We are not gods, SC’s to Abolish mosquitoes’ petition: Ghar Vapsi of converted Keral woman

Supreme Court not god,Abolish mosquitoes’ petition, Gandhi Ghar Vapsi, Converted Keral woman, Bobby Jindal, Bible, Islam, Hindu Dharm, J&K IG Vaidya, Judeo, Rastriya Ekta book, Love Jihad, Jinnah, Bhutto, Mohmd Iqbal

Sandesh : Govind Sarang, Swamy Yoganand Saraswati BJP Sansad, Sujan Singh Patel MP Govt

Guruji , Vivekanand, Govind Sarang, Yoganand Saraswati, Rastriya Ekta Book, Hindi Book

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89

हमारी षिक्षा प्रसार और उन्नति की गवोक्तियां व्यर्थ है,यदि हमारे समाज के अनक अंग अज्ञान और उपेक्षा के अंधकार में पड़े रहते हैं।

– प.पू. गुरूजी

जब तक देष में एक कुत्ता भी भूखा है तुम सुख की नहीं कैसे सो सकते हो।

– विवेकानन्द

इस सुविस्तृत धरती की छाती पर अगर कोई ऐसा देष है, जहां आदमी अपने अर्मूत स्वप्न चिरकाल से मूर्त करते आया है तो मैं कहूंगा वह देष भारत ही है।

– रोम्या रोला (फ्रांसीसी विचारक)

अलगाववाद और उग्रवाद का जाल आज देष के विभिन्न भागों में फैला हुआ है। विदेष षक्तियों की षह में देष को खएिडत करने का देषद्रोही कुप्रयास हो रहा है। हमारी सरकार द्वारा इन षक्तियों के खात्मा के लिए जितना प्रयास होना चाहिए उतना उसके द्वारा नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में देषभक्ति, एकता की भावना एवं देष के लिए सर्वस्य अर्पित करने को हम सब उद्यम रहें। ‘‘राश्ट्रीय एकता‘‘ पुस्तक प्रकाषित कर आप इस दिषा में जो प्रयास कर रहे हैं उसमें सफल हों यही कामना करता हूं। दिनांक-28.02.1992- गोविन्द सारंग

भा.ज.पा.संगठन मंत्री,रायपुर संभाग

एक ही षिव एक ही विश्णु भारत की चारों दिषाओं के चौरासी क्षेत्रों में विराज रहे हैं। उन्हें ह खण्डित कैसे करें। एक ही रामायण, महाभारत, भागवत का विभिन्न प्रदेषों में पाठ होता है। श्रीराम और श्री कृश्ण समस्त भारत में सर्वत्र पूजे जाते हैं। -आचार्य क्षितिमोहन सेन

-0-

स्वामी योगानन्द सरस्वती,भाजपा संसद, दिनांक-28.02.1992

‘‘योगाश्रम‘‘ बाराकला (भिण्ड)

उग्रवाद को एकता यात्रा बढ़ावा मिला है, कहने वाले नितान्त भ्रम में है। राश्ट्रीय ध्वज श्रीनगर के लाल चौंक में नहीं प्रत्युत उग्रवादियों की छाती पर फहराया गया है। धन्य है जोषी जी और उनके साथी। उनके अडिग साहस, असीम निर्भयता की जितनी प्रंषसा की जाए कम ही है। साक्षात यमराज (मृत्यु)के सम्मुख देहाध्यास से विमुक्त हुए बढ़ते ही गए और लक्ष्य प्राप्त किया। कांग्रेस के षासनकाल में आज डेढ़ लाख वर्ग कि.मी. भूमि पाकिस्तान और चीन के पैरों तले रौंदी जा रही है। अब भारत माता का मस्तक काष्मीर भी सिसकता जा रहा है। एकता यात्रा से काष्मीर समस्या को सुलझाने की प्रारम्भिक भूमिका तैयार हुई है।                                                                -0-

जिस तरह अलगाववाद, उग्रवाद देष की षांति व्यवस्था के लिये प्रष्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं निष्चित की चिन्ता जनक है। मेरे मत से आज देष को राश्ट्रवाद एवं मानवाद के रास्ते पर आना चाहिए। राजनैतिक स्वार्थो

से हटकर विचार करें, मुझे पूर्ण विष्वास है भारतीय जनता पार्टी की एकता यात्रा मार्गदर्षक होगी।                     स्थानीय षासन एवं नगरीय कल्याण राज्य मंत्री

म.प्र. षासन भोपाल

-सुजान सिंह पटेल

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Mein Hindu Aur Muslim Donon Huun: Salman khan

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106

मैं हिन्दू और मुस्लिम दोनों हूँ: सलमान खान

सम्पादक

1

जोधपुर। सलमान जब कोर्ट पहंुचे तो वहां किसी अन्य मामले की सुनवाई चल रही थी। इंतजार में सलमान कोर्ट के एक कोने में खड़े हो गए। थोड़ी देर बाद उनके मामले की सुनवाई षुरू हुई तो वह जज अनुपमा बिजलानी के सामने आए और सिर झुकाकर अभिवादन किया।

जज अनुपमा बिजलानी ने सलमान खान से पूछा – आपकी जाति क्या है? उन्होंने अदालत, अपने वकील
,और अंगरक्षकों को हैरानी भरी निगाहों से देखा और कुछ सेकेंड बाद अदालत में किसी ने उन्हें सुझााया कि वह मुस्लिम बताएं। लेकिन सलमान ने जवाब दिया – मैं हिन्दू और मुस्लिम दोनों हूँ: मैं भारतीय हूँ , फिर कोर्ट ने पूछा कि भारतीय तो सभी हैं, तो सलमान ने जवाब दिया कि, मेरी मां हिंदू है, पिता मुस्लिम हैं, इसलिए मैं इंडियन हूं,

मजिस्ट्रेट              – क्या नाम है?

सलमान                – सलमान सलीम खान

मजिस्ट्रेट              – पिता का नाम?

सलमान                – सलीम

मजिस्ट्रेट              – आपकी उम्र?

सलमान                – 49 साल

मजिस्ट्रेट              – पता?

सलमान                – मुंबई में रहता हंू।

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107

मजिस्ट्रेट              – पूरा पता बताओ?

सलमान                – गैलेक्सी अपार्टमेंट, (धीरे से रोड का नाम लिया और फिर बोले) मुंबई-5

मजिस्ट्रेट              – क्या काम करते हो?

सलमान                – एक्टर हंू।

मजिस्ट्रेट              – आपकी कास्ट?

सलमान                – (इधर-उधर देखते रहे। चेहरे के भाव भी ऐसे थे जैसे कुछ नहीं समझे। इस बीच उनके वकील श्रीकांत षिवदे ने कहा योर कॉस्ट। पीछे से कोई बोला मुस्लिम, लेकिन सलमान चुपचाप खड़े रहे। इस पर ष्विदे ने एक बार फिर कहा अपनी जाति बताओ) इसके बाद सलमान ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम बोथ (दोनों) हैं। पिता मुस्लिम और मां हिंदू।

बता दें कि सलमान के पिता और स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान ने साल 1964 में सुषीला चरक से षादी की थी। सुषीला का जन्म मराठी हिंदू परिवार में हुआ था। सलीम खान से षादी के लिए उन्होंने इस्लाम कुबूल करते हुए अपना नाम सलमा रख लिया था। हालांकि, सलीम खान की दूसरी पत्नी हेलन धर्म से क्रिष्चियन हैं।

घर को मिनी इंडिया कहते हैं सलमान खान

सलमान खान के बारे में कहा जाता है कि वे अपने घर को मिनी इंडिया कहतक हैं। दरअसल, वे ऐसा इसलिए कहते हैं, क्योंकि उनके परिवार में हिंदू, मुस्लिम और क्रिष्चियन सभी धर्मो के लोग हैं और सभी एक ही छत के नीचे रहते हैं।

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Rajpath se “Run for Unity” : Pradhanmantri ka bhashan

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102

राश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

सम्पादक

1

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

2मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गाराश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो3 धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गांधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में राश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गांधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में राश्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजपथ से प्रधानमंत्री के ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ भाशण का मूल पाठ

मेरे साथ आप लोग बोलेंगे, मैं कहूंगा सरदार पटेल आप लोग कहेंगे अमर रहे, अमर रहे……सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल, (अमर रहे) सरदार पटेल (अमर रहे)।

मंच पर विराजमान मंत्रिपरिशद के हमारे वरिश्ठ साथी, आदरणीय सुशमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, श्रीमान रविषेकर जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और सारे नौजवान साथियों,

आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का प्रेरक पर्व है। जो देष इतिहास को भूला देता है, वह देष कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। और इसलिए एक जीवंत राश्ट्र के लिए, एक आषा-आकांक्षाओं के साथ भरे हुए राश्ट्र के लिए सपनों को सजा कर बैठी युवा पीढ़ी के लिए अपने ऐतिहासिक धरोहर सदा-सर्वदा प्रेरणा देती है और हमारे देष ने इस बात को भी कभी भी भूलना नहीं होगा कि हम इतिहास को विरासतों को अपने वैचारिक दायरे में न बांटे। इतिहास पुरूश, राश्ट्र पुरूश इतिहास की वो धरोहर होते हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए नया उमंग और नया उत्साह भरते हैं।

आज श्रीमती इंदिरा गांधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में ंधी जी की भी पुण्य तिथि है। सरदार साहब का जीवन देष की एकता के लिए आहूत हो गया। बैरिस्टर के नाते, सफल बैरिस्टर गांधी के चरणों में

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103

4समर्पित हो गए, और हिंदुस्तान के किसानों को आजादी के आंदोलन में जोड़कर के उन्होंने अंग्रेज सल्तनत को हिला दिया था। अंग्रेज सल्तनत ने भांप लिया था अगर देष का गांव, देष का किसान आजादी के आंदोलन का हिस्सा बन गया तो अंग्रेज सल्तनत की कोई ताकत नहीं है कि वो आजादी के दीवानों के खिलाफ लड़ाई लड़ सके।

कभी-कभी जब हम रामकृश्ण परमहंस को देखते हैं तो लगता है कि स्वामी विवेकानंद के बिना रामकृश्ण परमहंस अधूरे लगते हैं। वैसे ही जब महात्मा गांधी को देखते हैं तो लगता है कि सरदार साहब के बिना गांधी भी अधूरे लगते थे। यह एक अटूट नाता था। यह अटूट जोड़ी थी जिस दांडी यात्रा ने हिंदुस्तान की आजादी को नया मोड़ दिया था।

पूरे विष्व को सबसे पहले ताकतवर मैसेज देने का अवसर दांडी यात्रा में से पैंदा हुआ था। उस दांडी यात्रा में5 एक सफल संगठक के रूप में, एक कार्यकर्ता के रूप में सरदार साहब की जो भूमिका थी, वो बेजोड़ थी। और महात्मा गांधी ने दांड़ी यात्रा की पूरी योजना सरदार साहब के हवाले की थी। हम कल्पना कर सकते थे कि देष की आजादी आंदोलन के अलग-अलग पढ़ाव में, महात्मा गांधी के साथ रहकर के सरदार साहब की कितनी अहम भूमिका रही थी और आजादी के बाद सरदार साहब का लाभ देष को बहुत कम मिला। बहुत कम समय तक हमारे बीच रहे। लेकिन इतने कम समय में सरदार साहब ने अंग्रेजों के सारे सपनों को धूल में मिला दिया था, चूर-चूर कर दिया था। अपनी दूर दृश्टि के 6द्वारा, अपने कूटनीति सामर्थ्य के द्वारा, अपनी राश्ट्र भक्ति के द्वारा। अंग्रेज चाहते थे कि देष आजाद होने के बाद सैकड़ों टूकड़ों में बिखर जाए। आपस में लड़ते रहे, मर मिटते रहे, यह अंग्रेजों का इरादा था, लेकिन सरदार साहब ने अपनी कूटनीति के द्वारा, अपनी दीर्घ दृश्टि के द्वारा, अपने लोखंडित मनोबल के द्वारा साढ़े पांच सौ से भी अधिक रियासतों को एक सूत्र

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104

7में बांध दिया। जिसे सम्मान देने की जरूरत थी, उसे सम्मान दिया जिसको पुचकारने की जरूरत थी, उसको पुचकारा और जिसको आंख दिखाने की जरूरत थी उसको आंख दिखाने में भी सरदार पटेल ने कभी हिचक नहीं की, संकोच नहीं किया। उस सामर्थ्य का परिचय दिया था। और उसी महापुरूश ने, एक प्रकार से आज जब हिंदुस्तान देख रहे हैं वो एक भारत का सफलदृश्टा उसके नियंता सरदार पटेल को देष कभी भूल नहीं सकता है।

षताब्दियों पहले इतिहास में चाणक्य का उल्लेख इस बात के लिए आता है कि उन्होंने अनेक राजे-8रजवाड़ों को एक करके, एक सपना लेकर के, राश्ट्र के पुनरूद्धार का सपना देकर के सफल प्रयास किया था। चाणक्य के बाद एस महान काम को करने वाले एक महापुरूश हैं, जिनका आज हम जन्म जयंती पर्व मना रहे हैं, वो सरदार वल्लभ भाई पटेल हैं। लेकिन यह कैसा दुर्भाग्य है, जिस व्यक्ति ने देष की एकता के लिए अपने आप को खपा दिया था, आलोचनाएं झेली थी, विरोध झेले थे। अपने राजनीतिक यात्रा में रूकावटें महसूस की थी। लेकिन उस लक्ष्य की पूर्ति के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए थे, और वो लक्ष्य था भारत की एकता। उसी देष में, उसी देष में, उसी महापुरूश की जयंती पर, 30 साल पहले भारत की एकता को गहरी चोट पहंुचाने वाली एक भयंकर घटना ने आकार लिया। हमारे ही अपने लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। और वो घटना किसी सम्प्रदाय के लोगों के सीने पर लगे घाव की नहीं थी, वो घटना भारत के हजारों साल के महान व्यवस्था के सीने पर लगा हुआ एक छूरा था, एक खंजर था, भयंकर आपत्तिजनक था। लेकिन दुर्भाग्य रहा इतिहास का कि उसे महापुरूश के जयंती के दिन यह हो गया। और तब जाकर के देष की एकता के लिए, हम लोगों ने अधिक जागरूकता के साथ, अधिक जिम्मेवारी के साथ। सरदार साहब ने हमें एक भारत दिया, श्रेश्ठ भारत बनाना हमारी जिम्मेवारी है। ‘एक भारत श्रेश्ठ भारत‘

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इस सपने को पूरा करने के लिए भारत की जो महान विरासत है वो विरासतें विविधता में एकता की है। उस विविधता में एकता की विरासत को लेकर के, जातिवाद से परे उठकर के, भाशावाद से परे उठकर के, सम्प्रदायवाद से परे उठकर के एक भारत समृद्ध भारत, ऊंच-नीच के भेदभाव से मुक्त भारत यह सपने को साकार करने के लिए आज से उत्तम पर्व नहीं

हो सकता, जो हमें आने वाले दिनों के लिए प्रेरणा देता रहे।

और युवा पीढ़ी आज इस राश्ट्रीय एकता दिवस पर पूरे हिंदुस्तान में त्नद वित न्दपजल के लिए दौड़ रही है। मैं समझता हंू यह हमारा प्रयास एकता के मंत्र को निरंतर जगाए रखना चाहिए। और हमारे षास्त्रों में कहा है राश्ट्रयाम जाग्रयम वयम..हर पल हमें जागते रहना चाहिए अपने सपनों को लेकर के, सोचते रहना चाहिए, उसके अनुरूप काम करते रहना चाहिए तभी संभव होता है। भारत विविधताओं से भरा हुआ देष है। अनेक

9विविधताओं से भरा हुआ देष है। विविधता में एकता यही हमारी विषेश्ता है। हम कभी एकरूपता के पक्षकार नहीं रहे। हम विविधताओं से भरे हुए रहते हैं। एक ही प्रकार के फूलों से बना गुलदस्ता और रंग-बिरंगे फूलों से बने गुलदस्ते में कितना फर्क होता है। भारत उन विषेशताओं से भरा हुआ देष है, उन विषेशताओं को बनाते हुए एकता के सूत्र को जीवंत रखना,

एकता के सूत्र को बलवंत बनाना यही हम लोगों का प्रयास है और यही एकता का संदेष है।

राज्य अनेक राश्ट्र एक,

पंथ अनेक लक्ष्य एक,

बोली अनेक स्वर एक,

भाशा अनेक भाव एक,

रंग अनेक तिरंगा एक,

समाज अनेक भारत एक,

रिवाज अनेक संस्कार एक,

कार्य अनेक संकल्प एक,

रहा अनेक मंजिल एक,

चेहरे अनेक मुस्कान एक,

इसी एकता के मंत्र को लेकर यह देष आगे बढ़े।

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Swadeshi Abhiyan : By Roshnlal Agrawal, MLA, Raigarh

Swadeshi Abhiyan,  Roshnlal Agrawal,  Rastriya Ekta Book, Hindi Book, MLA Raigarh

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97

                            स्वदेषी अभियान सम्पादक

स्वामी विवेकानन्द जी के जन्म दिवस 12 जनवरी से सम्पूर्ण भारत में ‘‘स्वदेषी जागरण मंच‘‘ के तत्वाधान में ‘‘स्वदेषी अभियान‘‘ प्रारंभ हुआ है। रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री बाला साहब देवरस ने सतर्क किया है कि ‘‘बहुराश्ट्रीय कंपनियां देष की अनमोल साधन संपत्ति का केवल दोहन ही नहीं षोशण भी कर रही है, साथ ही साथ सब प्रकार क खुफिया जानकारी भी प्राप्त करती है। ये बहुराश्ट्रीय कंपनियां तथा विष्व बैंक और अन्तर्राश्ट्रीय मुद्राकोश आदि विदेषी एजेन्सियां भारत की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाकर अपनी मुट्ठीमें रखने के लिए आगे बढ़ रही हैं। हें इसी प्रकार से कंवल व्यापार करने आई विदेषी ईस्ट इंडि़या कम्पनी ने ही गुलाम बनाया था।

बहुराश्ट्रीय कंपनियों द्वारा निर्मित कुछ वस्तुओं क सूचि निम्नलिखित हैं। हम सब भारतीयों का कर्त्तव्य है कि इन वस्तुओं का उपयोग बिल्कुल नहीं करें। इनके विकल्प में भारतीय स्वदेषी वस्तुएं हैं उन्हें अपनायें।

विदेषी कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुएं-

टूथपेस्ट-कॉलगेट,फॅरहेन्स,क्लोज अप,सिबाका,ग्लीन,एनोफार्म,

टूथ पाऊडार-कॉलगेट,फॅरहेन्स, सिबाका

ब्लेड-सेवन ओ क्लॉक,विल्मैन,विल्टेज,इरास्मिक,पाण्डस,मेन्थल।

षेविंग क्रीम-ओल्ड स्पाइस,लेदर, पामोलिव,निविया,इरास्मिक,मेन्थल।

नहाने का साबुन-लक्स,रेक्सोना,लिरिल,लाइफबॉय,ब्रीज,पीयस,पाण्ड्स,

कपड़े धोने का साबुन-सनलाइट,रिन,व्हील,सर्फ,चेक,वि,हारपिक।

पंखे-जी.ई.सी. एवं रैलीज कंपनी

टार्च एवं बैटरी-एवरेडी,जीवन साथी।

पंय-पेप्सी,कोका कोला, लहर

सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री- वेस्ले(हेयर टानिक),ब्रिलक्रीम, आदि हेयर क्रीम, पाण्ड्स,ओल्ड स्पाइस,हेलो,हिना,पामोलिव,क्लीनिक स्पेषल,क्लीनिक सनसिल्क,क्लियरसिल,मेडीकेयर,ग्लीम,पी.ओ.,ब्यूटी,आदि षैम्पू,तथा इस नाम की क्रीमें एवं फेयर एण्ड़ लवली, नीविया, मिन, डिटॉल,ए.एफ.डी.सी. सुप्रीम चार्मिस, आदि क्रीम: नायसिल, लिरिल, पाण्डस्,ओल्ड स्पाईस, जॉनसन ादि पाउडर।

रेडिमेड कपड़े- रैगलर,नाईक,डयूक,ऐडीडास,पावर व प्यूा,की टीषर्ट,जीन्स व षर्ट।

रसोईघर से संबंधित सामान-टिक्का,होमालइट,आदि दियासालाइ, मिल्कमेड, नेस्पे,फेरेक्स,गाल्टको,आदि दूध पाऊडर,सेरलेक,नेस्टम, एल.पी.एफ. आदि दूध पाऊडर,सेरेलक,नेस्टम,रेडलेबल,लिप्टन,टैस्टर चौइस,टाइगर,ग्रीनलेबल,टी टॉप,चीयर्स,डायमण्ड़,रंगोली,ूधुबन,सुपर कप, उत्सव,सिम्फनी,स्वानलेकर, जैड ग्लो, गोल्ड ब्लासम,डबल डायमण्ड़,ब्लू डायमण्ड़ आदि चाय।

जूते-पावर,एम्बेसेडर,क्वाडा,क्वनी,नार्थस्टार,टायर,हाईवाकर,प्यूमा,एंपायर,बाटा।

वाहनों के टायर-अपोलो,फायर स्टोन,सीएट,गुडईयर,डनलय,

अन्य- डालडा वनस्पति,साकया रिफाइंड,आयल,सनडाप,किस्टल,वनस्पति,।

तल-ब्रिटानिया,कैडब्री,ग्लूकोज,लिप्टसन ग्लूकोज आदि। बिस्कुट-5स्टार चॉकलजेट स्वाद एफलेयर,टाफियां,कोको चीप,कोकोआ,नेस्कैफे,नेस्ले आदि।

-रोषनलाल अग्रवाल,रायगढ़

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Lokmanya Tilak: By Suresh Kumar Agrawal

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96

लोकमान्य तिलक

-सुरेष कुमार अग्रवाल, रायपुर

उपाध्यक्ष- लायन्स क्लब फेन्डस,रायपुर

गांधी जी के षब्दों में -‘‘लोकमान्य तिलक अनमोल हैं‘‘ स्वदेषी भावना के साक्षात स्वरूप, और ‘‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है की सिंह गर्जना करने वाले तिलक ही थे।

उनके एक वकील मित्र ने पूछा था-गर्वनर की सभा में जाते समय आप अंगरखा और पगड़ी पहन कर जायेंगे या सूट पहन कर? लोकमान्य तिलक का उत्तर था- अंग्रेज हमारे देष में आये हैं यहां की जलवायु के अनुसार उन्हें अपने वेश में परिवर्तन करना चाहिए, ना कि मुझे। मैं पनी पोषाक क्यों बदलूं।

सादगी के पुजारी तिलक का संस्मरण उन्ही के षब्दों में- ‘‘जब केसरी के लिए प्रेस खरीदा गया तो उसके टाईप के केस स्वयं मुझे अपने कंधे पर ढ़ोने पड़े…..मैं जिस बिस्तर पर सोता था, उसी को लपेटकर सामने रख लेता और उसी पर रख कर लिखता। वही हमारी मेज थी।

स्वतंत्रता के बाद आज तक कांग्रेस तुश्टीकरण की नीति पर चल रही है उसी कांग्रेस के लिये स्वतंत्रता के 1पूर्व के कांग्रेस नेता तिलक के सम्बंध में स्व. बी.बी.खेर का लिखा एक संस्मरण है- 1893 में पूना बम्बई और दूसरे स्थानों पर भीशण हिन्दू मुस्लिम दंगे हुए। तिलक ने इस संबंध में सरकारी नीति का विरोध करने के लिए पूना में सभा ली। जस्टिस गोविन्द रानडे और उनके षिश्य गोपाल कृश्ण गोखले ने इसका विरोध किया, क्योंकि उन्हें भय था कि एैसा करने से मुसलमान और अंग्रेज सरकार दोनों चिढ़ जायेंगे, पर तिलक कहां मानने वाले थे। उन्होंने रानड़े और गोखले दोनों अपने पत्र ‘‘केसरी‘‘ में खूब खबर ली।‘‘

70-75 वर्श पूर्व महाराश्ट्र में गणेषोत्सव का पर्व तिलक ने ही आपस मे मेलजोल बढ़ाने के उद्देष्य से प्रारंभ किया था।

-0-

स्टार टी.वी. और सी.एन.एन. के माध्यम अतंर्राश्ट्रीय टी.वी. का बढ़ता स्वरूप हमारी राश्ट्रीय एकता के लिए खतरा बन गया है। इसमें सर्वाधिक आपत्तिजनक कार्यक्रम पाकिस्तानी टी.वी. का होता है।                                                                                                                – एक समाचार

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Madarson Mein Diye Ja Rahe Hain Hindu Sanskar

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93

              मदरसों में दिए जा रहे हैं हिंदू संस्कार सम्पादक

कर्नाटक में एक कांग्रेस नेता ने विष्व हिंदू परिशद का मुकाबला करने के लिए भारतीय हिंदू परिशद (बीएचपी) का गठन किया है, मंगलुरू के नज़दीक तटीय जिले दक्षिण कन्नड़ के पुत्तर कस्बे में मंत्रोच्चार के बीच बीएचपी का गठन किया गया.

षेट्टी का कहना है, ‘‘हम पार्टी के विरूद्ध नहीं जा रहे हैं, हम समाज का विष्वास जीतना चाहते हैं और यह बताना चाहते हैं कि विष्व हिंदू परिशद जिस तरह का हिंदुत्व परोस रहा है वह सही नहीं है, यह हिंदू समाज का सम्मान नहीं बढ़ाता.‘‘

कांग्रेस ने मुसलमानों और ईसाइयों को लुभाने के लिए हिंदुओं को किनारे कर दिया है.

मंदसौर में 17 साल पहले महिलाओं- जिनमें पांच मुसलमान हैं और दो हिंदू-ने निदा महिला मंडल (एनएमएम) बनाकर मदरसों से हिंदुत्व और इस्लाम की षिक्षा देना षुरू किया था.

डॉक्टर तलत कुरैषी

डॉक्टर तलत कुरैषी मदरसों को संचालित करने वाले निदा महिला मंडल की अध्यक्ष है.

इसकी अध्यक्ष तलत कुरैषी कहती हैं, ‘‘हम गरीब परिवारों के बच्चों को षिक्षा देने का काम कर रहे हैं, कई हिंदू गरीब परिवार अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते थे लेकिन जब हमने धार्मिक षिक्षा को लेकर उनकी चिंताओं को देखा तो मदरसों का पुराना पैटर्न लागू किया. ऐसा, जो काफी सस्ता था और जिसने राजा राममोहन राय, मंषी प्रेमचंद और भारतेंदु हरिष्चंद्र जैसे नामचीन षख्स दिए.‘‘

निदा महिला मंडल 128 मदरसों को संचालित करता है और इसका मुख्यालय मदरसा फिरदौस है. गुरूकुल विद्यापीठ, नाकोडा, ज्ञान सागर, संत रविदास, एंजिल और जैन वर्धमान सरीखे नाम वाले 128 मदरसों में से 78 मदरसों में मुस्लिम छात्रों के साथ हिंदू बच्चे भी पढ़ते हैं.

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तलत बताती हैं कि 14 मदरसों को सरकारी अनुदान मिलता है लेकिन समय पर नहीं. हिंदी और अंग्रेजी भाशा पढ़ना जरूरी है, जबकि तीसरी भाशा के लिए उर्दू और संस्कृत में से एक का विकल्प दिया जाता है.

‘‘दीनी तालीम के लिए कोई बंदिष नहीं है, जो बच्चे उर्दू लेते हैं, उन्हें दीनियात और संस्कृत वाले बच्चों को हिंदू धर्म की पुस्तक पढ़ाई जाती है. चूंकि एक छत के नीचे एक माहौल में सारे बच्चे पढ़ते हैं तो उनका परस्पर धार्मिक किताबों में दिलचस्पी लेना लाजमी है.‘‘

स्मार्ट क्लासेज़ भी

हिंदुत्व-इस्लाम की षिक्षा देने वाला मदरसा

जिला मदरसा केन्द्र के समन्वयक डॉक्टर षाहिद कुरैषी बताते हैं, ‘‘मध्य प्रदेष में आधुनिक मदरसों में धार्मिक षिक्षा की पुस्तक जरूरी है. सिलेबस का निर्धारण भी संस्था को करना है. लिहाजा हिंदू बच्चों की संख्या देखते ‘हिंदू धर्म सोलह संस्कार, नित्यकर्म एवं मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार‘ षीर्शक से किताब लिखी.‘‘

इस किताब में नित्यकर्म, दंतधावन विधि, क्षैर कर्म, स्नान, वस्त्र धारण विधि, आसन, तिलक धारण प्रकार, हाथों में तीर्थ, जप विधि, प्राणायाम, नित्य दान, मानस पूजा, भोजन विधि, धार्मिक दृश्टि में अंकों का महत्व और नवकार मंत्र को भी षामिल किया गया है.

षाहिद बताते हैं कि मदरसों के षिक्षक हिंदू धर्म पर आधारित इस पुस्तक को भी पढ़ा रहे हैं, ‘‘इसके जरिए दोनों ही धर्मों के बच्चों और षिक्षकों ने एक-दमसरे को जानने और समझने की पहल की है.‘‘

उन्होंने बताया कि साढ़े 13 लाख की आबादी वाले मंदसौर जिले में लगभग 250 मदरसे संचालित किए जा रहे हैं और इनमें दोनों धर्मो के लगभग 15 हजार बच्चे (एनएमएम के 128 मदरसों के 12 हजार बच्चों सहित) पढ़ते हैं.

खास बात यह है कि पन्द्रह हजार बच्चों में से 55 फीसदी हिंदू है. लगभग 20 मदरसों में स्मार्ट क्लासेज प्रारंभ की गई हैं और पहली से चौथी तक अंग्रेजी माध्यम भी षुरू किया गया है.

पेषे से पत्रकार और पुस्तक के लेखक नेमीचंद राठौर ने बताया कि डॉ. कुरैषी के आग्रह पर संकलन तैयार तो कर दिया पर मन में षंका थी कि मदरसों में

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यह किताब स्वीकार भी होगी या नहीं. लेकिन हिंदू बच्चों के साथ जब मुस्लिम बच्चों और षिक्षकों ने भी इसे पसंद किया तो खुषी हुई.

राठौर के अनुसार बीते पांच वर्शो से उनकी पुस्तक मदरसों में पढ़ाई जा रही है.

षुरूआती हिचक

मदरसा फिरदौस की छात्रा जैनब गौरी ने बीबीसी से कहा,‘‘दोनों धर्मों की किताबों में कई सारी बातें एक सी हैं. सिर्फ नाम अलग-अलग हैं.‘‘

जैनब को हिंदू धर्म की पूरी पुस्तक याद है. वह पूछती हैं,‘‘हम सब जब रोटी एक खाते हैं तो अलग कैसे हुए.‘‘

इसी मदरसे की 11वीं की छात्रा आयुशि वर्षी कहती है धार्मिक षिक्षा को लेकर कोई पाबंदी नहीं है. उसके पिता संजीव बताते हैं कि पन्द्रह सौ रूपये ही सालाना फीस में ऐसी मॉडर्न षिक्षा कहीं और नहीं मिल सकती.

मदरसा, हिंदू षिक्षा

1वह कहते हैं, ‘‘मैंने तो कभी नहीं देखा कि एक स्कूल में दोनों धर्मो की अलग-अलग षिक्षा दी जाती हो.‘‘

मदरसा फिरदौस की टीचर नुसरत ख़ान कहती हैं, ‘‘मदरसे में हिंदू धर्म से संबंधित पुस्तक देखकर पहले तो हमको ही कुछ अटपटा लगा. लेकिन पढ़ने के बाद हिचक दूर हो गई. हिंदू बच्चों को पढ़ता देख कई मुस्लिम बच्चे भी इसमें दिलचस्पी दिखाने लगे.‘‘

Welcome this chage: Madarson mein Hindu Sanskar: Karnatak mein Cong kee Bhartiya Hindu Parishad

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Shahidon Ko Samjhne Par Hi Rastriya Ekta : By Rajesh Agrawal

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शहीदों को समझने पर ही राश्ट्रीय एकता सम्पादक

राजेष कुमार अग्रवाल,रामसागरपारा,रायपुर

सिर हथेली पर रखकर घूमने वाले आजादी के मतवालों को हंसते ‘‘वन्देमातरम्‘‘ कहते हुए फांसी के फन्दे पर झूलने वाले आजादी के दीवनों के बलिदानों को सही मायने में हम समझलें तो इसकी रक्षा करने के लिए भी हम उठ खड़े होंगे। अलगाववाद, उग्रवाद, नक्सलवाद फिर नहीं पनपेंगे।

जाग उठी है माटी सोई, राश्ट्रधर्म से बड़ा न कोई।

बिस्मिल और अषफाक चले, देषद्रोह की फसल जले।।

फांसी लगने के दो दिन पूर्व अपनी डायरी में बिस्मिल ने लिखा था-‘‘अषफाक उल्ला एक कट्टर मुसलमान होकर अआर्य समाजी रामप्रसाद का क्रांतिकारी दल के सम्बंध में यदि दाहिना हाथ बन सकते है तो क्या स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू मुसलमान अपने निजी छोटे छोटे फायदों का ख्याल न करके आपस में एक नहीं हो सकते….?

उनकी जोषीली कविताओं की विभिन्न प्रेरक पंक्तियां प्रस्तुत हैं:-

सर फरोषी की तमन्ना आज हमारे दिल में है।

देखते हैं जोर कितना बाजुए कातिल में है।।

क्या ही लज्जत है कि रग रग में आती यह सदा।

दम न ले तलवार जब तक जान बिस्मिल में रहें।।

यदि देष हित मरना पड़े, मुझे सहस्त्रों बार भी।

तो भी न मैं इस कश्ट को, निज ध्यान में लाऊं कभी।।

मरते बिस्मिल, रोषन, लाहिड़ी, अषफाक अत्याचार से।

होंगे पैदा सैकड़ो इनकी रूधिर की धार से।।

फांसी के फंदे पर जाते हुए बिस्मिल ने कहा था-

मालिक तेरी रज़ा और तू ही रहे,

बांकी न मैं रहंू, न मेरी आरजू रहे।

जब तक कि तन में जान, रगों में लहू रहे,

तेरा ही जिक्र या, तेरी ही जूस्तजु रहे।

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मजिस्ट्रेट का प्रष्न और बालक चन्द्रषेखर का उत्तर-

तुम्हारा नाम?- आजाद। पिता का नाम? स्वतंत्रता। तुम्हारा घर? जेलखाना।

गुस्से में मजिस्ट्रेट ने 15 बेतों की सजा सुनायी और चन्द्रषेखर ‘‘आजाद‘‘ कहलाने लगे।

वे कहते थे आजादी हासिल करने के लिये हाथों में लहू की गर्मी चाहिये। मेरा मकसद आजादी है और यह है पत्थर की लकीर।

मैं इतना कहूंगा आजाद था,आजाद हंू,आजाद रहंूगा।

भारत के गली कूचों में आबाद रहंूगा,आजाद रहंूगा।

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कानपुर के मारवाड़ी परिवार की 80 वर्शीय श्रीमती मुसद्दी की मृत्यु मार्च 1992 में हुई है। एक साक्षात्कार में यूनिर्वाता को उन्होंने बताया था कि आजाद को कढ़ी बहंुत पसन्द थी और अक्सर खुफिया पुलिस के संकट के बावजूद उनके हाथें कढ़ी खाने आया करते थे अपने फक्कड़ अंदाज में एक भोजपुरी कजरी गाया करते थे –

जेहि दिन हुई ह सुरजवाना

अरहर का दलवा, धान का भतवा

खूब कचर के खाइबे ना……………..

-0-

‘‘पंच आब‘‘ अर्थात पांच नदियों का पानी। महान संतों और वीर योद्धाओं की जन्मभूमि। हिन्दुत्व की रक्षा करने के लिये सिख पंथ के संस्थापक गुरू नानक देव का, नवे गुरू तेग बहादुर, दसवें गुरू गोविन्दं सिंह का पंजाब। पंजाब को भारत की तलवार भी कहते हैं। इसी पंजाब की वीर भूमि में जन्म लिये थे अर षहीद भगत सिंह, मदन धीगरा, लाला लजपतराय आदि।

असेम्बली हाल में बम फेंकने की जिम्मेदारी अपने साथी बटुकेष्वर के साथ भगतसिंह ने ली थी। बम फेंकने के बाद सुरक्षित वापिस लाने का इंतेजाम आजाद ने किया था। परन्तु भगतसिंह बम फेंकने के बाद भागने की अपेक्षा गिरफ्तार होना और क्रांतिकारियों के मकसद को कोर्ट में बयान कर भारतीयों में स्वतंत्रता के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना पैदा करना था। उन्हे मालूम था कि उैसा करके वे फांसी पर लटकने वाले हैं परन्तु उन्हें देष के लिये यही स्वीकार हुआ। यह थी बेमिसाल देषीभक्ति।

स्वातंत्रय वीर सांवरकर के आदेष पर सब कुछ करने का साहस रखने मदनलाल धींगरा के अमर वाक्य- मैं एक हिन्दू हूं। मै अपने राश्ट्र के अपमान को पने देवता का अपमान मानता हंू। अपने लहू कि अतिरिक्त अपनी माता को मैं और क्या दे सकता हूं। भारत की सेवा ही मेरे लिये भगवान राम और कृश्ण की सेवा है।‘‘

‘‘मुझ पर किया गया लाठी का एक एक प्रहार ब्रिटिष सरकार के कफन की कील बनेगा।‘‘ यह श्राप था लाला लाजपतराय का अंग्रेज सरकार को। सन् 1896 में मध्य भारत भीशण ाकाल की चपेट में था अकाल से ग्रस्त लोग ईसाइ मिषनरियों के षिकार बन रहे थे लाला जी ये सब नहीं चाहते थे। जबलपुर, बिलासपुर, रायपुर आदि जिलों के सैकड़ों अनाथ बालकों को पंजाब के आर्य समाज के अनाथालयों में उन्होंने रखा था।

‘‘तुम मुझो खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा‘‘ नेताजी को जवाब मिला था- ‘‘ह इतना खून देगे कि इफाल के पहाड़ लाल हो जायेंगे।‘‘ आजाद हिन्द फौज के जवानों का आत्मविष्वास और नेताजी के प्रति समर्पण भाव को देखिये ‘‘गुलामी के घी और आटे से आजादी की घास अच्छी है हम पैदल चलेंगे, हम पत्ते खायेंगे,दवाईयों के बिना रह लेंगे पर हम आगे बढ़ेंगे।‘‘ काष गांधी जी का व्यक्तिगत झूकाव पं. नेहरू की ओर नही रहता तो इतिहास ही बदल जाता।

तकलीफ तो मेरी मां का नाम है जिसे मैं बहंुत प्यार करता हंू। दूसरे साथी ने गरम छुरी से षरीर से गोली निकाली तो तीसरे साथी ने आग्रह किया- यह गोली तो मैं रखूंगा। उत्तर भारत के क्रांतिकारी का दक्षिण भारत के क्रांतिकारी के लिये यह गोली तोहफा है।

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Ekta Ke Aadhar Stambh: By Vinod Agrawal

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                                एकता के आधार स्तम्भ सम्पादक

-विनोद अग्रवाल,रायपुर

11 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा था- आज लाहोर से लेकर पूर्वी बंगाल का थोड़ा भाग छोड़ कर बांकी हिन्दुस्तान को एक करने का मौका एक हजार वर्श बाद आया है।

भारत जब सवतंत्र हुआ उस समय 554 भारतीय रजवाड़े थे जो कि भारत के दो तिहाई हिस्से में फैले हुए थे और एक तिहाई ब्रिटिष इंडि़या था। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सबको एकत्रित कर एक साथ भारत में मिलाया था उन्होंने यह अनुभव किया था कि राश्ट्रीय एकता की नींव साम्प्रदायिक

एकता में है भारतीयरजवाड़ों को भारत में मिलाने के महानतम् कार्य के कारण ही वे लोहपुरूश कहलाने लगे।

उन्होंने अृतसर में सिक्खों से बातचीत की और अक्टूबर1947 को पटियाला में उन्होंने कहा था कि- हम खालिस्थान, सिखिस्तान या जाटिस्तान

जैसी मृगमरीचिका के पीछे नहीं दौड़ सकते। उन्होंने समझाया था कि कैसे और क्यों भारत विभाजन नहीं कर सकते। आप समुद्र को बांट नहीं सकते या नदी के पानी के टुकड़े नहीं कर सकते।

उनका कहना था कि ‘‘हमारे देष की प्राचीन परंपराों का हमें जो उत्तराधिकार मिला है वह हमारे लिए गर्व की चीज है। हम सब एक ही खून और एक ही भावना के बंधन में बंधे हुए हैं। कोई हमें अलग अलग टूकड़ों में बांट नही सकता।

उन्होंने एक षक्तिषाली भारत का सपना देखा था – ‘‘भविश्य भारत की षक्ति और विवेक पर निर्भर करेगा और यदि हमें अपनी षक्ति में विष्वास नहीं तो फिर हमें राश्ट्र के नाते विद्यमान रहने का कोई अधिकार नहीं‘‘।

चाणक्य देषभक्त, कूटनीतिज्ञ और अर्थषास्त्री थे। चन्द्रगुप्त के समय उत्तर भारत 36 विभिन्न जनपदों में विभक्त था। सबको अपने हित की चिन्ता  थी, राश्ट्रहित की कोई नहीं सोंचता था। एक एक करके जनपद यमनों की दासता स्वीकार करते चले जा रहे थे। एैसी विशम षोचनीय संकटपूर्ण स्थिति में उन्होंने विखण्डीत भारत के जन जन में राश्ट्र के प्रति चेतना जगाई। विदेषी यमनों की दासता स्वीकार करने को तत्पर राजसत्ता के अन्याय व अत्याचारों के खिलाफ साधारण षिक्षक चाणक्य ने न केवल लोहा लिया बल्कि राजसत्ता को ही बदल दिया। 2300 वर्श पूर्व उन्होंने राजनीतिज्ञों, धार्मिक वर्ग के खिलाफ

जो कुछ कहा था,लिखा था,वह आज की परिस्थिति में भी लागू होता है।

चाणक्य द्वारा लिखित पंचतंत्र दुनियां की 80 भाशाओं में अनुवादित है। वे महान अर्थषास्त्री भी थे। उनके अनुसार जो किसान राजकीय सहायता बगैर बंजर भूमि को खेती योग्य बना दे,उसका उस पर स्थायी स्वामित्व होना चाहिए।

प्रखर राश्ट्र भक्त, स्वाभिमानी, दृढ़ निष्चयी, चाणक्य में साध्य को लक्ष्य भेद करने की अपार षक्ति थी। अहंकार और क्रोध पर तो उन्होंने विजय ही प्राप्त कर ली थी।

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Ekta ka pratik: Farsi mein Mahabharat

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                                              एकता का प्रतीक:

सम्पादक

हैदराबाद षहर की एक गली में इस्लामिक अध्ययन का बेहद पुराना संस्थान स्थित है जामिया 1निजामिया। यहां फारसी में अनुदित महाभारत तो है ही और दुर्लभ इस्लामिक पांडुलिपियां भी हैं। षिब्ली गंज स्थित यह संस्थान हैदराबाद के ऐतिहासिक चारमीनार से कोई तीन किलोमीटर दूर है। इस पुस्तकालय में मौजूद महाभारत के फारसी अनुवाद वाला यह ग्रथं 400 वर्श से अधिक पुराना है इसके अलावा पुस्तकालय में 3,000 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां और विख्यात भारतीय और अरबी इस्लामिक विद्धानों द्वारा लिखी गई सैकड़ों साल पुरानी किताबें मौजूद हैं।

पुस्तकालय में पहंुचने से पहले यह ग्रंथ जामिया निजामिया के संस्थापक रहे मौलाना मोहम्मद अनवरूल्लाह फारूखी के निजी संग्रह में षुमार था। मुगल बादषाह अखबर के नवरत्नों में से एक अबुल 2फजल द्वारा अनुदित महाभारत की यह पांडुलीपि 5012 पृश्ठों में है। यह मौलाना मोहम्मद अनवारूल्ला फारूकी के व्यक्तिगत संग्रह में से एक है। मौलाना जामिया के संस्थापक थे और यह संस्थान दक्षिण भारत की सबसे बड़ी सेमिनरी है।

पुस्तकालय के प्रमुख फैसुद्दीन निजामी ने कहा यहां सबसे पुरानी पांडुलिपि किताब-उल-तबसेरा फिल किरातिल अषरा है जिसके लेखक मषहूर इस्लामिक अयेता अबू मोहम्मद मकी बिन तालिब थे, 750 वर्श पुरानी किताब कुरान के बारे में जो तजवीद कला के साथ है दुनिया में इस मास्टरपीस की केवल दो प्रतियां ही हैं, जिसमें से एक तुर्की के खलीफा पुस्तकालय में है.

http://www.newsanalysisindia.com/wp-admin/post.php?post=4743&action=edit

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हमारी षिक्षा प्रसार और उन्नति की गवोक्तियां व्यर्थ है,यदि हमारे समाज के अनक अंग अज्ञान और उपेक्षा के अंधकार में पड़े रहते हैं।

– प.पू. गुरूजी

जब तक देष में एक कुत्ता भी भूखा है तुम सुख की नहीं कैसे सो सकते हो।

– विवेकानन्द

इस सुविस्तृत धरती की छाती पर अगर कोई ऐसा देष है, जहां आदमी अपने अर्मूत स्वप्न चिरकाल से मूर्त करते आया है तो मैं कहूंगा वह देष भारत ही है।

– रोम्या रोला (फ्रांसीसी विचारक)

अलगाववाद और उग्रवाद का जाल आज देष के विभिन्न भागों में फैला हुआ है। विदेष षक्तियों की षह में देष को खएिडत करने का देषद्रोही कुप्रयास हो रहा है। हमारी सरकार द्वारा इन षक्तियों के खात्मा के लिए जितना प्रयास होना चाहिए उतना उसके द्वारा नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में देषभक्ति, एकता की भावना एवं देष के लिए सर्वस्य अर्पित करने को हम सब उद्यम रहें। ‘‘राश्ट्रीय एकता‘‘ पुस्तक प्रकाषित कर आप इस दिषा में जो प्रयास कर रहे हैं उसमें सफल हों यही कामना करता हूं। दिनांक-28.02.1992- गोविन्द सारंग

भा.ज.पा.संगठन मंत्री,रायपुर संभाग

एक ही षिव एक ही विश्णु भारत की चारों दिषाओं के चौरासी क्षेत्रों में विराज रहे हैं। उन्हें ह खण्डित कैसे करें। एक ही रामायण, महाभारत, भागवत का विभिन्न प्रदेषों में पाठ होता है। श्रीराम और श्री कृश्ण समस्त भारत में सर्वत्र पूजे जाते हैं। -आचार्य क्षितिमोहन सेन

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स्वामी योगानन्द सरस्वती,भाजपा संसद, दिनांक-28.02.1992

‘‘योगाश्रम‘‘ बाराकला (भिण्ड)

उग्रवाद को एकता यात्रा बढ़ावा मिला है, कहने वाले नितान्त भ्रम में है। राश्ट्रीय ध्वज श्रीनगर के लाल चौंक में नहीं प्रत्युत उग्रवादियों की छाती पर फहराया गया है। धन्य है जोषी जी और उनके साथी। उनके अडिग साहस, असीम निर्भयता की जितनी प्रंषसा की जाए कम ही है। साक्षात यमराज (मृत्यु)के सम्मुख देहाध्यास से विमुक्त हुए बढ़ते ही गए और लक्ष्य प्राप्त किया। कांग्रेस के षासनकाल में आज डेढ़ लाख वर्ग कि.मी. भूमि पाकिस्तान और चीन के पैरों तले रौंदी जा रही है। अब भारत माता का मस्तक काष्मीर भी सिसकता जा रहा है। एकता यात्रा से काष्मीर समस्या को सुलझाने की प्रारम्भिक भूमिका तैयार हुई है।                                                                -0-

जिस तरह अलगाववाद, उग्रवाद देष की षांति व्यवस्था के लिये प्रष्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं निष्चित की चिन्ता जनक है। मेरे मत से आज देष को राश्ट्रवाद एवं मानवाद के रास्ते पर आना चाहिए। राजनैतिक स्वार्थो

से हटकर विचार करें, मुझे पूर्ण विष्वास है भारतीय जनता पार्टी की एकता यात्रा मार्गदर्षक होगी।                     स्थानीय षासन एवं नगरीय कल्याण राज्य मंत्री

म.प्र. षासन भोपाल

-सुजान सिंह पटेल

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