को देखने तक उचित नहीं समझा क्योंकि उन्हें डर था ऐसा करने से उनकी सेक्युलर छवि छतिग्रस्त हो जाएगी। क्या ये नेता  महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य मंत्री कांग्रेस के नेता  पृथ्वीराज चौहान को  भूल सकते हैं ?

चंद बरदायी ने चार बाँस चौबीस गज अंगुल अष्‍ठ प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको रे चौहान दोहे द्वारा पृथ्वीराज को संकेत दिया जिस पर अंधे पृथ्वीराज ने ग़ौरी को शब्दभेदी बाण से मार गिराया तथा इसके पश्चात दुश्मन के हाथ दुर्गति से बचने के लिए दोनों ने एक-दूसरे का वध कर दिया।

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बाबर एक आक्रमणकारी था। लेकिन वोट बैंक नेताओं और मुगले आज़मखानों के लिए विदेशी आक्रांता सेक्युलर और इन्हें रोकने इनसे लोहा लेने वाले इन आक्रान्ताओं के दन्त खट्टे करने तोड़ने वाले हिन्दू राजा कम्युनल हो गए हैं। अन  सी इ आर टी -इग्नू बुक्स में पृथ्वीराज चौहान को कायर कहा गया है? इन बुक्स में सिख गुरुओं और हिन्दू देवी देवताओं की इंसल्ट की गई है। भगत सिंह को देशद्रोही बताया गया है? भाजपा सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अब उन्हें सही करना होगा।

बाहर से आये हुए आक्रांताओं के गुणगान करना और यहाँ के राजाओं को हास्यास्पद और विकृत रूप में पेश करना जवाहर लाल नेहरू और हमारी मैकाले आधारित और वामपंथी शिक्षा प्रणाली से  हमारा “ब्रेन वॉश” होने का दुष्परिणाम  है।

धर्मनिरपेक्ष(?) सरकारों और वामपंथी इतिहासकारों का यह रवैया शर्मनाक तो है ही, देश के नौनिहालों का आत्म-सम्मान गिराने की एक साजिश भी है। जिन योद्धाओं ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ़ बहादुरी से युद्ध लड़े और देश के एक बड़े हिस्से में अपना राज्य स्थापित किया उनका सम्मानजनक उल्लेख न करना, उनके बारे में विस्तार से बच्चों को न पढ़ाना, उन पर गर्व न करना एक विकृत समाज के लक्षण हैं, और यह काम कांग्रेस और वामपंथियों ने बखूबी किया है।

मैडम सोनिया गांधी से लेकर केजरीवाल, मुफ़्ती, ओमर अब्दुल्लाही, ग़ुलाम नबी आज़ाद, मुलायम, नितीश, लालू आदि से पूछना चाहिए कि पृथ्वीराज चौहान कौन था ? ये जिहादी ईसाइयत सेक्युलर सिर्फ बाबरी ढांचे के छाती ग्रस्त होने और अफज़ल गुरु के लिए आंसू बहाना  ही जानते हैं। छल कपट से या बन्दूक  की  नोंक पर हिन्दुओं का धर्मान्तरित होना उन्हें पसंद है।  महात्मा गांधी की अफ्रीका से घर वापसी का हमने सम्मान किया पर धर्मान्तरित हिन्दुओं की घर वापसी का उन्हें विरोध है।

Rahul saluted Babar’s tomb; Prithviraj Chauhan’s mortal remains is hit by shoe in Afghanistan: Bring back Vajra-honour of India?

दधीचि की हड्डियों को वीरता का सूचक मान कर  भारत के सर्वोच्च पुरस्कार “वज्र” के रूप में “परम वीर चक्र” पर एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल हम कर रहे हैं। अफगानिस्तान से भारत के वज्र-सम्मान कौन कब वापस लाएगा ?

सिरसा, हरियाणा के एडवोकेट पवन पारीक द्वारा  5 नवम्बर 2014 को प्रस्तुत आरटीआई के उत्तर में सोनिआ गांधी द्वारा निर्देशित सरकार के पीएमओ ने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कहीं।  लेकिन 19 जनवरी, 2015 को पवन पारीक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। महज 10 दिन के भीतर पीएमओ से इस बारे में पत्र आ गया। पत्र में भारत सरकार ने काबुल दूतावास को निर्देश देकर अस्थियों के संबंध में जरूरी निर्देश दिए।

राजस्थान की आन, बान और शान के प्रतीक पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां भारत लौटेंगी। अफगानिस्तान से भारत अपना खोया हुआ सम्मान वापस लेकर आएगा।प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद अब पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां लौटने की आस जगी है। यह आस कब पूरी होगी?

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Accursed & Jihadi Neighbur

Accursed (Sunanda) & Jihadi Neighb (Pakistan)

Language: English Size: 9”x5.5” Pages 202

Hard bound cover

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DLF-Vadra: Bhrasht Tantra: Book in Hindi

Language: Hindi,  Size: 9”x5.5”  Pages 100

Price: Rs 50 + Courier Charges Rs. 50/-

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Behind Sindhi School,Ramsagarpara,

RAIPUR, C.G.- 492001, India.

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Ramlala ko tambu mein dekhkar kasha ki Muslim Mahilayein Ayodyavashiyon Se adhik dukhi hain

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Tags: Ramlala, Ramlala tambu mein, kasha ki mahilayein, Muslim Mahila Foundation, Ramjanm Bhumi Mandir, Hashim Anasari, Shiv Mandir

Ramlala ko tambu mein dekhkar kasha ki Muslim Mahilayein bhi dukhi hain

रामलला को तंबू में देखकर काशी की महिलाएं भी दुखी हैं

अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि विवाद को लेकर चल रहे मुकदमे के वादी हाशिम अंसारी का आगे पैरवी न करने की घोषणा के बाद बनारस में मुस्लिम महिलाओं ने रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण हेतु  नई  पहल कर चुकी  हैं।

मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की सदर नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में कई मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण कराने की अपील की और बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाशिम अंसारी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामलला को स्वतंत्र  कराने का बयान देकर हाशिम ने मुसलमानों की इज्जत बढ़ाई है।

छह दिसंबर1992 इतिहास का वह दिन है जब मंदिर और मस्जिद को लेकर दो मजहबी समुदायों के बीच लकीर खिंच गई थी। फि‍र भी समाज में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने के लिए मिसाल कायम कि‍या है। ऐसा ही एक नाम है नूर फाति‍मा, जो पेशे से वकील हैं। इन्‍होंने मुस्‍लि‍म समुदाय से ताल्‍लुक रखने के बावजूद काशी के पहाड़ी गेट के पास भगवान शि‍व का भव्‍य मंदि‍र बनवाया है, जो अमन का पैगाम देता है। यहीं नहीं, वह पांचों वक्‍त नमाज के साथ शि‍व की पूजा भी करती हैं।

नूर फातिमा ने बताया कि साल 2004 में उन्‍हें सपने में मंदिर दिखाई दि‍या, लेकि‍न इस पर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। इसी तरह कई दिनों तक वह महादेव के मंदिर और उसमें सफ़ेद माला चढ़ाकर आराधना करने का दृश्य सपने में देखती रहीं। फि‍र भी इसे भ्रम मानते हुए अनदेखी करती रहीं। फाति‍मा के अनुसार, कुछ दिनों बाद उनकी पति की एक दुर्घटना में मौत हो गई। तब उन्हें लगा कि भगवान शि‍व ने उन्हें दर्शन देकर हकीकत में आराधना को बोला था।

भास्कर में प्रकाशित  एक समाचार के अनुसार 27 नवंबर 2004 को मंदिर के लिए नूर फातिमा ने पहली ईंट अपने हाथों से रखीं। पांच महीने बाद पहाड़ी गेट के पास आठ मार्च 2005 को भगवान शिव का मंदिर बनकर तैयार हो गया। तब से लेकर आज भी नूर फातिमा रोज भगवान शि‍व को सफ़ेद फूल की माला चढ़ाकर पूजा करती हैं। उन्‍होंने बताया कि‍ भगवान और अल्लाह सब एक हैं। शांति और अमन देश में रहना चाहिए उनकी यही कामना है।

Why is still Ram Lala under tent in Ayodhya?

accursed-Ramlala

 

रामायण अखाड़ा तुलसी दास, संकट मोचन मंदिर के दिवंगत महंत वीरभद्र मिश्र और उनके मित्र डॉ. उदय शंकर दुबे के प्रयासों से चित्रमय अब इंद्रधनुषी रंगों से कोई दो सौ साल से भी ज्यादा पुरानी चित्रमय रामायण की मूल प्रति आखिर सोनारपुरा क्षेत्र के एक गृहस्थ के यहां से ढूंढ़ ली गई है।

चित्रमय रामायण की कथित मूल प्रति की अनमोल तस्वीरों में बबूल के गोंद के साथ प्रयुक्त पेवड़ी, गेरू, रामरज आदि प्राकृतिक रंगों की चमक थोड़ी मद्धम जरूर पड़ी है, मगर आकृतियों की स्पष्टता पर इससे अंतर नहीं पड़ा है। अलबमों में रामकथा के प्रसंग क्रमवार भी नहीं हैं, किंतु पूरी रामकथा इनमें संग्रहीत हैं।

फुलवारी में बैठी जानकी जी की नासिका को अलंकृत करती नथ जहां यह बताती है कि तस्वीरें सत्रहवीं-अट्ठारहवी सदी के दौर की हैं (डॉ. दुबे के अनुसार इसके पूर्व काशी के आभूषणों की श्रृंखला में नथ शामिल नहीं थी।

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Accursed & Jihadi Neighbur

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Bhagva kapadon mein Gau Katha karte Muslim Kathakar

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Bhagva kapadon mein Gau Katha karte Muslim Kathakar

गऊ कथा करते भगवा वस्त्रधारी मुस्लिम कथाकार

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वाराणसी के अस्सी घाट पर गऊ कथा करते मुस्लिम कथाकार मो. फ़ैज़ खान

कथाकार मो. फैज़ खान कहते हैं कि इस्लाम में गाय के दूध को शिफ़ा कहा गया है, गऊ मांस को बिमारी कहा गया है। शूराय हज़ कुरआन शरीफ़ में आयत 37 में कहा गया है कि नहीं पहुंचता अल्लाह के पास रक्त और मांस, खुदा के पास पहुंचता है तुम्हारा त्याग इस्लाम ये भी बताता है कि जिस देश में रहो उस देश की तहजीब का सम्मान करो और गाय का सम्मान करना ही हिन्दुस्तान की तहजीब का सम्मान करना है।

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उनकी संस्कृत निष्ठ शुद्ध हिन्दी भाषा और हिन्दू  धार्मिक वैदिक ग्रंथों पर उनकी गहराई के साथ पकड़ लोगों को अचम्भित कर रही है। गेरुआ वस्त्र, माथे पर रोली का टीका, सामने नारियल, चुनरी, गुरु को भगवान समझकर आरती और गो कशी के विरोध में शास्त्रीय परम्परा के अनुसार कथा करते ये शख्स एक नज़र में कोई हिन्दू महात्मा नज़र आते हैं।

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34 वर्षीय धर्म उपदेशक कहते हैं कि गाय सिर्फ हिंदुओं की ही माता नहीं हैं, वह विश्‍वमाता हैं। उन्‍हें जाे भी दक्षिणा मिलती है, वह उसे गायों की सेवा में लगा देते हैं।

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Ekta ki patik 400 varsh purani Mahabharat ki durlabh pandulipiyan Yahan hai

    एकता का प्रतीक

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Ekta ki patik 400 varsh purani Mahabharat ki durlabh pandulipiyan Yahan hai

हैदराबाद शहर की एक गली में इस्लामिक अध्ययन का बेहद पुराना संस्थान स्थित है जामिया निजामिया। यहां फारसी में अनुदित महाभारत तो है ही और कई दुर्लभ इस्लामिक पांडुलिपियां भी हैं।  शिब्ली गंज स्थित यह संस्थान हैदराबाद के ऐतिहासिक चारमीनार से कोई तीन किलोमीटर दूर है। इस पुस्तकालय में मौजूद महाभारत के फारसी अनुवाद वाला यह ग्रंथ 400 वर्ष से अधिक पुराना है इसके अलावा पुस्तकालय में 3,000 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां और विख्यात भारतीय और अरबी इस्लामिक विद्धानों द्वारा लिखी गई सैकड़ों साल पुरानी किताबें मौजूद हैं।

पुस्तकालय में पहुंचने से पहले यह ग्रंथ जामिया निजामिया के संस्थापक रहे मौलाना मोहम्मद अनवरुल्लाह फारुखी के निजी संग्रह में शुमार था। मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक अबुल फजल द्वारा अनुदित महाभारत की यह पांडुलीपि 5012 पृष्ठों में है। यह मौलाना मोहम्मद अनवारुल्ला फारुकी के व्यक्तिगत संग्रह में से एक है। मौलाना जामिया के संस्थापक थे और यह संस्थान दक्षिण भारत की सबसे बड़ी सेमिनरी है।

पुस्तकालय के प्रमुख फैसुद्दीन निजामी ने कहा यहां सबसे पुरानी पांडुलिपि किताब-उल-तबसेरा फिल किरातिल अशरा है जिसके लेखक मशहूर इस्लामिक अŠयेता अबू मोहम्मद म€की बिन तालिब थे. 750 वर्ष पुरानी किताब कुरान के बारे में जो तजवीद कला के साथ है दुनिया में इस मास्टरपीस की केवल दो प्रतियां ही हैं. जिसमें से एक तुर्की के खलीफा पुस्तकालय में है.

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Accursed (Sunanda) & Jihadi Neighb (Pakistan)

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Kya fir Hindu Rashtra Banega Nepal: News article at BBC

Kya fir Hindu Rashtra Banega Nepal: News article at BBC

क्या फिर हिंदू राष्ट्र बनेगा नेपाल?

सी के लाल बी बी सी में प्रकाशित अपने लेख में कहते हैं कि आधुनिक दिखने वाले नेपाली अब भी उन दिनों को याद करते हैं जब सार्वजनिक जीवन में हिंदुत्व के प्रभुत्व पर सवाल नहीं उठाए जाते थे.

नेपाल एकमात्र राजनीतिक सत्ता है जहां उच्च जाति के हिंदू (ब्राह्मण और क्षत्रिय) सबसे बड़ी संख्या में (आबादी का करीब एक तिहाई) हैं.

परन्तु सब आश्चर्य कि बात यह है कि नेपाल जब स्वतंत्र हुआ था तोा एक सौ से भी काम क्रिस्चियन वहां थे जबकि अब यह संख्या लाखों में है. स्पष्ट है कि क्रिस्चियन मिस्सोंारीएस ने वहां छल कपट से प्रलोभन देकर हिन्दुओं कोा धर्मान्तरण (Conversion) के लिए मजबूर किया था और अब भी कर रहे हैं।  ये सभी प्रायः मावोवादी बन गए हैं चीन के हस्तछेप के कारण।.

आम जीवन में हिंदू धर्म का प्रभाव अब भी कायम है. संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र के राष्ट्रपति से लेकर सड़कों पर मौजूद पुलिसकर्मियों तक- राज्य के अधिकारियों को अपनी हिंदू पहचान प्रदर्शित करने में कोई हिचक नहीं होती.

ज़्यादातर सार्वजनिक अवकाश हिंदू त्यौहारों दशहरा, दिवाली और रामनवमी पर होते हैं. सरकारी विभाग नियमित रूप से कई मंदिरों और पारंपरिक अनुष्ठानों के लिए बजट जारी करते हैं.

गाय (Cow) को मारना अब भी क़ानूनन अपराध है और धर्मांतरण पर न सिर्फ़ ऐतराज़ किया जाता है बल्कि सरकार सक्रिय रूप से इसे हतोत्साहित भी करती है.

“Cows are sacred in Nepal, and Christians are cow-eaters. Since all Westerners are Christians, they were all cow-eaters”

इस तरह नेपाल नाम के अलावा हर तरह से हिंदू बना हुआ है. और कुछ समूह ऐसे हैं जो नए संविधान में इसे नाम में भी फिर से स्थापित करना चाहते हैं.

देश के इतिहास में पहली संविधान सभा बिना सर्वोच्च कानून की घोषणा किए 2012 में भंग हो गई जिससे अंतरिम व्यवस्था में दी गई मूलभूत आज़ादी व्यवस्थागत नहीं हो पाई.

Christian Sonia was refused to enter Pashupathnath in Nepal:

देश के मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में अतिरिक्त-संवैधानिक प्रबंध के तहत जनादेश के लिए नवंबर 2013 में चुनाव करवाए गए.

इसके परिणाम काफ़ी मज़ेदार निकले. हिंदू राजशाही के तहत काम कर चुकी पार्टियों को दो तिहाई बहुमत मिला.

ऐसी पार्टी जिसने खुलकर हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना का वादा किया था और जिसका चुनाव चिन्ह पवित्र गाय था, वह दूसरे संविधान सभा चुनाव में तीसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी.

इसने हिंदूवादी शक्तियों को प्रोत्साहित किया और भारत में उग्र हिंदुत्ववादी पार्टी के नरेंद्र भाई मोदी की जीत से यह उत्साह बना रहा.

हिंदुत्व की स्वीकार्यता

भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने एक साल के अंदर नेपाल की दो बार यात्रा की है- जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने पहली बार किया है.

नेपाल की एकमात्र हिंदू राष्ट्र की चमक जून 2001 के नारायणहिती नरसंहार के बाद खोने लगी थी जब राजमहल में हुए गोलीगांड में राजशाही के तत्कालीन शासक और उसके प्रत्यक्ष उत्तराधिकारियों की हत्या कर दी गई थी.

ऐसा लगा कि शाह राजवंश ने दैवीय शक्ति खो दी थी. राजशाही उसके बाद कुछ ही सालों तक चल सकी.

अप्रैल 2006 में लोगों की इच्छा के अनुसार राजा की शक्तियों को सीमित कर दिया. साल 2007 में लागू अंतरिम संविधान ने धर्मनिरपेक्षता को मूलभूत सिद्धांत के रूप में स्थापित किया.

देश की धार्मिक पहचान के रूप में हिंदुत्व की बहाली की अब भी व्यापक स्वीकार्यता बनी हुई है. नेपाल के इतिहास पर सरसरी नज़र मारने से इस हिमालयी देश पर हिंदू धर्म के प्रभाव को समझा जा सकता है…………………..link

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Book: Accursed & Jihadi Neighbour

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Book: Accursed & Jihadi Neighbur

ISBN 978-81-930512-0-7

Language: Englishi,

Size: 9”x5.5”

Pages 202

Book in hard bound cover:  Price: Rs.150- + Courier Charges Rs. 50/-

Author: Premendra AgrawaL

Email: premendraagrawal@gmail.com

Web: http://www.newsanalysisindia.com/

DLF-Vadra: Bhrasht Tantra: Book in Hindi

Language: Hindi,

Size: 9”x5.5”

Pages 100

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Author: Premendra AgrawaL

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

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As we welcomed ghar vapsi of Mahatma Gandhi from abroad, we should also welcome ghar vapsi of converted Hindus

बीबीसी में प्रकाशित एक लेख है , जिसका शीर्षक है :’घर वापसी’ जिसने बदल दिया भारत का इतिहास

http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2015/01/150117_mahatma_gandhi_return_vivechna_tk

नौ जनवरी 1915 को जब अरबिया जहाज़ ने मुंबई के अपोलो बंदरगाह को छुआ, उस समय मोहनदास करमचंद गाँधी की उम्र थी 45 साल.

12 साल से उन्होंने अपनी जन्म भूमि के दर्शन नहीं किए थे.

(इसी प्रकार हमारे अनेक हिन्दू धर्मी लोग धर्मान्तरित हो गए प्रलोभन या अन्य प्रकार डरने के कारण और वे गांधी के सामान ही अपने हिन्दू परिवारों से दुरी बनाये रखे )

जब गाँधी जहाज़ से उतरे तो उन्होंने एक लंबा कुर्ता धोती और एक काठियावाड़ी पगड़ी पहनी हुई थी. उनसे मिलने आए लोगों ने या तो यूरोपियन सूट पहने हुए थे या फिर वो राजसी भारतीय पोशाक में थे.

( इसके विपरीत जब धर्मान्तरित हमारे लोग यूरोपियन सूट पहने हुए लोगों और विदेशी भाषा रहन सहन वालों के बीच चले गए थे )

एक स्वागत समारोह की अध्यक्षता फ़िरोज़ शाह मेहता ने की थी तो दूसरे समारोह में एक साल पहले जेल से छूट कर आए बाल गंगाधर तिलक मौजूद थे.

इसी समारोह में जब गांधी की तारीफ़ों के पुल बांधे जा रहे थे तो उन्होंने बहुत विनम्रता से कहा था, “भारत के लोगों को शायद मेरी असफलताओं के बारे में पता नहीं है. आपको मेरी सफलताओं के ही समाचार मिले हैं. लेकिन अब मैं भारत में हूं तो लोगों को प्रत्यक्ष रूप से मेरे दोष भी देखने को मिलेंगें. मैं उम्मीद करता हूं कि आप मेरी ग़लतियों को नज़रअंदाज़ करेंगे. अपनी तरफ़ से एक साधारण सेवक की तरह मैं मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित हूं.”

( इसी प्रकार घर वापसी मुहीम द्वारा लौटे हमारे लोग महात्मा गांधी जैसे ही धुषि जाहिर करते हैं तोा हिन्दू विरोधी समाचार जगत और नेताओं के पेट में दर्द खयों होने लगता है ?)

महात्मा गांधी के पौत्र और उनकी जीवनी लिखने वाले राजमोहन गांधी कहते हैं, “गोखले के कहने पर गांधी बंबई के गवर्नर विलिंगटन से मिले थे और उनके कहने पर उन्हें ये आश्वासन दिया था कि सरकार के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाने से पहले वो गवर्नर को सूचित करेंगे. शायद सरकार भी गाँधी को अपने ख़िलाफ़ नहीं करना चाहती थी, इसलिए उनके भारत आने के कुछ समय के भीतर ही उसने दक्षिण अफ़्रीका में की गई उनकी सेवाओं के लिए कैसरे-हिंद के ख़िताब से नवाज़ा था.”

 ( क्या इसका मतलब है की गांधी जी के भारत लौटने के पीछे सुभास बॉस  तथा क्रांति कारियों चन्द्र शेखर आज़ाद , भगत सिंह आदि से बैक फुट में आचुकी  ब्रिटिश हुकूमत की कोई चाल  बाजी   थी ? लार्ड मौन्टबेटन ने जानते हुए भी एडविना और नेहरू के रोमांटिक सम्बन्धो को कैसे सहन किया ? क्या ३७० धारा और कश्मीर में युद्ध विराम के पीछे माउंट बेटन का हाथ नहीं था ? इस तथ्य का रहष्योद्घाटन मैंने अपनी angreji में लिखी ोुस्तक के अध्याय ५ में किया है।  पुस्तक का नाम है ” एक्कारसेड एंड जिहादी नेबर”.

गमछा नुमा धोती ही सिर्फ पहनने वाले साधु जैसे महात्मा गांधी को पाश्चात्य सभ्यता वाले नेहरू ही कैसे पसंद आये ? मौलाना आज्ज़द से लेकर सरदार पटेल तक की पीठ में छुरा नेहरू के लिए किस अहिंसावादी ने भोंका था? )

गांधी ने गोखले की सलाह का पालन करते हुए पहले भारत के लोगों को जानने की कोशिश शुरू की. उन्होंने तय किया कि वो पूरे भारत का भ्रमण करेंगे और वो भी भीड़ से भरे तीसरे दर्जे के रेल के डिब्बे से.

( इसका मतलब यह हुआ कि वे भारत की आजादी के उद्देश्य से लौटे नहीं थे। )

गोखले के शोक समारोह में भाग ले कर वो वापस शांति निकेतन लौटे जहां टैगोर ने उन्हें पहली बार महात्मा शब्द से संबोधित किया. वहां से वो बनारस गए. वहां पर उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दक्षिणा देने से इंकार कर दिया.

एक पंडे ने उनसे कहा, “भगवान का ये अपमान तुझे सीधे नर्क में ले जाएगा.” इसके बाद गाँधी तीन बार बनारस गए लेकिन उन्होंने एक बार भी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन नहीं किए.

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newsanalysisindia @newsanalysisind · Jan 16

Fake Gandhians hurt over government’s silence over divisive forces? http://hindunet.org/hvk/articles/0906/29.html …

Media published news of Jan 18, 2015: Witnessing the danger of India’s unity in diversity and the spirit of co-existence getting affected, some Gandhians have expressed their disappointment over the government’s silence in such a state of affairs.

In a joint statement, the Gandhians have said while on one hand the government appears to be celebrating “100 years of Gandhi’s homecoming”, on the other hand some fringe groups or individuals linked to the same government are engaged in a ‘homecoming’ of a different sort.