No hanging for burning Karsevaks? Rahul Gandhi digs pit for himself..

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Mein Hindu Aur Muslim Donon Huun: Salman khan

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Rashtriya Ekta : Cover Pages

Anukram : Contents

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106

मैं हिन्दू और मुस्लिम दोनों हूँ: सलमान खान

सम्पादक

1

जोधपुर। सलमान जब कोर्ट पहंुचे तो वहां किसी अन्य मामले की सुनवाई चल रही थी। इंतजार में सलमान कोर्ट के एक कोने में खड़े हो गए। थोड़ी देर बाद उनके मामले की सुनवाई षुरू हुई तो वह जज अनुपमा बिजलानी के सामने आए और सिर झुकाकर अभिवादन किया।

जज अनुपमा बिजलानी ने सलमान खान से पूछा – आपकी जाति क्या है? उन्होंने अदालत, अपने वकील
,और अंगरक्षकों को हैरानी भरी निगाहों से देखा और कुछ सेकेंड बाद अदालत में किसी ने उन्हें सुझााया कि वह मुस्लिम बताएं। लेकिन सलमान ने जवाब दिया – मैं हिन्दू और मुस्लिम दोनों हूँ: मैं भारतीय हूँ , फिर कोर्ट ने पूछा कि भारतीय तो सभी हैं, तो सलमान ने जवाब दिया कि, मेरी मां हिंदू है, पिता मुस्लिम हैं, इसलिए मैं इंडियन हूं,

मजिस्ट्रेट              – क्या नाम है?

सलमान                – सलमान सलीम खान

मजिस्ट्रेट              – पिता का नाम?

सलमान                – सलीम

मजिस्ट्रेट              – आपकी उम्र?

सलमान                – 49 साल

मजिस्ट्रेट              – पता?

सलमान                – मुंबई में रहता हंू।

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107

मजिस्ट्रेट              – पूरा पता बताओ?

सलमान                – गैलेक्सी अपार्टमेंट, (धीरे से रोड का नाम लिया और फिर बोले) मुंबई-5

मजिस्ट्रेट              – क्या काम करते हो?

सलमान                – एक्टर हंू।

मजिस्ट्रेट              – आपकी कास्ट?

सलमान                – (इधर-उधर देखते रहे। चेहरे के भाव भी ऐसे थे जैसे कुछ नहीं समझे। इस बीच उनके वकील श्रीकांत षिवदे ने कहा योर कॉस्ट। पीछे से कोई बोला मुस्लिम, लेकिन सलमान चुपचाप खड़े रहे। इस पर ष्विदे ने एक बार फिर कहा अपनी जाति बताओ) इसके बाद सलमान ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम बोथ (दोनों) हैं। पिता मुस्लिम और मां हिंदू।

बता दें कि सलमान के पिता और स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान ने साल 1964 में सुषीला चरक से षादी की थी। सुषीला का जन्म मराठी हिंदू परिवार में हुआ था। सलीम खान से षादी के लिए उन्होंने इस्लाम कुबूल करते हुए अपना नाम सलमा रख लिया था। हालांकि, सलीम खान की दूसरी पत्नी हेलन धर्म से क्रिष्चियन हैं।

घर को मिनी इंडिया कहते हैं सलमान खान

सलमान खान के बारे में कहा जाता है कि वे अपने घर को मिनी इंडिया कहतक हैं। दरअसल, वे ऐसा इसलिए कहते हैं, क्योंकि उनके परिवार में हिंदू, मुस्लिम और क्रिष्चियन सभी धर्मो के लोग हैं और सभी एक ही छत के नीचे रहते हैं।

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Cong divides people on Hindu-Muslim & caste Line: Haridwar Student’s arrest for terror links

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Prithviraj Chauhan ki asthiyan: Bharat kaa vajra samman vapas layen

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Prithviraj Chauhan ki asthiyan: Bharat kaa vajra samman vapas layen

पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां: भारत का वज्र-सम्मान वापस लायें

मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की ओर से मोदी को भेजे गए खत में कहा गया है, ‘बाबर विदेशी और मंगोल आक्रमणकारी था। यह चंगेज खां और हलाकू जैसे मंगोलों का वंशज था जिन मंगोलो ने दुनिया के कई शहर उजाड़़ दिए, लाखों लोगों का कत्ल किया। बाबर के पूर्वज हलाकू ने बगदाद पर आक्रमण कर 40 हजार मुसलमानों के साथ साथ पैगम्बर द्वारा नियुक्त इस्लाम के सर्वोच्च धर्मगुरु खलीफा की भी हत्या कर दी थी। इसी हलाकू की वजह से आज दुनिया में इस्लाम का कोई खलीफा नहीं है।’

Ramlala ko tambu mein dekhkar kasha ki Muslim Mahilayein Ayodyavashiyon Se adhik dukhi hain
पत्रक में आगे लिखा है, ‘कोई भी मुसलमान मंगोलों को कभी माफ नहीं कर सकता। इन्हीं मंगोलों के वंशज बाबर ने 1528 में राम मंदिर तोड़कर हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत का बीज बोया। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की सदर ने कहा कि मुसलमानों की इज्जत तभी बढ़ेगी जब वे श्री राम के पक्ष में रहेंगे। जो लोग मंदिर निर्माण के विरोधी हैं वे मुसलमानों को हमेशा गरीब और पिछड़ा बनाए रखना चाहते हैं।’

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पारिवारिक इतिहास के अनुसार हलाकू खान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज खां का पोता और उसके चौथे पुत्र तोलुइ खान का पुत्र था। हलाकू की माता सोरगोगतानी बेकी (तोलुइ खान की पत्नी) ने उसे और उसके भाइयों को बहुत निपुणता से पाला और परवरिश की। उसने परिस्थितियों पर ऐसा नियंत्रण रखा कि हलाकू बचपन में ही एक बडा लड़ाकू और खतरनाक योद्धा बन गया। आगे चलकर वह अपने बलबूते पर मंगोलों का चीन और रूस सहित किर्गीस्तान, उजबेकिस्तान और ईरान अफगानिस्तान तक एक बड़ा साम्राज्य स्थापित कर लिया। हलाकू खां की पत्नी दोकुज खातून एक नेस्टोरियाई ईसाई थी और हलाकू के इलखानी साम्राज्य में बौद्ध और ईसाई धर्म को बढ़ावा दिया जाता था। दोकुज खातून ने बहुत कोशिश की कि हलाकू भी ईसाई बन जाए लेकिन वह मरते दम तक बौद्ध धर्म का अनुयायी ही रहा।

Hulagu was friendly to Christianity. Hulagu’s favorite wife, Doquz Khatun, was also a Christian, as was his closest friend and general, Kitbuqa. It is recorded however that he converted to Buddhist as he neared death, against the will of Dokuz Khatun.

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Hulagu and Queen Doquz Qatun depicted as the new “Constantine andHelen“, in a Syriac Bible.[12][13]

बगदाद का विनाश नवम्बर 1257 ईस्वी हुआ, जब ईराक में हलाकू की 10 लाख मंगोल फौज ने बगदाद की तरफ कूच किया, जहां से खलीफा अपना इस्लामी राज चलाते थे। वहां पहुंचकर उसने अपनी सेना को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा जो शहर से गुजरने वाली दजला नदी (टाइग्रिस नदी) के दोनों किनारों पर आक्रमण कर सकें। उसने खलीफाओं से आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन खलीफाओं ने मना कर दिया। खलीफाओं की सेना ने हलाकू के कुछ योद्धाओं को खदेड़ दिया, लेकिन अगली मुठभेड़ में खलीफा फौज हार गई। मंगोलों ने खलीफा की सेना के पीछे के नदी के बांध को तोड़ दिए जिससे से बहुत से खलीफाई सैनिक डूब गए और बाकियों को मंगोलों ने आसानी से मार डाला।

अरब के खलीफा पर क्या बीती, इस पर दो अलग-अलग वर्णन मिलते हैं। यूरोप से बाद में आने वाले यात्री मार्को पोलो के अनुसार उसे भूखा-प्यासा मारा गया। लेकिन उससे अधिक विश्वसनीय बात यह है कि मंगोल और मुस्लिम स्रोतों के अनुसार उसे एक कालीन में लपेट दिया गया और उसके ऊपर से तब तक घोड़े दौड़ाए गए जब तक उसने दम नहीं तोड़ दिया। अरब देशों पर कब्जा जमाने के बाद सन 1260 में उसने भारत पर आक्रमण की योजना बनाई, लेकिन भारी-भरकम फौज को लम्बे रास्ते तय करने की कठिनाई के कारण और उत्तर भारत के मौसम की मार के चलते वह रास्ते में ही बीमारी का शिकार हो गया और स्वास्थ्य लाभ के लिए वापस मंगोलिया लौट गया । लेकिप यहां पहुंचकर रहस्यमय ढंग से 1265 में उसकी मौत हो गई। अब उसके बाद उसके कबीले यूरोप के कई प्रान्तों में फैल गए लेकिन तिब्बत, कोरिया और चीन उनके पसंदीदा स्थल रहे।

क्या राजस्थान की आन, बान और शान के प्रतीक पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां भारत लौटेंगी?

अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहरी इलाके में आज भी पृथ्वीराज की समाधि मौजूद है। पृथ्वीराज की समाधि का अपमान कर रहे हैं अफगानी।
‘आर्म्स एंड आर्मर: ट्रेडिशनल वेपंस ऑफ इंडिया’ नाम की किताब लिखने वाले ई जयवंत पॉल के मुताबिक, अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहरी इलाके में मौजूद पृथ्वीराज की समाधि आज बहुत ही बुरी हालत में है। गोरी की मौत के 900 साल बाद भी अफगानिस्तानी और पाकिस्तानी उसे अपना ‘हीरो’ मानते हैं। ये लोग गोरी की मौत का बदला लेने के लिए अपना गुस्सा पृथ्वीराज की समाधि पर निकालते हैं। पॉल की किताब के मुताबिक पृथ्वीराज की मजार के ऊपर एक लंबी मोटी रस्सी लटकी हुई है। कंधे की ऊंचाई पर इस रस्सी में गांठ लगी हुई है। स्थानीय लोग रस्सी की गांठ को एक हाथ में पकड़कर मजार के बीचोबीच अपने पैर से ठोकर मारते हैं।

भारत का वज्र-सम्मान वापस लाओ?

पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों की समाधी के बाजू में बाबर की कब्र है। राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और मनमोहन सिंह, नटवर सिंह और राहुल गांधी ने 2006 में अफगानिस्तान की यात्रा की थी।

तीनों नेताओं ने सेक्युलर ब्लैंकेट ओढ़ कर बाबर की कब्र को सलाम कर सम्मान दिया परन्तु बगल में पृथ्वीराज चौहान की छतिग्रस्त समाधी को देखने तक उचित नहीं समझा क्योंकि उन्हें डर था ऐसा करने से उनकी सेक्युलर छवि छतिग्रस्त हो जाएगी। क्या ये नेता  महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य मंत्री कांग्रेस के नेता  पृथ्वीराज चौहान को  भूल सकते हैं ?

चंद बरदायी ने चार बाँस चौबीस गज अंगुल अष्‍ठ प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको रे चौहान दोहे द्वारा पृथ्वीराज को संकेत दिया जिस पर अंधे पृथ्वीराज ने ग़ौरी को शब्दभेदी बाण से मार गिराया तथा इसके पश्चात दुश्मन के हाथ दुर्गति से बचने के लिए दोनों ने एक-दूसरे का वध कर दिया।

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बाबर एक आक्रमणकारी था। लेकिन वोट बैंक नेताओं और मुगले आज़मखानों के लिए विदेशी आक्रांता सेक्युलर और इन्हें रोकने इनसे लोहा लेने वाले इन आक्रान्ताओं के दन्त खट्टे करने तोड़ने वाले हिन्दू राजा कम्युनल हो गए हैं। अन  सी इ आर टी -इग्नू बुक्स में पृथ्वीराज चौहान को कायर कहा गया है? इन बुक्स में सिख गुरुओं और हिन्दू देवी देवताओं की इंसल्ट की गई है। भगत सिंह को देशद्रोही बताया गया है? भाजपा सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अब उन्हें सही करना होगा।

बाहर से आये हुए आक्रांताओं के गुणगान करना और यहाँ के राजाओं को हास्यास्पद और विकृत रूप में पेश करना जवाहर लाल नेहरू और हमारी मैकाले आधारित और वामपंथी शिक्षा प्रणाली से  हमारा “ब्रेन वॉश” होने का दुष्परिणाम  है।

धर्मनिरपेक्ष(?) सरकारों और वामपंथी इतिहासकारों का यह रवैया शर्मनाक तो है ही, देश के नौनिहालों का आत्म-सम्मान गिराने की एक साजिश भी है। जिन योद्धाओं ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ़ बहादुरी से युद्ध लड़े और देश के एक बड़े हिस्से में अपना राज्य स्थापित किया उनका सम्मानजनक उल्लेख न करना, उनके बारे में विस्तार से बच्चों को न पढ़ाना, उन पर गर्व न करना एक विकृत समाज के लक्षण हैं, और यह काम कांग्रेस और वामपंथियों ने बखूबी किया है।

मैडम सोनिया गांधी से लेकर केजरीवाल, मुफ़्ती, ओमर अब्दुल्लाही, ग़ुलाम नबी आज़ाद, मुलायम, नितीश, लालू आदि से पूछना चाहिए कि पृथ्वीराज चौहान कौन था ? ये जिहादी ईसाइयत सेक्युलर सिर्फ बाबरी ढांचे के छाती ग्रस्त होने और अफज़ल गुरु के लिए आंसू बहाना  ही जानते हैं। छल कपट से या बन्दूक  की  नोंक पर हिन्दुओं का धर्मान्तरित होना उन्हें पसंद है।  महात्मा गांधी की अफ्रीका से घर वापसी का हमने सम्मान किया पर धर्मान्तरित हिन्दुओं की घर वापसी का उन्हें विरोध है।

Rahul saluted Babar’s tomb; Prithviraj Chauhan’s mortal remains is hit by shoe in Afghanistan: Bring back Vajra-honour of India?

दधीचि की हड्डियों को वीरता का सूचक मान कर  भारत के सर्वोच्च पुरस्कार “वज्र” के रूप में “परम वीर चक्र” पर एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल हम कर रहे हैं। अफगानिस्तान से भारत के वज्र-सम्मान कौन कब वापस लाएगा ?

सिरसा, हरियाणा के एडवोकेट पवन पारीक द्वारा  5 नवम्बर 2014 को प्रस्तुत आरटीआई के उत्तर में सोनिआ गांधी द्वारा निर्देशित सरकार के पीएमओ ने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कहीं।  लेकिन 19 जनवरी, 2015 को पवन पारीक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। महज 10 दिन के भीतर पीएमओ से इस बारे में पत्र आ गया। पत्र में भारत सरकार ने काबुल दूतावास को निर्देश देकर अस्थियों के संबंध में जरूरी निर्देश दिए।

राजस्थान की आन, बान और शान के प्रतीक पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां भारत लौटेंगी। अफगानिस्तान से भारत अपना खोया हुआ सम्मान वापस लेकर आएगा।प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद अब पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां लौटने की आस जगी है। यह आस कब पूरी होगी?

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