GST rate cut, talks on for shift to two-rate: Javed Akhtar Farooq Abdullah for Mugal Akbar, Aurangjeb, Taimoor Jayanti as Tipu..

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If Malaysian PM is not descendant of Converted Last Hindu king Vijayan then How Babar-Aurangjeb could be ancestors of Indian Muslims ?

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Editorial in Lok Shakti Daily Jan 08: Akhilesh following Mugal tradition due to Mugle Azam Khan..

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दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को 1526 ई. में पराजित कर बाबर ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की।
हुमायूं (1530 ई.-1556 ई.) , उसके बेटे अकबर (1556 ई. – 1605 ई.) मुग़ल बादशाह बने। लव जिहाद का प्रारम्भ अकबर से शुरू हुआ जो अभी भी जारी है। यह लव जिहाद उचित है या अनुचित इस विषय पर हम नहीं जा रहे हैं।

गाँधी डायनेस्टी के सदस्य  भी इस परंपरा का निर्वाह कर फेक प्सयडो सेकुलरिज्म को परिभाषित करते हुए अपने आप को गौरवान्वित महशूस करते हैं।
जहाँगीर (1605 ई.- 1627 ई.) के बाद शाहजहाँ (1627 ई. 1658 ई.) का नाम आता है मुग़ल बादशाहों के क्रम में। शाहजहाँ (खुर्रम) का जन्म 1592 मेँ जहाँगीर की पत्नी जगत गोसाईं से हुआ। अर्थात अकबर के बेटे जहांगीर ने भी लव जिहाद परंपरा को बदतसूर जारी रखा।

जहाँगीर की मृत्यु के समय शाहजहाँ दक्कन south में था। जहाँगीर की मृत्यु के बाद नूरजहाँ ने लाहौर मेँ अपने दामाद शहरयार को सम्राट घोषित कर दिया। जबकि आसफ़ खां ने शाहजहाँ के दक्कन से आगरा वापस आने तक अंतरिम व्यवस्था के रुप मेँ खुसरो के पुत्र द्वार बक्श को राजगद्दी पर आसीन किया।

शाहजहाँ ने दिल्ली मेँ लाल किला और जामा मस्जिद का निर्माण कराया और आगरा मेँ अपनी पत्नी मुमताज महल की याद मेँ ताजमहल बनवाया जो कला और स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करते हैं। शाहजहाँ के शासन काल मेँ सिक्खोँ के छठे गुरु हरगोविंद सिंह से मुगलोँ का संघर्ष हुआ।
शाहजहाँ ने अपने सभी भाइयो एवम सिंहासन के सभी प्रतिद्वंदियोँ तथा अंत मेँ द्वार बक्श की हत्या कर 24 फरवरी 1628 मेँ आगरा के सिंहासन पर बैठा।

गद्दी के लिए अपने परिवार के लोगों की हत्याएं करने का दौर यहाँ से प्रारम्भ होता है।

इस परंपरा का निर्वाह वाड्रा छल कपट से महात्मा गाँधी के अहिंसा सिद्धांत पर अपनी सास मदर इन लॉ की सलाह पर उस मुग़ल परंपरा पर चले और मुगले आज़म खां की संगत कर किस प्रकार से उसी मुग़ल परम्परा का निर्वाह अखिलेश यादव कर रहे हैं अपने पिता मुलायम सिंह यादव सपा के संस्थापक (जिन्हें कुछ लोग मुल्ला मुलायम भी कहते हैं ) को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा कर- यह पब्लिक है सब जानती है …

शाहजहाँ के पुत्र दारा ने भगवत गीता और योगवासिष्ठ का फारसी मेँ अनुवाद करवाया था। शाहजहाँ ने दारा को शाहबुलंद इकबाल की उपाधि से विभूषित किया था। दारा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य वेदो का संकलन है, उसने वेदो को ईश्वरीय कृति माना था। दारा सूफियोँ की कादरी परंपरा से बहुत प्रभावित था।

सितंबर 1657 ई. में शाहजहाँ के बीमार पड़ते ही उसके पुत्रों के बीच उत्तराधिकार के लिए युद्ध प्रारंभ हो गया। शाहजहाँ के अंतिम आठ वर्ष आगरा के किले के शाहबुर्ज मेँ एक बंदी की तरह व्यतीत हुए। शाहजहाँ दारा को बादशाह बनाना चाहता था किन्तु अप्रैल 1658 ई. को धर्मत के युद्ध मेँ औरंगजेब ने दारा को पराजित कर दिया। सामूगढ़ के युद्ध मेँ दारा की पराजय का मुख्य कारण मुसलमान सरदारोँ का विश्वासघात और औरंगजेब का योग्य सेनापतित्व था।

सामूगढ़ की विजय के बाद औरंगजेब ने कूटनीतिक से मुराद को बंदी बना लिया और बाद मेँ उसकी हत्या करवा करवा दी।औरंगजेब और शुजा के बीच इलाहाबाद खंजवा के निकट जनवरी 1659 मेँ एक युद्ध हुआ जिसमें पराजित होकर शुजा अराकान की और भाग गया।

शाहजहां को उसके नकली नहीं वास्तविक बेटे औरंजेब ने कैद कर ताजमहल में रखा. वहीँ शाहजहां की मृत्यु हुई। शाहजहाँ की मृत्यु के उपरांत उसके शव को ताज महल मेँ मुमताज महल की कब्र के नजदीक दफनाया गया था। औरंगजेब एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसका प्रमुख लक्ष्य भारत मेँ दार-उल-हर्ष के स्थान पर दार-उल-इस्लाम की स्थापना करना था।

औरंगजेब ने सिक्खोँ के नवें गुरु तेग बहादुर की हत्या करवा दी। औरंगजेब ने 1663 ई. मेँ हिंदुओं पर तीर्थ यात्रा कर लगाया। 1668 ई. मेँ हिंदू त्यौहारोँ और उत्सवों को मनाने जाने पर रोक लगा दी। औरंगजेब के आदेश द्वारा 1669 ई. में काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा का केशवराय मंदिर तथा गुजरात का सोमनाथ मंदिर को तोड़ा गया।औरंगजेब ने 1679 ई. मेँ हिंदुओं पर जजिया कर आरोपित किया।
अंत में यहाँ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सच्चाई का उल्लेख करना आवश्यक है : सके शासनकाल मेँ हिंदू अधिकारियो की संख्या संपूर्ण इतिहास मेँ सर्वाधिक (एक तिहाई) रही। इसके बावजूद हिंदुओं पर अत्याचार उसके शासनकाल में सर्वाधिक हुए। इस परंपरा का निर्वाह कांग्रेस ने अपने ६० वर्षों के शाशन में किया है।

सबका” साथ, सबका विकास: एकजुटता से समग्र विकास” अर्थात सबकुछ १२५ करोड़ भारतियों की मदद से १२५ करोड़ का विकास करने का मोस्ट सेक्युलरिस्ट सिद्धांत अभी की मोदी गवर्नमेंट का है।
फिर भी मीडिया के कुछ साथी अभी भी कांग्रेस और उसकी साथी पार्टियों को सेक्युलर और भारतीय जनता पार्टी को , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सांप्रदायिक कहते हैं। अवार्ड रिटर्न करने का नाटक छद्म सेकुलरिज्म का जामा पहन कर किया गया था, बिहार इलेक्शन के समय मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए। वही अब हो रहा है पर अब लोग समझ गए हैं कौन सेक्युलर है और कौन सांप्रदायिक।

——— प्रेमेन्द्र अग्रवाल

premendaagrawal@gmail.com

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Silent Assassins of Lal Bahadur Shastri, Jan 11-1966

Accursed & Jihadi Neighbour

राष्ट्रीय एकता

डी एल एफ – वाड्रा : भ्रष्ट तंत्र 

SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Ayodhya ke Uttar Pradesh mein Ramayan hogi ya Muglayan?

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अयोध्या के यू पी में रामायण होगी या मुगलायन?

परिवारवादी सोच वाले समाजवादियों का कहना था कि ‘जिसने कभी न झुकना सीखा, उसका नाम मुलायम है’ और ‘धरती पुत्र मुलायम सिंह’ जैसे नारों के बीच सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में मचे घमासान का शनिवार को जिस तरह हुए नाटकीय पटाक्षेप के बाद आपातकालीन अधिवेशन में मुलायम की जगह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ताजपोशी हुई उससे तो यही सिद्ध होता है कि ‘धरती पुत्र’ कहे जाने वाले मुलायम सिंह बुढापे में शाहजहाँ बन गए हैं और उनके बेटे औरंगजेब ने उनका ताज छीनकर खुद पहन लिया है।

स पा के गृह कलह का प्रारम्भ – गाजियाबाद 5 सितंबर। आला हजरत हज हाउस का उद्घाटन समारोह: 2005 में जिस हज हाउस का सीएम रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने शिलान्यास किया था उसके उद्घाटन समारोह में उनकी तस्वीर नदारद थी जबकि वहां बड़े-बड़े पोस्टरों में अखिलेश और यूपी मंत्री मुगलेआजम खान की तस्वीरें नजर आ रही थीं।

जहां कई अन्य पार्टियों के नेताओं जैसे करुणानिधि, एचडी देवगौड़ा और प्रकाश सिंह बादल ने कुर्सी पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी वहीं मुलायम ने 2012 में खुद बैकसीट पर जाते हुए अखिलेश को कमान सौंप दी और बीटा भस्मासुर बन गया।

स्थानीय विधायक अंशु मलिक ने सबके सामने पूछा कि समारोह से मुलायम सिंह की तस्वीरें गायब क्यों हैं। मुलायम के करीबियों ने कहा कि वह अखिलेश कैंप की इस गुस्ताखी को हल्के में नहीं लेने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुलायम ने अपने करीबियों से कहा कि वह भले ही पुत्र प्रेमी और विनम्र पिता हैं लेकिन वह शाहजहां बनने के लिए तैयार नहीं हैं। मुलायम का इशारा मुगल बादशाह शाहजहां की तरफ था जो दारा शिकोह को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे लेकिन उसके छोटे बेटे औरंगजेब ने गद्दी पर कब्जा करने के लिए बंधक बना लिया था।

2 नवम्बर 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी जिसमें लगभग 16 कारसेवकों की जान चली गई थी . जब उनसे पूछा गया था कि क्या आप भारत में मुगलराज लाना चाहते हैं तो उन्होंने कहा था कि मुगलराज में क्या बुराई है, आ जाए तो वो भी सही है। अब बेचारे खुद शाहजहाँ बन गए हैं और उनके हाथों से अखिलेश से पॉवर छीन ली है, मुलायम सिंह एकाएक पॉवरलेस हो गए हैं, अगर वे अखिलेश का विरोध करेंगे या हाँथ पाँव मारेंगे तो शाहजहाँ की तरह ही घर में बंधक बना दिए गए हैं, शाहजहाँ तो तो औरंगजेब ने दीवार में चुनवा दिया था।

yahan yah ullekh karna avashyak hai ki पिछले दिनों सपा नेता मुलायम सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान 1990 में निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाने के दिए गए आदेश पर सार्वजनिक रूप से दु:ख व्यक्त किया था ।

मुलायम सिंह द्वारा अयोध्या – गोली कांड पर दु:ख करने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि मुलायम सिंह का हृदय -परिवर्तन हुआ है और वे लगभग 25 वर्ष बाद पश्चाताप कर रहे हैं। मुलायम सिंह यादव द्वारा यह कहना कि गोली चलाने का आदेश देने के सिवा कोई विकल्प नहीं था; यह सरासर गलत है। उन दिनों गोली – कांड का प्रत्यक्षदर्शी रहे पत्रकार रामकुमार भ्रमर ने अपनी पुस्तक अयोध्या का पथिक में यह स्पष्ट उल्लेख किया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा विश्व हिन्दू परिषद द्वारा घोषित 30 अक्टूबर 1990 की कारसेवा को रोकने के लिए चारों तरफ घेराबन्दी की गई थी।

जिससे उत्साहित होकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अयोध्या में परिन्दा भी पर नहीं मार सकता। लेकिन विहिप द्वारा घोषित कारसेवा तय समय और तिथि पर सफलतापूर्वक हुई थी जिसके कारण मुलायम सिंह यादव की हर तरफ आलोचना हो रही थी जिससे वे बहुत क्षुब्ध हुए थे और उन्होंने ही गोली चलाने का आदेश दिया था। ध्यान देने योग्य है कि यह गोली कांड लाल कोठी के पास संकरी गली में हुआ था। माणिकराम छावनी से दो विभिन्न गुटों में कारसेवक रामजन्मभूमि जाने के लिए निकले थे । एक गुट साध्वी उमा भारती के नेतृत्व में संकीर्तन करता हुआ लखनऊ – गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए बढ़ रहा था और दूसरा गुट राजस्थान के प्रो. महेन्द्रनाथ अरोडा के नेतृत्व में बढ़ रहा था और इसी गुट के लालकोठी पर पहुँचते ही प्रशासन द्वारा गोली चला दी गई। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय के अनुसार कारसेवकों के कनपटी पर बन्दूक रखकर गोली मारी गई थी। यद्यपि भीड को तितर – बितर करने के लिए प्रशासन की तरफ से आँसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं, पानी की बौछार की जाती है, लाठी चार्ज किया जाता है परंतु यहाँ तो पकड़कर कनपटी पर बन्दूक रखकर गोली मारी गई थी।

 गरीब को नचा रहे थे पांच साल, अब पूरा परिवार नाच रहा है कमाल…

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भारत में हिंदू धर्म के लोग मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को अपना भगवान और उनके जीवन पर लिखी गई ‘रामायण’ को अपना धार्मिक ग्रंथ मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुल्ला मुलायम शाहजहां के शहजादे औरंगजेब अखिलेश सरकार की वोट बैंक पॉलिटिक्स की वजह से राम लीला पर पत्थर फेंके जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अक्टूबर २०१३ को कुछ शरारती तत्वों ने शुक्रवार रात रामलीला के दौरान पथराव किया, जिसके बाद रामलीला स्थल पर अफरा-तफरा मच गई थी। पत्थर लगने से एक महिला घायल हो गई थी। क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण हो गया था। पूरे इलाके में अर्धसैनिक बलों और पुलिस की तैनाती कर दी गई थी। कवाल वही गांव है, जहां उसी वर्ष 27 अगस्त को छेड़खानी की एक घटना को लेकर हुए विवाद में 3 लोगों की मौत के बाद पूरे जिले में हिंसा भड़क गई थी और 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

Stone throwing at Ramlila Muzaffarnagar vs “Do you also have a Ramayana in India?” Indonesian Muslim Women asked

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दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाले देश में भी लोग ‘रामायण‘ के बेहद दीवाने हैं। इस देश में भी अयोध्या है और यहां के मुस्लिम भी भगवान राम को अपने ‘जीवन का नायक‘ और रामायण को अपने दिल के सबसे करीब मानते हैं।

इंडोनेशिया नामक इस देश की आबादी तकरीबन 23 करोड़ है। यह दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश है और साथ ही सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश भी है। साल 1973 में यहां की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मलेन का आयोजन किया था। ये अपने आप में काफी अनूठा आयोजन था क्योंकि घोषित तौर पर कोई मुस्लिम राष्ट्र पहली बार किसी और धर्म के धर्मग्रन्थ के सम्मान में इस तरह का कोई आयोजन करा रहा था।
इसी वर्ष दो माह पूर्व विगतअक्टूबर में इंडोनेशिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत की कई जगहों पर इंडोनेशिया की रामायण पर आधारित रामलीला का मंचन करवाने की मांग की थी। यही नहीं इंडोनेशिया ने मोदी सरकार से हर साल रामायण पर्व के आयोजन की भी मांग की।
भारत की तरह ही इंडोनेशिया में रामायण सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य ग्रंथ है ।इंडोनेशिया की रामायण 26 अध्यायों का एक विशाल ग्रंथ है। इस रामायण में प्राचीन लोकप्रिय चरित्र दशरथ को विश्वरंजन कहा गया है, जबकि उसमें उन्‍हें एक शैव भी माना गया है, यानी की वे शिव के अराधक हैं। इंडोनेशिया की रामायण का आरंभ भगवान राम के जन्म से होता है, जबकि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण के प्रस्थान में समस्त ॠषिगणों की ओर से मंगलाचरण किया जाता है और दशरथ के घर इस ज्येष्ठ पुत्र के जन्म के साथ ही हिंदेशिया का वाद्य यंत्र गामलान बजने लगता है। यहां नौ सेना के अध्यक्ष को लक्ष्मण कहा जाता है। जबकि सीता को सिंता और हनुमान तो इंडोनेशिया के सर्वाधिक लोकप्रिय पात्र हैं। बता दें कि हनुमान को इंडोनेशिया में ‘अनोमान’ कहा जाता है।