Kabristan Issue in UP Election? Muradbad Means Let Dead To Alive! Living Leaders As Dead Due To Appeasement-Divide And Rule Policy

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UP Election Pre Poll Survey: BJP touching majority: If SP fight continue then 2/3rd : Cycle broken: Mayavee crunched

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यूपी चुनाव: सर्वे में BJP बहुमत के करीब-कलह जारी रही तो दो तिहाई सीटें: सायकल टूटेगी : हाथी मायावियों को कुचलेगा

उत्‍तर प्रदेश दुनिया का दसवां सबसे बड़ा प्रदेश में  शासन संभव। सर्वे बता रहा है नोट बंदी के कारण BJP के पक्ष में हवा बह रही है है इससे कमल खिलकर रहेगा।यूपी में बीजेपी का ‘वनवास’ खत्म होता दिख रहा है.

इंडिया टुडे समूह के लिए किए गए एक्सिस माई इंडिया का ताजा ओपिनियन पोल तो कुछ इस ओर ही इशारा कर रहा है. सर्वे में शामिल लोगों में से 76 फीसदी ने नोटबंदी के मोदी सरकार के फैसले का समर्थन किया. हालांकि आम लोगों को इससे हुई परेशानियों के सवाल ये लोग बटे हुए दिखे. 58 फीसदी का कहना था कि नोटबंदी से उन्हें पेरशानी झेलनी पड़ी, वहीं फीसदी लोगों ने बताया कि उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं हुई.

सपा सरकार के राज में यदि कानून-व्‍यवस्‍था पर सवाल उठते हैं। आगामी चुनाव के लिए BJP ने मुस्लिम महिलाओं को आकर्षित करने के लिए ट्रिपल तलाक़ के विरुद्ध कोर्ट के निर्णय का हवाल देते हुए मुहीम छेड़ है। सभी यू पी वालों को अपनी ओर खींचने आकर्षित करने के लिए परिवर्तन रैली द्वारा आक्रामक रणनी‍ति बनाई है।

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यूपी की सभी सीटों के लिए अपने उम्‍मीदवार घोषित करते हुए मायावती ने 97 टिकट मुसलमानों को दिए हैं. अन्य सीन पर भी जातिगत आधार पर उम्मीदवार खड़े कर सपना संजोई है कि लोग विकास पर नहीं धर्म – जाती पर बटन दबाएंगे पर अब ऐसा संभव नहीं है।  लोग तरक्की करना चाहते हैं। खिलते कमल का स्वागत मायावती के विश्वासपात्र आर के चौधरी , मौर्य तथा अन्य हाथी से उतारकर कर चुके हैं।

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Elephant riders Maurya+Chaudhary landed on land: Mayawati in red …

Video for elephant maya newsanalysisindia▶ 1:0 https://www.youtube.com/watch?v=x6s89oq9ScY Jun 30, 2016 – Uploaded by Premendra Agrawal After Swamy Prasad Maurya, now RK Chaudhary quits Maya BSP, alleges election tickets auctioned …

एक्सिस माई इंडिया के  पिछले ओपिनियन पोल में बीजेपी को मिलने वाली अनुमानित सीटों से करीब 30 ज्यादा है. यूपी की कुल 403 सीटों में से बीजेपी को 206-216 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. यूपी में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में मतदान होना है. इंडिया टुडे और एक्सिस ने मिलकर यूपी में अब तक का सबसे बड़ा चुनावी सर्वे किया है जिसके मुताबिक मुख्यमंत्री के तौर पर मतदाताओं की पहली पसंद अखिलेश यादव ही हैं. लेकिन बीजेपी राज्य के मतदाताओं की सबसे पंसदीदा पार्टी साबित हुई है. सर्वे में कई पैमानों पर बीएसपी, सपा को पछाड़ते हुए दूसरे नंबर पर आती दिख रही है. वहीं कांग्रेस पूरी तरह मैदान से बाहर नजर आ रही है. आपको बता दें कि 12 से 24 दिसंबर के बीच 8,480 लोगों की राय इस सर्वे में जानी गई है.

एक नजर में देखते हैं कि यूपी का ओपिनियन पोल क्यों जरूरी है.
भारत का सबसे बड़ा राज्य, जहां से 80 सांसद आते हैं.
– अगर बीजेपी यूपी में जीती, तो 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ये उसकी सबसे बड़ी जीत होगी.
– मोदी लहर का सबसे बड़ी परीक्षा यूपी में ही होनी है. सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी जैसे फैसलों की वजह से नतीजे और भी रोचक हो गए हैं.
– ये चुनाव मायावती और उनकी पार्टी बीएसपी के लिए ‘करो या मरो’ वाला साबित होने वाला है.
– समाजवादी पार्टी की आंतरिक कलह का उसके भविष्य पर क्या असर पड़ेगा, ये भी इस चुनाव में साफ हो जाएगा.
– इस चुनाव अगर अखिलेश जीतते हैं, तो वो एक सशक्त राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित हो जाएंगे.
– पार्टी में नई जान फूंकने और राहुल गांधी की छवि मजबूत करने के लिए कांग्रेस के लिए ये चुनाव बहुत अहम है.

मुख्यमंत्री के तौर पर कौन है पहली पसंद
यूपी में बीजेपी आगे रहती दिख रही हो लेकिन बतौर मुख्यमंत्री लोगों की पहली पसंद अखिलेश यादव ही हैं. पार्टी की अंदरूनी कलह से जूझ रहे अखिलेश के लिए ये बड़ा चुनाव है. बीजेपी ने मैदान में कोई सीएम उम्मीदवार नहीं उतारा है. ऐसे में अखिलेश के पास इसका फायदा उठाने का पूरा मौका है. सीएम की पसंद में दूसरे नंबर पर मायावती हैं.
अखिलेश यादव- 33%
मायावती- 25%
राजनाथ सिंह- 20%
योगी आदित्यनाथ- 18%
प्रियंका गांधी-1%
मुलायम सिंह- 1%
वरुण गांधी- 1%

क्षेत्र के हिसाब से कौन-किसके साथ

क्षेत्र के हिसाब वोट%
पश्चिमी यूपी (136 सीट)
बीजेपी 34%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 5%
अन्य 9%

मध्य यूपी (81 सीट)
बीजेपी 36%
बीएसपी 23%
सपा 24%
कांग्रेस 8%
अन्य 9%

पूर्वी यूपी (167 सीट)
बीजेपी 32%
बीएसपी 28%
सपा 27%
कांग्रेस 5%
अन्य 9%

बुंदेलखंड (19 सीट)
बीजेपी 38%
बीएसपी 28%
सपा 19%
कांग्रेस 5%
अन्य 10%

जाति/धर्म के आधार पर किसे मिलेंगे कितने वोट

सवर्ण
बीजेपी 61%
बीएसपी 10%
सपा 9%
कांग्रेस 8%
अन्य 12%

मुस्लिम
बीजेपी 3%
बीएसपी 14%
सपा 71%
कांग्रेस 6%
अन्य 6%

ओबीसी
बीजेपी 53%
बीएसपी 15%
सपा 13%
कांग्रेस 7%
अन्य 12%

यादव
बीजेपी 14%
बीएसपी 4%
सपा 72%
कांग्रेस 3%
अन्य 7%

एससी/एसटी
बीजेपी 15%
बीएसपी 68%
सपा 7%
कांग्रेस 3%
अन्य 7%

किस आय का मतदाता कौन सी पार्टी के साथ

आय के आधार पर वोट % निम्न आय (10 हजार तक)
बीजेपी 33%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

निम्न/मध्यम आय (10-20 हजार तक)
बीजेपी 33%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

उच्च आय (20 हजार ज्यादा)
बीजेपी 41%
बीएसपी 18%
सपा 26%
कांग्रेस 5%
अन्य 10%

किस व्यवसाय का मतदाता कौन सी पार्टी के साथ

व्यवसाय के आधार पर वोट%
मजदूर
वर्ग
बीजेपी 26%
बीएसपी 37%
सपा 24%
कांगेस 5%
अन्य 8%

किसान
बीजेपी 41%
बीएसपी 18%
सपा 25%
कांग्रेस 7%
अन्य 9%

नौकरीपेशा (डॉक्टर, वकील आदि)
बीजेपी 39%
बीएसपी 17%
सपा 28%
कांग्रेस 7%
अन्य 9%

छोटे व्यापारी
बीजेपी 40%
बीएसपी 18%
सपा 27%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

गांव और शहरों के अंतर का किसे मिलेगा फायदा

भौगोलिक आधार पर वोट %

ग्रामीण
बीजेपी 33%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

शहरी
बीजेपी 35%
बीएसपी 24%
सपा 27%
कांग्रेस 5%
अन्य 9%

यूपी चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या है

क्या बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करना चाहिए

2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी जितने राज्यों में चुनाव लड़ी है, दिल्ली छोड़कर उसने किसी राज्य में अपना सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. इस साल भी पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन इस बार भी बीजेपी उसी पुरानी रणनीति पर चुनाव लड़ने जा रही है. बीजेपी नेता हर बार विकास के नाम पर चुनाव लड़ने की बात दोहराते आए हैं.
हां 69%
ना 24%
पता नहीं 7%

कैसा रहा नोटबंदी का फैसला
अच्छा 76%
बुरा 23%
पता नहीं 1%

नोटबंदी से परेशानी है
हां 58%
नहीं 42%

नोटबंदी से क्या होगा
काले धन और जाली नोट पर लगाम 51%
जनता को दिक्कत 27%
गरीब को फायदा 18%
कोई असर नहीं 3%
सिर्फ एक छोटा सा फैसला 1%

 

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Please feel free to read my books:

Silent Assassins of Lal Bahadur Shastri, Jan 11-1966

Accursed & Jihadi Neighbour

राष्ट्रीय एकता

डी एल एफ – वाड्रा : भ्रष्ट तंत्र 

SUPREME COURT ON HINDU HINDUTVA AND HINDUISM

 

 

The facts by which BJP is going to win 2019 in the leadership of Narendra Modi, Amit Shah and Rajnath Singh?

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वे कौन से तथ्य हैं जिनके आधार पर नरेंद्र मोदी , अमित शाह एवं राजनाथ सिंह के नेतृत्व में २०१९ में भा ज पा पुनः सत्ता में आएगी?

* उत्तर प्रदेश के चुनाव UP election में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर डेमोनेटिज़शन demonetization  नोट बंदी Note bandi  देश ह हित में है इसका प्रमाण पत्र हाशिल करना।
* कांग्रेस मुक्त भारत नारे को और अधिक लगातार सार्थक करने के लिए आवश्यक है उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सत्ता कांग्रेस से हथियाना और गुजरात तह गोवा में सत्ता को कायम रखना। मणिपुर में भी जित दर्ज करे तो सोने में सुहागा।
* महाराष्ट्र म्युनिसिपल चुनाव के बाद क्या उखड़ी से व्यव्हार वाली प्रधान मंत्री मोदी तक पर भी समय समय पर तीखा कटाक्ष करने वाली शिव सेना से और पंजाब असम्बली चुनाव के बाद क्या अकाली दाल से अलायन्स कायम रहेगा ? अलायन्स कायम रहे इसका प्रयास करना होगा।
* नितीश के जनता दल के साथ पुनः अलायन्स करना और बीजू जनता दल को फिर से अपने पक्ष में करना तह जयललिता की मृत्यु उपरांत हलचल मची तमिल नाडु की परिश्थिति को भुनाना भा ज पा नेतृत्व के लिए परीक्षा होगी।

4. Win the Presidential Race: The all important elections for the posts of President and Vice President will come up in June 2017. BJP should strive to get their candidates elected with as less political effort as possible. The above alliances are critical for this reason too. The choice of presidential candidate also can be leveraged to make gains in 2019 elections and make some profound impact on the union cabinet as it currently stands.

5. Make a firm statement via cabinet reshuffle: Post the presidential elections, PM Modi might look to reshuffle his cabinet for the final time ahead of the 2019 elections. It is also likely to be contingent on the choices he makes for Presidential post itself. Nonetheless, keeping the timeframe for 2019 elections, he may wish to make changes to his cabinet early on to give his ministers some time to deliver results. PM Modi can also consider moving some of the experienced regional satraps like Raman Singh to the Centre. If PM Modi decides to elevate one of his top 4 ministers as president, that further opens up room for experienced hands from the states to come and serve in the union cabinet. This will allow emerging leadership in BJP ruled states to move up as well.

Economic Agenda

6. Overcome Demonetization Demons: Indian citizens have shown great faith in PM Modi when he said that the demonetization woes will last 50 days. That there have been no major law and order situations anywhere in India including in non-NDA states shows that people are willing to be patient. However, the suffering is real. Beyond political posturing, the government should continue to be empathetic to this reality, and work hard in undoing the economic losses in the first quarter of 2017.

7. GST Go Live September 2017: GST will be a disruptive reform which will test the change management capability of the state to the hilt. The demonetization experience has already shown that such capability is weak at best given the diversity of the country and the poor administrative infrastructure. The GST can hence not be left for 2018 or it can be an electoral suicide for the 2019 election. If an April 2017 implementation is not possible, the government should settle for the next best option which is to go live mid-year next financial year.

8. Restore RBI’s credibility by leaving it alone- 2016 was a year that left the Reserve Bank badly bruised, because it was kept in the news for the wrong reasons. From the unexpected resignation of Raghuram Rajan, to the flak RBI has received since the demonetization, the institution needs to regain its credibility. For that, the government should focus on appointing independent directors on its board, remove the impression of interference, and leave the institution alone for a year.

9. Income Tax Relief and Direct Benefit Transfers: The Indian tax payers have undergone great hardship with the demonetization process. The government should reward this constituency directly and explicitly. There should be an income tax rate cut in February 2017 budget for individual as well as corporate taxpayers as well as rationalization of the tax slabs. The government should also use the tax receipts from Income Declaration Schemes (IDS) of 2016 for direct transfers at least to the Jan Dhan Yojana (JDY) accounts.

10. Assuaging the trader voter base: Apart from the public at large, traders and small businesses have suffered significantly through the demonetization. A large chunk have not only have seen a huge slump in activity, but have also been seen as corrupt. Given the historical support traders and small businesses have provided to the BJP, the government should not waste an opportunity to reach out to this voter bloc, given its interests are largely economic in nature, and can be met easily through tax breaks, and simpler tax processes.

Governance Delivery

11. Power and Roads Investments: The government has prioritized these two sectors since 2014. In 2017, there should be an attempt to deliver 100% household power coverage to as many villages as possible. Similarly a few large, visible road projects need to complete, especially around metros. There should be a tangible touch-and-feel improvement on long distance commuting in the country.

12. Put BharatNet Project on Steroids: The Modi government put a premium on completing the BharatNet project and has significantly improved coverage on laying fiber optic cable as well as putting working digital infrastructure in gram panchayats. However, the project is still behind schedule. This digital infrastructure can be a big boost for cashless digital India and can be a great complementary step for demonetization.

13. Create Employment Targets for Central Scheme: The government should focus on creating outcome targets for schemes like Swachh Bharat and Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana. India is still not adding as many jobs as required to support a burgeoning workforce. Unless the inputs translate into jobs, government spending on these programs will not mean much.

14. Keep supporting the farmer: Targeted intervention for farmers needs to be continued. The government made a decisive switch in 2016 budget when its policies turned mildly populist for the rural sector. This push needs to be continued, in order to support farm incomes, but not due to higher prices, but higher production. This supply side approach with social nets such as insurance and other incomes will greatly help the rural sector.

Communication and Narrative Building

15. Revive National Digital Operating Center: Like last year, we reiterate our suggestion on winning the digital mind space. Since 2014, several other parties have caught up with the BJP on social media, with even regional parties such as BJD, Samajwadi party and BSP playing catch up. As such, the next leg of digital battle will be on collecting data, through voter engagement, feedback loops, and marketing messages. BJP must reinvigorate its National Digital Operating Center (NDOC) type command centre to stay ahead on the curve. The party has started engaging multiple platforms for political campaigning, and it needs to bring it together the 2019 campaign.

16. Media Briefings: The party continues to struggle with media management. From sparring over surgical strikes, to the evolving question mark over its alleged communal designs, the party remains an object of derision, and also misinformation by the media. We reiterate that the government as well as the party can institute a simple media briefing process; some of these situations can be avoided.

17. Cultivate right leaning intellectuals: The lack of intellectual depth from the stables of the BJP has not been as obvious as the demonetization debate and discourse. Unlike well renowned economists, who even without political agenda came forward to question the move, the BJP largely failed in providing cohesive answers to counter the narrative. While people such as Jagdish Bhagwati and Bibek Debroy did step up to the plate, the lack of bench strength was there for everyone to see. The BJP and its affiliates need to do more to reach out to a broad range of professional disciplines in order to provide the intellectual foundations for its economic ideology. Across sciences, economics and arts, there is no dearth of individuals who can help create a narrative which can help the government and the party, but the efforts won’t fall in place without a central sponsorship. Some positive steps have been taken recently by institutions like India Foundation, but more can be done in order to support this endeavor.

The End Course – Perception Boost with tangible results

The time for preparation is now over, and the government has to top up all the political and economic work done so far with a perception difference. This perception has to be seen through results, as a lot of government effort has gone into positioning itself as anti-corrupt, pro-poor, clean working set up, but with not enough impact seen on the ground. While there is a lot of data to back this up, there is nothing to show in terms of high profile arrests on corruption issues, or guilty being brought to book. There is no need for a witch hunt, but the ongoing investigations in defense deals, land deals, and black money have to get to the point of implicating high priests of Indian political set up. If this does not happen, the clean positioning will ring hollow come 2019. Similarly, on the economic front, the benefits of better governance and coordination within ministries have to start showing up in both project completions, and also a perceivable boost in productivity. Further, the size and scale of new projects that are being launched have to rise significantly, in order to display ambition, like the government has done with recent project launches in Mumbai.

2017 is the year when BJP can become the clear fulcrum of Indian politics, where all opposition becomes anti BJP, reminiscent of the late 1980s and late 1990s time period when Congress occupied that space. Or the party can lose momentum and go on a complete back-foot if it fails to win the several mini-battles. The Modi-Shah combine will have to work hand-in-hand closely managing key issues to achieve the former. The choice is between a year of clear consolidation versus a lost opportunity resulting in an uphill re-election climb.