Kargil Villain run away due to protest against him at Nobel Peace Center: Yuvraj-Shahjade-Yamraj in Gorakhpur

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The dominance of Nehru-Gandhi dynasty is finished: Ramayan vs Muglayan-Romelila

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Ayodhya ke Uttar Pradesh mein Ramayan hogi ya Muglayan?

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अयोध्या के यू पी में रामायण होगी या मुगलायन?

परिवारवादी सोच वाले समाजवादियों का कहना था कि ‘जिसने कभी न झुकना सीखा, उसका नाम मुलायम है’ और ‘धरती पुत्र मुलायम सिंह’ जैसे नारों के बीच सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में मचे घमासान का शनिवार को जिस तरह हुए नाटकीय पटाक्षेप के बाद आपातकालीन अधिवेशन में मुलायम की जगह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ताजपोशी हुई उससे तो यही सिद्ध होता है कि ‘धरती पुत्र’ कहे जाने वाले मुलायम सिंह बुढापे में शाहजहाँ बन गए हैं और उनके बेटे औरंगजेब ने उनका ताज छीनकर खुद पहन लिया है।

स पा के गृह कलह का प्रारम्भ – गाजियाबाद 5 सितंबर। आला हजरत हज हाउस का उद्घाटन समारोह: 2005 में जिस हज हाउस का सीएम रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने शिलान्यास किया था उसके उद्घाटन समारोह में उनकी तस्वीर नदारद थी जबकि वहां बड़े-बड़े पोस्टरों में अखिलेश और यूपी मंत्री मुगलेआजम खान की तस्वीरें नजर आ रही थीं।

जहां कई अन्य पार्टियों के नेताओं जैसे करुणानिधि, एचडी देवगौड़ा और प्रकाश सिंह बादल ने कुर्सी पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी वहीं मुलायम ने 2012 में खुद बैकसीट पर जाते हुए अखिलेश को कमान सौंप दी और बीटा भस्मासुर बन गया।

स्थानीय विधायक अंशु मलिक ने सबके सामने पूछा कि समारोह से मुलायम सिंह की तस्वीरें गायब क्यों हैं। मुलायम के करीबियों ने कहा कि वह अखिलेश कैंप की इस गुस्ताखी को हल्के में नहीं लेने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुलायम ने अपने करीबियों से कहा कि वह भले ही पुत्र प्रेमी और विनम्र पिता हैं लेकिन वह शाहजहां बनने के लिए तैयार नहीं हैं। मुलायम का इशारा मुगल बादशाह शाहजहां की तरफ था जो दारा शिकोह को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे लेकिन उसके छोटे बेटे औरंगजेब ने गद्दी पर कब्जा करने के लिए बंधक बना लिया था।

2 नवम्बर 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी जिसमें लगभग 16 कारसेवकों की जान चली गई थी . जब उनसे पूछा गया था कि क्या आप भारत में मुगलराज लाना चाहते हैं तो उन्होंने कहा था कि मुगलराज में क्या बुराई है, आ जाए तो वो भी सही है। अब बेचारे खुद शाहजहाँ बन गए हैं और उनके हाथों से अखिलेश से पॉवर छीन ली है, मुलायम सिंह एकाएक पॉवरलेस हो गए हैं, अगर वे अखिलेश का विरोध करेंगे या हाँथ पाँव मारेंगे तो शाहजहाँ की तरह ही घर में बंधक बना दिए गए हैं, शाहजहाँ तो तो औरंगजेब ने दीवार में चुनवा दिया था।

yahan yah ullekh karna avashyak hai ki पिछले दिनों सपा नेता मुलायम सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान 1990 में निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाने के दिए गए आदेश पर सार्वजनिक रूप से दु:ख व्यक्त किया था ।

मुलायम सिंह द्वारा अयोध्या – गोली कांड पर दु:ख करने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि मुलायम सिंह का हृदय -परिवर्तन हुआ है और वे लगभग 25 वर्ष बाद पश्चाताप कर रहे हैं। मुलायम सिंह यादव द्वारा यह कहना कि गोली चलाने का आदेश देने के सिवा कोई विकल्प नहीं था; यह सरासर गलत है। उन दिनों गोली – कांड का प्रत्यक्षदर्शी रहे पत्रकार रामकुमार भ्रमर ने अपनी पुस्तक अयोध्या का पथिक में यह स्पष्ट उल्लेख किया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा विश्व हिन्दू परिषद द्वारा घोषित 30 अक्टूबर 1990 की कारसेवा को रोकने के लिए चारों तरफ घेराबन्दी की गई थी।

जिससे उत्साहित होकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अयोध्या में परिन्दा भी पर नहीं मार सकता। लेकिन विहिप द्वारा घोषित कारसेवा तय समय और तिथि पर सफलतापूर्वक हुई थी जिसके कारण मुलायम सिंह यादव की हर तरफ आलोचना हो रही थी जिससे वे बहुत क्षुब्ध हुए थे और उन्होंने ही गोली चलाने का आदेश दिया था। ध्यान देने योग्य है कि यह गोली कांड लाल कोठी के पास संकरी गली में हुआ था। माणिकराम छावनी से दो विभिन्न गुटों में कारसेवक रामजन्मभूमि जाने के लिए निकले थे । एक गुट साध्वी उमा भारती के नेतृत्व में संकीर्तन करता हुआ लखनऊ – गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए बढ़ रहा था और दूसरा गुट राजस्थान के प्रो. महेन्द्रनाथ अरोडा के नेतृत्व में बढ़ रहा था और इसी गुट के लालकोठी पर पहुँचते ही प्रशासन द्वारा गोली चला दी गई। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय के अनुसार कारसेवकों के कनपटी पर बन्दूक रखकर गोली मारी गई थी। यद्यपि भीड को तितर – बितर करने के लिए प्रशासन की तरफ से आँसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं, पानी की बौछार की जाती है, लाठी चार्ज किया जाता है परंतु यहाँ तो पकड़कर कनपटी पर बन्दूक रखकर गोली मारी गई थी।

 गरीब को नचा रहे थे पांच साल, अब पूरा परिवार नाच रहा है कमाल…

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भारत में हिंदू धर्म के लोग मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को अपना भगवान और उनके जीवन पर लिखी गई ‘रामायण’ को अपना धार्मिक ग्रंथ मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुल्ला मुलायम शाहजहां के शहजादे औरंगजेब अखिलेश सरकार की वोट बैंक पॉलिटिक्स की वजह से राम लीला पर पत्थर फेंके जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अक्टूबर २०१३ को कुछ शरारती तत्वों ने शुक्रवार रात रामलीला के दौरान पथराव किया, जिसके बाद रामलीला स्थल पर अफरा-तफरा मच गई थी। पत्थर लगने से एक महिला घायल हो गई थी। क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण हो गया था। पूरे इलाके में अर्धसैनिक बलों और पुलिस की तैनाती कर दी गई थी। कवाल वही गांव है, जहां उसी वर्ष 27 अगस्त को छेड़खानी की एक घटना को लेकर हुए विवाद में 3 लोगों की मौत के बाद पूरे जिले में हिंसा भड़क गई थी और 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

Stone throwing at Ramlila Muzaffarnagar vs “Do you also have a Ramayana in India?” Indonesian Muslim Women asked

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दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाले देश में भी लोग ‘रामायण‘ के बेहद दीवाने हैं। इस देश में भी अयोध्या है और यहां के मुस्लिम भी भगवान राम को अपने ‘जीवन का नायक‘ और रामायण को अपने दिल के सबसे करीब मानते हैं।

इंडोनेशिया नामक इस देश की आबादी तकरीबन 23 करोड़ है। यह दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश है और साथ ही सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश भी है। साल 1973 में यहां की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मलेन का आयोजन किया था। ये अपने आप में काफी अनूठा आयोजन था क्योंकि घोषित तौर पर कोई मुस्लिम राष्ट्र पहली बार किसी और धर्म के धर्मग्रन्थ के सम्मान में इस तरह का कोई आयोजन करा रहा था।
इसी वर्ष दो माह पूर्व विगतअक्टूबर में इंडोनेशिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत की कई जगहों पर इंडोनेशिया की रामायण पर आधारित रामलीला का मंचन करवाने की मांग की थी। यही नहीं इंडोनेशिया ने मोदी सरकार से हर साल रामायण पर्व के आयोजन की भी मांग की।
भारत की तरह ही इंडोनेशिया में रामायण सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य ग्रंथ है ।इंडोनेशिया की रामायण 26 अध्यायों का एक विशाल ग्रंथ है। इस रामायण में प्राचीन लोकप्रिय चरित्र दशरथ को विश्वरंजन कहा गया है, जबकि उसमें उन्‍हें एक शैव भी माना गया है, यानी की वे शिव के अराधक हैं। इंडोनेशिया की रामायण का आरंभ भगवान राम के जन्म से होता है, जबकि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण के प्रस्थान में समस्त ॠषिगणों की ओर से मंगलाचरण किया जाता है और दशरथ के घर इस ज्येष्ठ पुत्र के जन्म के साथ ही हिंदेशिया का वाद्य यंत्र गामलान बजने लगता है। यहां नौ सेना के अध्यक्ष को लक्ष्मण कहा जाता है। जबकि सीता को सिंता और हनुमान तो इंडोनेशिया के सर्वाधिक लोकप्रिय पात्र हैं। बता दें कि हनुमान को इंडोनेशिया में ‘अनोमान’ कहा जाता है।