Corrupt Politics Kashmir to Kanyakumari: Hurriyat gets money from Pak: Kejri from Satyendra?

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Shashikala-Mamta-Maya-Mehbooba..scorched in the Familial Forest Fire Flames

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SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

Lok Shakti Jan 22: Amar Singh “Mujhe Mulayam ne akela chhoda, sari bat jahir karunga” : Mulayam ki anupsthiti mein S P ka Ghosnapatra jari

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BamBholeNath bhi huye thhe bhaybhit…? Mulayam Shiv bhi bhaybhit huye Ahilesh ke prakop se?

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लेकर समाजवादी पार्टी में घमासान

Son becomes Bhasmasur for Mulayam: Shivpal samaye Trishul-damru mein aur Vishnu ki bhumika mein Amar

अखिलेश ने जारी की मुलायम सिंह से अलग 167 कैंडिडेट्स की लिस्ट: प्रत्याश‌ियों के हो सकते हैं अलग चुनाव चिन्ह

अखिलेश यादव ने अपने पिता की स्थापित समाजवादी पार्टी से अलग अर्थात मुलायम सिंह द्वारा जारी सूची के विपरीत अपनी तरफ से 167 कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी। ज्ञात रहे कि मुलायम सिंह यादव ने इसके पूर्व यूपी वि‍धानसभा चुनाव के लि‍ए 325 कैंडिडेट्स की घोषणा की थी। सूत्रों के मुताबिक, इसमें से 108 अखिलेश को पसंद नहीं थे। इससे नाराज अखिलेश ने समर्थकों के साथ मीटिंग की। फिर अपनी लिस्ट जारी की। सूत्रों के मुताबिक, ये उम्मीदवार अलग-अलग चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ सकते हैं और अखिलेश उनके लिए कैंपेन भी कर सकते हैं। अखिलेश की मीटिंग में करीब 40 विधायक मौजूद थे।

स्मरण रहे कि मुलायम ने जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों का एलान किया था, उसमें उनके भाई शिवपाल यादव तो मौजूद थे, लेकिन बेटे अखिलेश नहीं थे।

– टिकट बंटवारे में भी अखिलेश से ज्यादा शिवपाल की चली। 325 उम्मीदवारों में 108 ऐसे हैं, जो अखिलेश को पसंद नहीं हैं। शिवपाल की पसंद के 164 नेताओं को टिकट मिला।
– 325 कैंडिडेट्स में से 149 नए चेहरे हैं। इनमें मुलायम के करीबी 40, शिवपाल के 85 और अखिलेश के 24 हैं।
– वहीं, 176 मौजूदा एमएलए हैं। इनमें से मुलायम के करीबी 48, शिवपाल के 79 और अखिलेश के 32 करीबी शामिल हैं।
– आजम खान के 5, धर्मेंद्र यादव के 6, रामगोपाल के 2 और बेनी प्रसाद वर्मा के 4 करीबी शामिल हैं।

नयी उम्मीदों का युवराज अखिलेश पुत्र बना मुलायम के लिए भस्मासुर: शिवपाल हुए त्रिशूल डमरू और विष्णु की भूमिका में अमर

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शिव भी भयभीत हुए थे असुर के प्रकोप से

भस्मासुर के अडिग ध्यान और शिव के लिए किए जा रहे तप ने कैलाश पर्वत पर बैठे शिव को भी हिला दिया। शिव इस सोच में पड़ गए कि कौन उन्हें इस कदर पुकार रहा है? अपनी दैविक दृष्टि से शिव ने देखा कि यह कठोर तप भस्मासुर द्वारा किया जा रहा है।
युवा नेता के रूप में मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश ने समाजवादी पार्टी में खूब नाम कमाया था। इससे खुश हो कर पिता मुलायम शिव ने स्वयं के स्थान पर अपने पुत्र अखिलेश को उत्तर प्रदेश का मुख्या मंत्री बना दिया।  और अब मुख्या मंत्री अखिलेश अपने पिता मुलायम शिव के लिए आफत बन गए हैं।

अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को  सैफई गाँव में हुआ था।  वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री हैं। इससे पूर्व वे लगातार तीन बार सांसद भी रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया। उनकी पार्टी को राज्य में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद, 15 मार्च 2012 को उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्य मन्त्री पद की शपथ ग्रहण की।पर अब पारिवारिक विवाद से चर्चा में है।

अखिलेश विवाहित हैं और तीन बच्चों के पिता हैं। डिम्पल यादव उनकी पत्नी हैं, जो कि कन्नौज से निर्विरोध सांसद चुनी गई हैं।

शिक्षा: अखिलेश ने राजस्थान मिलिट्री स्कूल धौलपुर से शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने अभियान्त्रिकी में स्नातक की उपाधि मैसूर के एस॰ जे॰ कालेज ऑफ इंजीनियरिंग से ली, बाद में विदेश चले गये और सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण अभियान्त्रिकी में स्नातकोत्तर किया.

राजनीति में भागीदारी : अखिलेश ने मई 2009 के लोकसभा उप-चुनाव में फिरोजाबाद सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी एस०पी०एस० बघेल को 67,301 मतों से हराकर सफलता प्राप्त की। इसके अतिरिक्त वे कन्नौज से भी जीते। बाद में उन्होंने फिरोजाबाद सीट से त्यागपत्र दे दिया और कन्नौज सीट अपने पास रखी।

मुख्यमन्त्री के रूप में: मार्च 2012 के विधान सभा चुनाव में 224 सीटें जीतकर मात्र 38 वर्ष की आयु में ही वे उत्तर प्रदेश के 33वें मुख्यमन्त्री बन गये। जुलाई 2012 में जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उनके कार्य की आलोचना करते हुए व्यापक सुधार का सुझाव दिया तो जनता में यह सन्देश गया कि सरकार तो उनके पिता और दोनों चाचा चला रहे हैं, अखिलेश नहीं।

उनकी सरकार को दूसरा झटका तब लगा जब एक आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को निलम्बित करने पर चारों ओर से उनकी आलोचना हुई। जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें नागपाल को बहाल करना पड़ा।[9][10] 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में 43 व्यक्तियों के मारे जाने व 93 के घायल होने पर कर्फ्यू लगाना पड़ा तथा सेना ने आकर स्थिति पर काबू किया। मुस्लिम व हिन्दू जाटों के बीच हुए इस भयंकर दंगे से उनकी सरकार की बड़ी किरकिरी हुई।

समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार को झटके पर झटके लगते रहे हैं।

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भगवान शिव इसी असमंजस में थे कि वह किस तरह भस्मासुर से छुटकारा पा सकते हैं, इतने में ही उन्हें पालनहार विष्णु का ध्यान आया। वे विष्णु का स्मरण करने लगे। शिव का आह्वान सुनकर भगवान विष्णु उनके सामने उपस्थित हुए और उनकी सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध हुए।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने 325 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी: समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह की ओर से बुधवार को घोषित किए गए 325 उम्मीदवारों की नाम पर प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुश नहीं है.अखिलेश ने पार्टी उम्मीदवारों की सूची पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जिन जिताऊ प्रत्याशियों के टिकट कटे हैं उनके बारे में वह नेता जी से बात करेंगे.

उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि 78 सीटों पर और विचार-विमर्श के बाद उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे. समाजवादी पार्टी ने 325 में से 176 सीटों पर मौजूदा विधायकों को ही मैदान में उतारा है.
जिस तरह से अखिलेश यादव की पसंद को किनारे करके शिवपाल यादव और अमर सिंह को अहमियत दी गई, उससे लगता है कि सपा प्रमुख ने अबकी बार अखिलेश को फिर से आईना दिखाया है.
अखिलेश यादव के बेहद क़रीबी तीन मंत्रियों अरविंद सिंह गोप, पवन पांडेय और रामगोविंद चौधरी का न सिर्फ़ टिकट काटा गया बल्कि अतीक़ अहमद, रामपाल यादव, नारद राय, गायत्री प्रजापति को दिया गया है.
मुख्या मंत्री अखिलेश यादव अभी तक कहते रहे हैं कि यदि कांग्रेस के साथ उनकी पार्टी का गठबंधन हुआ तो वो 300 सीटें जीतेंगे, लेकिन सपा मुखिया ने साफ़तौर पर गठबंधन से इनकार किया है. यही नहीं, पार्टी ने उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं जिन पर कांग्रेस पार्टी अपनी दावेदारी सौंप सकती थी.

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‘सपा का दंगल’ : अखिलेश ने मुलायम को सौंपी 403 उम्मीदवारों की लिस्ट, भड़के शिवपाल :–

समाजवादी पार्टी में चाचा-भतीजे की लड़ाई एक बार फिर देखने को मिली सकती है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चाचा शिवपाल और भतीजा अखिलेश के बीच तलवार खिंच चुकी है जिसका परिणाम हम कुछ महीने पहले देख चुके हैं. इस बार मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव को झटका देते हुए अपनी तरफ से 403 उम्मीदवारों की लिस्ट सपा प्रमुख मुलायम सिंह के समक्ष प्रस्तुत कर दी है. खबर है कि इस लिस्ट में शिवपाल के करीबी को तरजीह नहीं दी गई है.
अखिलेश द्वारा सौंपी गई उम्मीदवारों की लिस्ट में अंसारी बंधु, अतीक अहमद और अमनमणि त्रिपाठी के नाम को शामिल नहीं किया गया है. अखिलेश के इस कदम से यादव परिवार में एक बार फिर कलह मचना लगभग तय है. इतना ही नहीं, वर्तमान के 35 से 40 विधायकों के नाम भी अखिलेश की लिस्ट से नदारद हैं.
जिन नेताओं को लेकर पार्टी में अखिलेश यादव नाराजगी जता चुके हैं, उनके नाम को लिस्ट में जगह नहीं दी गई है. वहीं अखिलेश के इस कदम से साफ हो गया है कि शिवपाल से उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी, क्योंकि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं और उम्मीदवारों के नाम तय करना उनके कार्यक्षेत्र में आता है.

https://twitter.com/newsanalysisind/status/813338807948840960

अखिलेश के इस कदम के बाद शिवपाल ने टि्वटर के जरिये अखिलेश पर निशाना साधते हुए लिखा कि पार्टी में अनुशासनहीनता करने वालों को बख्‍शा नहीं जाएगा, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता हो. साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि टिकट का बंटवारा जीत के आधार पर होगा और अब तक इस पैमाने को मानक मानकर 175 लोगों को टिकट दिया जा चुका है.
अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने जोर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का भी फैसला पार्टी के संविधान के मुताबिक विधायक दल की बैठक में होगा. पार्टी के भीतर गहमागहमी का माहौल बना हुआ था.| अमर सिंह और शिवपाल ने बीती शाम मुलायम सिंह से भी मुलाक़ात भी की है लेकिन अखिलेश ने अपनी तरफ से लिस्ट सौंपकर फिर से कुछ नए विवाद को हवा दे दी है और अपने इरादे से सबको रु-ब-रु करवा दिया है.

newsanalysisindia-e-Paper Sept 16, 2016

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